राजनीति

अमित शाह हुआ करते थे गांधी के फैन, जब मोदी को पता चला तो..

भारतीय राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह आज अपना 55वां जन्मदिन मना रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री अमित शाह  22 अक्टूबर 1964 को मुंबई में जन्मे थे. अमित शाह को  राजनीति का चाणक्य  यू हीं नहीं कहा जाता. वो अमित शाह ही हैं, जिन्होंने भाजपा को विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक दल बनाया.

ये कहना गलत नहीं होगा कि भाजपा अपने स्वर्णिम दौर से गुजर रही है और इसके पीछे सबसे बड़ा योगदान अमित शाह का ही है. अमित शाह की विपक्ष की हर चाल को नाकाम कर देने वाली रणनीति के चलते ही भाजपा की एक बाद एक कई राज्यों में सरकार बनी और केंद्र की सत्ता में प्रचंड बहुमत के साथ वापसी हुई.

अमित शाह बहुत कम उम्र में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए. 1982 में जब वो कॉलेज में थे. उन्हीं दिनों उनकी मुलाकात नरेंद्र मोदी से हुई. तब शाह केवल 17 साल के थे. इस तरह मोदी और शाह के बीच रिश्तों के 37 साल हो चुके हैं. 1983 में वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े. 1986 में वो भाजपा में शामिल हुए. 1987 में उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा का सदस्य बनाया गया.

अमित शाह की मां महात्मा गांधी की प्रशंसक थीं. उनसे अमित शाह को भी गांधी को पढने का शौक जागा. लेकिन जब उनके कॉलेज के दिनों में नरेंद्र मोदी से मुलाकात हुई तो उन्होंने उनसे कहा, ‘तुम गांधी को पढ़ते रहो लेकिन साथ ही विवेकानंद को भी पढो. ये तुम्हारी विचार प्रक्रिया को विस्तृत फलक देगा.’

शाह को पहला बड़ा राजनीतिक मौका 1991 में मिला, जब लालकृष्ण आडवाणी को गांधीनगर संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ना था. इस चुनाव प्रचार का जिम्मा अमित शाह ने संभाला. फिर उन्होंने 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी के चुनाव प्रचार का जिम्मा संभाला.

भारतीय जनता पार्टी के नेता उनके दिमाग के जबरदस्त कायल हैं. पिछले चार सालों में उन्होंने पूरी पार्टी का ढांचा और कार्यशैली जिस तरह बदली है और जिस तरह लगातार एक्टिव रहते हैं, उससे उन्हें आधुनिक चाणक्य कहा जाने लगा है. बीजेपी के उनके गुजरात के करीबी कहते हैं कि उनका दिमाग मशीनगन की तरह तेज चलता है.

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