मायानगरी

फ़िल्मों को छोड़कर बॉलीवुड की ये हॉट एक्ट्रेस बन गई साध्वी, वजह ही कुछ ऐसी थी !

हमारे बॉलीवुड में बहुत सारी फिल्मों का दौर रहा है और पहले के दशक से लेकर आज तक बहुत सारी फिल्में हमे देखने को मिली है और उन फिल्मों को देखकर हमे काफी मनोरंजन भी मिला है, आपको बता दे कि इन फिल्‍मों में हीरो के अभिनय के अतिरिक्‍त विलेन के रोल को भी काफी पसन्‍द किया जाता रहा है और जैसा की हम सभी जानते है की फिल्मो में मुख्य आकर्षण का केंद अभिनेत्रियाँ होती है लेकिन आज हम ऐसी एक अभिनेत्री के बारे में बताने वाले है जिन्होंने फ़िल्मी दुनिया को छोड़ कर साध्वी जीवन को स्वीकार कर लिया है.

इनका नाम है बरखा मदान. इन्होने कई फिल्मो में काम किया है लेकिन इसके बाद बरखा की जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया कि  जिसकी वजह से अपना घर छोड़कर 2012 में साध्वी बन गई. बरखा ने नन बनने का फैसला आर्थिक तंगी, खराब करियर या ब्रेकअप की वजह से नहीं लिया था.

1994 में बरखा मिस इंडिया फाइनलिस्ट थीं, उसी साल सुष्मिता सेन और ऐश्वर्या राय ने मिस इंडिया यूनिवर्स और मिस इंडिया वर्ल्ड का खिताब जीता था.  मॉडल के तौर पर खुद को स्थापित करने के बाद बरखा ने 1996 में ‘खिलाड़ियों का खिलाड़ी’ फिल्म के जरिए बॉलिवुड में कदम रखा था. इसके बाद उन्होंने इंडो-डच प्रोडक्शन ‘ड्राइविंग मिस पालमेन’ में काम किया. इसके बाद वो 7 साल तक पर्दे पर नजर नहीं आई और राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘भूत’ के साथ एक्टिंग की दुनिया में वापसी की. इसके बाद उन्होंने करीब 20 टीवी सीरियलों में भी काम किया.

जब दलाई लामा से मिलीं बरखा…
बताया जाता है कि साल 2002 में धर्मशाला में एक इवेंट के दौरान जब उन्होंने दलाई लामा जोपा रिपोंचे को सुना तो उनके मन में भी नन बनने का ख्याल आया. जब उन्होंने यह इच्छा दलाई लामा के सामने रखी तो वे बोले, ‘क्यों, क्या तुम्हारा ब्वॉयफ्रेंड से झगड़ा हुआ है? मठ में रहने का मतलब यह नहीं होता कि आप किसी से भागे हैं.’ इसके बाद बरखा को बौद्ध धर्म दर्शन शास्त्र से जुड़ने की सलाह दी गई. इस सलाह का उद्देश्य बरखा को इस बात का ज्ञान कराना था कि आखिर क्यों वह नन बनने की राह चुनना चाहती है.

इसके बाद बरखा ने खुद की प्रोडक्शन कंपनी बनाई और उसके बैनर तले दो फिल्मों का निर्माण किया. एक ‘सोच लो’ (2010) और दूसरी ‘सुरखाब’. साल 2012 में एक बार फिर बरखा काठमांडू स्थित बौद्ध मठ पहुंचीं तो उनसे फिर वही सवाल किया गया. जवाब में बरखा ने कहा, ‘सब कुछ अपनी जगह सही चल रहा है, इसके बावजूद उन्हें ऐसा लगता है कि कुछ तो है जो छूट रहा है.’

…और नन बन गईं बरखा
4 नवंबर 2012 को सुबह-सुबह 9 बजे बरखा ने संन्यास ले लिया. इस मौके पर उनके पेरेंट्स भी वहां मौजूद थे. उन्होंने बरखा को पूरा सपोर्ट किया. कभी ग्लैमर इंडस्ट्री की चमक-धमक में रहने वाली बरखा की अलमारी में अब मात्र दो जोड़ी कपड़े और एक जोड़ी चप्पल ही मिलेगी. जहां तक उनकी संपत्ति की बात है तो वे अपने पास एक मोबाइल और एक लैपटॉप ही रखती हैं. उन्हें अक्सर धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश में मेडिटेशन करते या फिर बौद्ध गया के तारा चिल्ड्रेन प्रोजेक्ट में HIV ग्रस्त बच्चों की सेवा करते देखा जा सकता है.

Back to top button