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इस बीजेपी नेता को डीटीसी बस में हुआ था इश्क, 9 साल लगाए लड़की के घर के चक्कर

अगर बीजेपी के नेताओ की बात करे तो बीजेपी के दिग्गज नेता शाहनवाज हुसैन उन लोगो में से एक माने जाते है, जिनकी छवि काफी खुले विचारो वाली है. जी हां अगर हम ये कहे कि उनकी सोच उनके अपने जीवन में भी झलकती है, तो कुछ गलत नहीं होगा. दरअसल हम ऐसा इसलिए कह रहे है, क्यूकि बीजेपी के इस नेता ने दिल्ली की एक हिन्दू लड़की से शादी की थी. आपको जान कर ताज्जुब होगा कि इन्हे उस लड़की से बेहद प्रेम हो गया था और फिर इन्होने उसी लड़की के साथ प्रेम विवाह यानि लव मैरिज की. हालांकि ये सब करना इनके लिए इतना आसान नहीं था. जी हां उस लड़की के प्यार को पाने के लिए यानि उससे शादी करने से के लिए इन्हे एक या दो नहीं बल्कि पूरे नौ साल तक बहुत सारे पापड़ बेलने पड़े.

वैसे हम यहाँ असली के पापड़ की बात नहीं कर रहे, बल्कि उन मुश्किलों की बात कर रहे है, जो हुसैन साहब को झेलनी पड़ी. गौरतलब है कि साल 1986 में शाहनवाज हुसैन अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के लिए डीटीसी की बसों में सफर किया करते थे. ऐसे में रोज बस में सफर करने के दौरान अचानक उनकी नजर एक लड़की पर पड़ी. जी हां ये वही लड़की है, जो उन्हें पहली ही नजर में पसंद आ गई. गौरतलब है कि हुसैन साहब ने अपने एक इंटरव्यू के दौरान भी ये कहा था कि उनकी आंखे बेहद खूबसूरत है. इसके बाद उन्होंने कहा कि उन्होंने मैडम की आँखों में देखा और वो वही उनकी आँखों में खो गए. जी हां हुसैन साहब का कहना है कि उनकी आंखे ही बहुत कुछ बोलती है. हालांकि जिस लड़की को हुसैन साहब पसंद करते थे, वो अचानक ही कही खो गई.

मगर कुछ दिनों के बाद उन्हें वो लड़की दिल्ली की ही एक बस में मिल गई. जिसके बाद उन्होंने उस लड़की को फॉलो करना या यूँ कहे कि उसका पीछा करना शुरू कर दिया. गौरतलब है कि इन दोनों की कई बार बस में मुलाकात हो चुकी थी, लेकिन फिर एक दिन ऐसा मौका भी आया, जब हुसैन साहब को तो सीट मिल गई थी, लेकिन उस लड़की को सीट नहीं मिली. जिसके चलते हुसैन साहब ने उस लड़की को अपनी सीट ऑफर कर दी. बरहलाल प्यार के हाथो मजबूर होकर हुसैन साहब एक दिन उस लड़की के घर तक जा पहुंचे. जी हां इस दौरान इधर उधर की बातें करके उन्होंने लड़की के घर वालो से एक अच्छा रिश्ता कायम कर लिया.

गौरतलब है कि अपनी बातों से हुसैन साहब ने लड़की के घर वालो से एक अच्छी जान पहचान कायम कर ली. मगर जब बात बनती नहीं दिखी तो हुसैन साहब ने तय कर लिया कि वो लड़की को अपने दिल की बात बता कर रहेंगे. बस इसी दौरान उनके किसी रिश्तेदार के यहाँ पार्टी थी. जिसमे हुसैन साहब और वो लड़की दोनों ही पहुँच गए. बरहलाल इसी पार्टी में हुसैन साहब ने बातो ही बातों में अपने दिल की बात उस लड़की से कह दी. हालांकि उनकी बातें सुन कर लड़की को तो गुस्सा ही आ गया.

वो इसलिए क्यूकि उस दौर में अलग धर्म में शादी करना कुछ खास अच्छा नहीं माना जाता था. वही लड़की ने भी हुसैन साहब को मना कर दिया. ऐसे में बेचारे हुसैन साहब बुरी तरह से फंस गए. मगर इसके बावजूद भी उन्होंने प्यार में हार नहीं मानी और फिर एक दिन उस लड़की ने भी हां कर ही दी. तो चलिए अब आपको उस लड़की का नाम भी बता देते है. बता दे कि वो लड़की कोई और नहीं बल्कि रेनु थी. जो आज के समय में हुसैन साहब की पत्नी है.

अब यूँ तो इस प्रेम कहानी को बनने में नौ साल लग गए, लेकिन ये प्रेम कहानी वास्तव में किसी सच्ची प्रेम कहानी से कम नहीं थी.

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