उत्तर प्रदेश

कुंभ स्नान में टूटी ये बड़ी परंपरा, भड़के गए नागा और फिर…

BIG NEWS: कुंभ के शाही स्नान में टूटी ये बड़ी परंपरा, नागाओं से पहले पब्लिक ने कर लिया शाही स्नान, भड़क गए नागा और फिर...

तीर्थराज प्रयाग में मकर संक्रांति के अवसर पर अखाड़ों के प्रथम शाही स्नान के साथ मंगलवार को कुंभ का आगाज हो गया । सुबह के छह बजते ही अखाड़ों के सन्यासी पुरी शान शौकत के साथ पवित्र संगम में पुण्य की डुबकी लगाने लगे। शाही स्नान का यह सिलसिला शाम करीब पांच बजे तक जारी रहेगा।

प्रयागराज में संगम के घाट पर शाही स्नान शुरू होने से पहले ही महानिर्वाणी अखाड़े के नागा संत भड़क गए। हुआ कुछ यूं कि जिस पुल से शाही स्नान के लिए नागाओं की यात्रा आ रही थी, वहीं एक बैरीकेडिंग से आम श्रद्धालु उसी घाट पर स्नान के लिए प्रवेश कर गए, जो घाट शाही स्नान के लिए रिजर्व थे।

टूटी परंपरा
परंपरा है कि कुंभ का प्रथम शाही स्नान नागा संत ही करते हैं, लेकिन इस बार वर्षों पुरानी परंपरा टूट गई। नागाओं से पहले आम पब्लिक ने शाही स्नान किया, तो नागा भड़क गए। इस दौरान अखाड़े के एक नागा संत ने पुलिस अधिकारी को जमकर खरी खोटी सुनाई। पुलिस अधिकारी से साफ शब्दों में कहा कि यदि हमने धक्का दिया, तो ये नदी में गिर जाएंगे और फिर आरोप हम पर ही लगेगा।

40 मिनट का समय
शाही स्नान के लिए महानिर्वाणी अखाड़े का 40 मिनट का समय दिया गया है। 6:55 बजे घाट से निकलकर इन अखाड़ों के जुलूस 7:55 बजे अपने शिविरों में पहुंच जाएंगे। महानिर्वाणी और अटल अखाड़े के बाद के बाद प्रशासन ने स्नान के लिए दूसरे नंबर पर निरंजनी और आनंद अखाड़े को समय दिया है। 6:05 बजे निरंजनी और आनंद अखाड़े के जुलूस निकलेंगे। 7:05 बजे संगम नोज पहुंचकर इन दोनों अखाड़ों के संतों की भी 40 मिनट तक डुबकी लगेगी। 7:45 बजे घाट से निकलकर यह अखाड़े 8:45 बजे शिविर पहुंच जाएंगे। फिर सुबह सात बजे एक साथ जूना, अग्नि और आवाहन अखाड़े के जुलूस शाही स्नान के लिए निकाले जाएंगे। इनके घाट पर पहुंचने का समय आठ बजे का रखा गया है। इन्हें भी 40 मिनट डुबकी लगाने का मौका मिलेगा। यह तीनों अखाड़े 8:40 पर संगम नोज से चलकर 90:45 बजे अपने-अपने शिविरों में आ जाएंगे। इनके बाद बैरागियों की बारी आएगी। बैरागी परंपरा के अखाड़ों में निर्मोही अखाड़े का जुलूस सुबह 9:40 बजे निकलेगा। 10:40 बजे इस अखाड़े के संत संगम नोज पहुंचेंगे। 11:10 बजे संगम नोज से इनकी रवानगी होगी। दोपहर 12 बजे इस अखाड़े के बैरागी संत शिविर में पहुंच जाएंगे। इनके बाद दिगंबर अनी अखाड़े का जुलूस शाही स्नान के लिए 10:20 बजे चलेगा। दिन के 11:20 बजे संगम नोज पहुंचकर इस अखाड़े के संत 50 मिनट तक स्नान करेंगे। 12:10 बजे संगम नोज से निकलकर 1:10 बजे इस अखाड़े के बैरागी शिविर पहुंचेंगे। फिर इस पंरपरा में निर्वाणी अखाड़े के साधु-संतों का जुलूस 11:20 बजे संगम नोज के लिए रवाना होगा। इनके घाट पर पहुंचने का समय 12:20 बजे है। इस अखाड़े के संत 30 मिनट तक स्नान कर 12:50 बजे शिविर के लिए निकलेंगे। इनके बाद उदासीन परंपरा के संतों में नया पंचायती अखाड़े का जुलूस दोपहर 12:15 बजे निकलेगा। 1:15 बजे इस अखाड़े के संत संगम नोज पहुंचेंगे। इस अखाड़े को 55 मिनट तक स्नान का समय दिया गया है। 2:10 बजे संगम नोज से निकलकर इस अखाड़े के संत 3:10 बजे अपने शिविर में पहुंचेंगे। फिर दोपहर 1:20 बजे बारी आएगी बड़ा पंचायती अखाड़े की। दोपहर 2:20 बजे इस अखाड़े के संत संगम नोज पहुंचेंगे।इनके लिए सर्वाधिक एक घंटे का समय शाही स्नान के लिए दिया गया है। शाम 3:20 बजे इस अखाड़े के संत संगम नोज से निकलकर शाम 4:20 बजे शिविर पहुंचेंगे। अंत में 2:40 बजे निर्मल अखाड़े का जुलूस निकलेगा। इस अखाड़े के संत 3:40 बजे संगम नोज पहुंचेंगे

कुम्भ क्षेत्र: श्रद्धालुओं ने खुले आसमान के नीचे बितायी रात, फिर लगायी डुबकी

कुम्भ नगरी (प्रयागराज)। कुम्भ क्षेत्र में मकर संक्रांति के स्नान पर देश-प्रदेश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं ने खुले आसमान के नीचे रात्रि बितायी। बीती रात दो बजकर तीस मिनट के बाद संक्रांति की तिथि शुरु होते ही श्रद्धालुओं ने विभिन्न घाटों पर डुबकी लगायी। मकर संक्रांति के स्नान को पावन माना जाता है। श्रद्धालुओं द्वारा स्नान कर पुण्य की प्राप्ति की जाती है। मंगलवार को मकर संक्रांति के अवसर पर श्रद्धालुओं ने विभिन्न घाटों पर भोर से ही डुबकी लगानी शुरु कर दी। इसके पहले रात्रि पहर कुम्भ क्षेत्र में आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने खुले आसमान के नीचे टाट या कम्बल बिछाकर अपनी नींद पूरी की। ठंडी हवाओं के चलने के बाद भी श्रद्धालुओं की श्रद्धा में कोई कमी नहीं दिखी और जैसे ही उनकी नींद टूटी, वे घाट की ओर बढ़ चले। श्रद्धालुओं ने पुरे आनन्द भाव से स्नान किया। खुले आसमान में सोये प्रतापगढ़ जिले से कुम्भ क्षेत्र में पधारे श्रद्धालुओं रवि और आकाश ने बताया कि वे मोटरसाइकिल से प्रयागराज पहुंचें और वाहन को खड़ा कर खुले में बिछाकर सो गए।

इसके बाद भोर में उठकर स्नान के लिए जा रहें है। स्नान करने के बाद वे वापस हो जाएंगे। बिहार के भभुआ जिले से स्नान के लिए आए प्रभुराम ने बताया कि वह भभुआ से वाराणसी आए और वहां से रेलगाड़ी से प्रयागराज पहुंचें। फिर रेलवे स्टेशन से पैदल कुम्भ क्षेत्र में पहुंचें। सेक्टर चार में वह खुले मैदान में कम्बल बिछाकर और ओढ़कर सो गए। मकर संक्रांति की तिथि लगते ही उन्होंने स्नान किया। मध्य प्रदेश के रीवा जिले से आए सूरजभान सिंह और उनके परिवार के सदस्यों ने बताया कि मकर संक्रांति पर प्रतिवर्ष उनका परिवार संगम नहाने आता है। इस बार कुम्भ लगा है तो वे रेलगाड़ी से एक बजे रात्रि में प्रयागराज के कुम्भ क्षेत्र में पहुंच गए। फिर दो घंटे रुककर स्नान करने के लिए जा रहें है। उन्होंने बताया कि रात्रि पहर ठंडक है। इसके लिए वे अपने साथ कम्बल लेकर चले थे। जिसे ओढ़कर दो घंटे तक इंतजार किया। स्नान करने के बाद वे साधु संतों के दर्शन के बाद वापस हो जाएंगे। प्रयागराज जिले के नैनी के निवासी शिवानन्द मिश्रा ने बताया कि मकर संक्रांति पर उनके परिवार के सदस्य बारी-बारी से संगम स्नान करते हैं। अभी भोर में वह आए हैं। इसके बाद सुबह तक उनके परिवार की महिलाएं और बच्चे आएंगे। उनके परिवार के सदस्य हमेशा से ही संगम में स्नान करते रहें है।

 

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