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नीतीश हल्के में ले रहे सवर्णों की नाराजगी, एनडीए को पड़ेगी बहुत भारी!

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नई दिल्ली: चुनाव से पहले बिहार में सियासी भूचाल आ गया है, राजनीती हर रोज नए-नए रंग दिखा रही है, इस बीच सवर्णों का गुस्सा सवर्ण नेताओं पर फूट रहा है. प्रतिदिन कोई न कोई नेता सवर्णों के गुस्से का शिकार हो रहा है. अंदर ही अंदर सरकार के खिलाफ इस समाज में आक्रोश तेजी से बढ़ रहा है अब तो एनडीए के नेता ही खुलेआम सरकार के खिलाफ आ गये हैं. भाजपा  सांसद सीपी ठाकुर 7 अक्टूबर को गया में सवर्णों पर जुल्म के खिलाफ धरना देने जा रहे हैं.

बुधवार को मुजफ्फरपुर में केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव के काफिले पर स्याही फेंकी गई तो गुरुवार को गोपालगंज में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के काफिले के सामने हंगामा हुआ. इससे पहले सासाराम में मनोज तिवारी, भागलपुर में अश्विनी चौबे को भी सवर्ण समाज के लोगों ने काले झंडे दिखाये और हंगामा किया. सबसे ताजा मामला गुरुवार का है. गोपालगंज में कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी युवा मोर्चा के कार्यक्रम में हिस्सा लेने जा रही थी तो लोगों ने हंगामा किया. बीजेपी कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाने वालों से मारपीट भी की.

बिहार में एससी-एसटी एक्ट के साथ ही 6 सितंबर को हुए भारत बंद के दौरान गिरफ्तार किए गए लोगों की रिहाई की मांग तेज होती जा रही है. लेकिन सत्ताधारी बीजेपी और जेडीयू इस मुद्दे को हल्के में ले रही है. यही वजह है कि पार्टी लाइन से अलग जाकर बीजेपी सांसद सीपी ठाकुर ने 7 अक्टूबर को गया में धरना देने का एलान किया है. सीपी ठाकुर के इस आंदोलन को एलजेपी के सांसद रहे बाहुबली सूरजभान का साथ मिला है.

सवर्णों की नाराजगी बिहार में एनडीए का नुकसान पहुंचा सकती है. वैसे भी इन दिनों नीतीश सवर्णों की नाराजगी को कोई भाव नहीं दे रहे और पार्टी राज्य में एससी-एसटी वोटरों की गोलबंदी के लिए सम्मेलन करने में जुटी है. इससे पहले कुशवाहा जाति के नेताओं के साथ भी नीतीश मीटिंग कर चुके हैं. बिहार में जहां तक सवर्णों के वोट का सवाल है तो राजपूत, भूमिहार, ब्राह्मण और कायस्थ यहां सवर्ण हैं. इनकी आबादी करीब 15 फीसदी है. सवर्ण परंपरागत रूप से बीजेपी के वोटर रहे हैं.

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