राजनीति

अगर आगे भी रहा यही हाल, तो बीजेपी के कोर वोटर हो जाएंगे मुसलमान

अगर यही हाल रहा तो मुसलमान बीजेपी के कोर वोटर हो जाएंगे. साल 2019 के चुनाव में कई ऐसी सीटों पर बीजेपी जीती है जहां मुस्लिम वोटर 40 फीसदी से ज़्यादा हैं. 20 से 40 फीसदी संख्या वाली मुस्लिम बहुल सीटों पर भी बीजेपी की धमाकेदार जीत चौंकाने वाली है. ये सब एक बड़ा संकेत हैं.

मुसलमानों का इस देश के निर्माण में बड़ा योगदान हमेशा से रहा है. आप विरासत उठाकर देख लें तो साहित्य, संगीत, कला, विज्ञान, राजनीति, खेल हर क्षेत्र में वे इस मुल्क की नसों का अभिन्न संवेदन हैं. शायद इसीलिए संघ ने भी पुरानी बातों को दरकिनार कर ये घोषित तौर पर मान लिया है कि बिना मुसलमानों के किसी भी हिंदुत्व की कल्पना नही की जा सकती.

पर इन्हीं मुसलमानों को सालों नही, बल्कि दशकों से वोट बैंक बनाकर और भरम भुलावे के सात तालों में कैद कर कथित मुस्लिम परस्त पार्टियां उनके वोट बटोर बटोर कर सत्ता का अट्टहास करती आई हैं. इस बीच असदउद्दीन ओवैसी के महलनुमा बंगले तैयार होते गए. उनके पांच सितारा अस्पताल बन गए. आज़म खान और अहमद पटेल की सम्पत्तियों के चिराग़ माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई पार कर गए.

दूसरी तरफ बहराइच से लेकर अलीगढ़ और सिवान से लेकर हैदराबाद तक का बहुसंख्यक आम मुसलमान गरीबी, बेकारी और अशिक्षा की लाचारियों में ही ज़ब्त रह गया. कभी आवाज़ उठाई भी तो “ब्लैकमेलिंग” की तलवार से चुप करा दिया गया कि हम गए तो वे खा जाएंगे. मानो खाने और हजम करने पर इन्हीं का कॉपीराइट हो! 2019 का मैनडेट मुसलमानो को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करने वाली पार्टियों के लिए आइना है. वे इसे देखें और अपनी ही शक्ल से चिढें. हर रोज़ चिढें. सुबह-शाम चिढें.

ये लेख वरिष्ठ टीवी पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के फेसबुक पेज से साभार लिया गया है। ये लेखक के निजी विचार हैं।

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