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CCP के ‘डेवलपमेंट मॉडल’ की समझें विनाशलीला, चीन के शानदार शहरों को यही डुबा दिया

चीन जिस बेहतरीन अर्थव्यवस्था को दुनिया के सामने पेश करता है उसके पीछे एक गहरी काली खाईं है और यह कई मौकों पर ऐसा देखा गया है। जिस विकास मॉडल पर वह विश्व भर में ढिंढोरा पीटता है, उसी मॉडल के कारण चीनी शहर अब Ghost Town बनते जा रहे हैं। कोरोना के कारण इस  दोषपूर्ण विकास मॉडल की पोल खुल गयी और एक के बाद एक चीनी शहरों की अर्थव्यवस्था अब बर्बादी की राह पर है। पहले चीन का सिलिकॉन वैली माना जाने वाला Shenzen और अब मैनहटन माना जाने वाला Tianjin की अर्थव्यवस्था भी अपने ढलान पर है।

SCMP की रिपोर्ट के अनुसार चीन की चार नगरपालिकाओं में से एक Tianjin पहली बार इस साल आर्थिक आकार के मामले में चीन के शीर्ष 10 शहरों से बाहर होने की उम्मीद है। 2020 की पहली तीन तिमाहियों में इस नगरपालिका का आर्थिक उत्पादन 1 ट्रिलियन युआन यानि 151.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, जो देश के दो सबसे बड़े शहरों शंघाई और बीजिंग के आकार का केवल एक तिहाई और Hangzhou और Nanjing जैसे क्षेत्रीय आर्थिक हब के नीचे है।

Tianjin का खराब प्रदर्शन चीन में सभी का ध्यान आकर्षित कर रहा है, क्योंकि यह 15.6 मिलियन वाला महानगर चीन के आर्थिक मानचित्र पर प्रासंगिकता दिन प्रतिदिन खो रहा है।

वहीं एक और शहर की बात करे तो वुहान की अर्थव्यवस्था अभी भी वर्ष की पहली तीन तिमाहियों में 10 प्रतिशत सिकुड़ी है, जो प्रमुख शहरों का सबसे खराब प्रदर्शन था। इसी दौरान Tianjin ने शून्य वृद्धि दर्ज की।

Tianjin की आर्थिक गिरावट पूरे चीन की त्रुटिपूर्ण विकास मॉडल की एक बेहतरीन कहानी है कि कैसे सरकार द्वारा दिये गए ऋण पर खड़ा हुआ शहर कितनी जल्दी ताश के पत्तों की तरह बिखर सकता है। आज जो हाल Tianjin का हुआ है, वह कई चीनी शहरों में होना निश्चित है क्योंकि अब न सिर्फ विदेशी कंपनियाँ बल्कि चीनी बैंक और निवेशक भी सोच समझ कर अपना रुपया लगा रहे हैं।

Tianjin का debt-to-GDP अनुपात पिछले साल के 35 प्रतिशत से बढ़कर इस वर्ष 40 प्रतिशत से अधिक हो सकता है, जिससे यह शहर चीन के शीर्ष पांच सबसे ऋणी क्षेत्रों में से एक बन जाएगा।

2008 के बाद के वर्षों में Tianjin एक तेजी से उभरते आर्थिक विकास मॉडल का पोस्टर बॉय बना हुआ था। उस दौरान यह किसी को पता नहीं था कि इस शहर के अचानक विकास का कारण क्या था।

Tianjin का विकास दर 2010-12 के बीच चीन में पहले स्थान पर पहुंच गया था, जिससे यह अनुमान लगाया गया था कि यह राष्ट्रीय विकास के लिए एक शक्तिशाली इंजन की तरह काम करेगा। अगले ही कुछ वर्षों में सच्चाई सभी के सामने आने लगी और चीन का यह “नया मैनहट्टन” एक भुतिया शहर बन गया तथा वहाँ स्थानीय सरकार के स्वामित्व वाली कंपनियों के बीच वित्तीय तनाव के संकेत मिलने लगे थे।

उदाहरण के लिए, Tianjin सरकार को 2010 में चार अलग स्टीलमेकर्स के विलय का आदेश देना पड़ा। वहीं इस शहर ने कई हाई-प्रोफाइल निवेशकों को भी खो दिया। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने Tianjin में अपने अंतिम चीनी टेलीविजन फ़ैक्टरी को बंद करने का फैसला लिया है। एक बाद एक कर कई देशों के चीन पर प्रतिबंधों के कारण चीनी अर्थव्यवस्था और विकास मॉडल की पोल खुलती जा रही है।

इसी तरह हुवावे पर बैन का सबसे बड़ा असर चीन की सिलिकॉन वैली माना जाने वाला शहर Shenzen पर पड़ा जिससे ये शहर तबाह होने की कगार पर है। हुवावे के बैन होने से चीन विश्व के औद्योगिक ग्लोबल सप्लाई चेन से बाहर होने के कगार पर आ चुका है।

चीन के ताज़ा हालात के कारण इसके सभी शहरों की विदेशी पूंजी, प्रौद्योगिकी और बाजारों तक आसान पहुंच, जो इसके उदय के लिए बहुत महत्वपूर्ण थी, सभी दूर हो चुके हैं। आने वाले वर्षों में इसी त्रुटिपूर्ण मॉडल पर उभरे कई चीनी शहरों के ढहने का अनुमान है जिसके बाद चीन की अर्थव्यवस्था भी गर्त में गोता लगाएगी।




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