उत्तर प्रदेश

मोदी की मंत्री के खिलाफ सपा की रणनीति, लड़ाए जाएंगे ये बाहुबली

अनुप्रिया पटेल के खिलाफ इस प्रत्याशी पर दांव खेल सकती है सपा, चर्चाओं का दौर जारी

लोकसभा चुनाव को लेकर विभिन्न दलों द्वारा उम्मीदवारों की घोषणा करने का सिलसिला शुरू हो चुका है। कांग्रेस द्वारा गुरुवार को प्रदेश के ग्यारह लोकसभा क्षेत्रों के प्रत्याशी घोषित करने के बाद समाजवादी पार्टी ने शुक्रवार को छह उम्मीदवारों की घोषणा कर दी। पहली सूची में पार्टी संरक्षक मुलायम सिंह यादव सहित अन्य नेताओं के नाम शामिल हैं।

पार्टी के राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव की ओर से घोषित इस सूची में मैनपुरी से मुलायम सिंह यादव, बदायूं से धर्मेन्द्र यादव, फिरोजाबाद से अक्षय यादव, इटावा (सुरक्षित) से कमलेश कठेरिया, राबर्ट्सगंज (सुरक्षित) से भाईलाल कोल और बहराइच (सुरक्षित) लोकसभा क्षेत्र से शब्बीर वाल्मीकि को उम्मीदवार बनाया गया है।

बताते चले बुआ-बबुआ के गठबंधन में सपा के खाते में आई मिर्ज़ापुर संसदीय सीट पर सपा केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल के खिलाफ किसी पटेल के अलावा चर्चित ब्राह्मण चेहरे की भी तलाश कर रहा है। ताकि गठबंधन मतों में ब्राह्मण चेहरे के नाम पर बीजेपी के सवर्ण मतों में सेंधमारी कर इस सीट पर जीत पक्की किया जाय। इसके लिए सपा में मजबूत ब्राह्मण प्रत्यासी को इस सीट से उतारने की तैयारी चल रही है।

सपा के लिए मिर्ज़ापुर संसदीय सीट प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ है। क्योंकि 2009 के संसदीय चुनाव में इस सीट पर सपा के प्रत्यासी बालकुमार पटेल ने जीत हासिल कर पार्टी का परचम लहराया था।मगर लोकसभा चुनाव 2014 में भाजपा औऱ अपना दल के बीच हुए गठबंधन में इस सीट को सपा से अपना दल ने छीन लिया। चुनाव में सपा कांग्रेस से नीचे चौथे स्थान पर पहुच गयी। इसी लिए इस बार सपा इस सीट पर दुबारा जीत के लिए चुनावी समीकरण के साथ -साथ जातीय समीकरण पर खासा ध्यान दे रही है।संसदीय सीट पर जातीय समीकरण को देखे तो पटेल मतों के बाद सबसे ज्यादा ब्राह्मण मत है।राजनैतिक दलों के मुताबिक 18 लाख मतों में लगभग 3.5 लाख पटेल मतदाता और दो लाख के करीब ब्राह्मण मतदाता है।

ब्राह्मण मतदाता कांग्रेस से दूर होने के बाद परंपरागत रूप से भाजपा के वोटर रहे है

हालांकि समय-समय पर हुए चुनावों में इन मतों में कुछ मतों का ध्रुवीकरण बसपा और काग्रेस के बीच भी होता रहा है। सूत्रों के मुताबिक सपा की निगाह इस बार इसी वोट बैंक पर है।अगर सपा ने किसी पटेल समाज से प्रत्यासी नही बनाया तो सपा किसी ब्राह्मण चेहरों को प्रत्यासी बना कर एक तीर से कई निशाने साधना चाहती है। पहली बात तो यह कि पटेल मतदाताओ में अनुप्रिया पटेल की मजबूत पकड़ देख पार्टी अपनी रणनीति में बदलाव करने को मजबूर है।

दरअसल, पार्टी गठबंधन मत यादव, मुस्लिम और दलित में ब्राह्मण मतों को जोड़ने का प्रयास कर रही है।इससे जहां भाजपा और अपना दल(एस) गठबंधन को नुकसान होगा वही सपा को बढ़त बनाने का मौका भी मिल जायेगा।जिले से सपा के कई ब्राह्मण नेताओ ने इसी संभावनाओं को देखते हुए टिकट के लिए आवेदन किया है। जिनमे मझवां विधानसभा से पार्टी के पूर्व प्रत्यासी रोहित उर्फ लल्लू शुक्ला टिकट के लिए प्रमुख दावेदार है। इसके अलावा सपा नेता राजू चौबे,आश्वनी उपाध्याय सहित कई नाम है। हालांकि सपा के इतिहास को देखे तो वह बाहर से भी प्रत्याशियों को लड़ने के लिए उतारती रही है। इसलिए संभावना व्यक्त की जा रही है अगर गुटबाजी हुई तो बाहर से भी किसी प्रत्यासी को लड़ाया जा सकता है।

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