जिंदगी

अपने बच्चो का नाम रखे, तो इन बातों पर भी जरुर दें ध्यान…

जब रखें शिशु का नाम, तो इन बातों पर भी दें ध्यान

बच्चे का जन्म घर में खुशिया लेकर आता है, सबसे जायदा घर के बड़ो के चेहरे पर खुशिया आती है कहा जाता है कि जीवन में नाम उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना काम महत्वपूर्ण है। अगर व्यक्ति के कर्म अच्छे हैं तो खुद के साथ ही माता-पिता और कुल का नाम भी रोशन हो जाता है।

परंतु यह भी सत्य है कि नाम ही व्यक्ति के कर्मों को उनकी वास्तविक पहचान दिलाता है। विश्व में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जिसका कोई नाम नहीं। हमारे महत्वपूर्ण संस्कारों में से एक है नामकरण संस्कार।

इस दिन शिशु का नामकरण किया जाता है और फिर कुछ अक्षरों का यह समूह जीवनभर के लिए उसकी पहचान बन जाता है। इस आलेख में उन बातों पर प्रकाश डाला गया है जो शिशु के नामकरण के दौरान खासतौर पर ध्यान में रखनी चाहिए।

कभी न रखें ऐसा नाम
आमतौर पर शिशु का नाम ऐसा रखा जाता है जो सुनने में प्रिय और सुंदर हो। नाम बहुत ज्यादा कठिन न हो। साथ ही इस बात का भी विशेष ध्यान रखें कि परिवार के बुजुर्गों व स्वर्गीय परिजनों का नाम भी शिशु का नहीं रखना चाहिए।

इसी प्रकार उन लोगों का नाम रखने से भी बचना चाहिए जो दूर या नजदीकी रिश्तेदार हैं या बुजुर्ग हैं। हमारी संस्कृति में बुजुर्गों का विशेष सम्मान है।

उन्हें कभी भी नाम लेकर नहीं पुकारा जाता। जब उनका नाम लिखा जाता है या विशेष परिस्थिति में बोलना पड़े तो श्री जरूर लगाना चाहिए। श्रीहीन नाम बोलना या लिखना भारत में अच्छा नहीं माना गया है। शिशु का नाम ऐसा हो जो परिवार में किसी और का न हो और न ही बुजुर्ग के नाम से मेल खाता हो।

न पालें ऐसा भ्रम
हर माता-पिता की ख्वाहिश होती है कि उनकी संतान बड़ी होकर जग में नाम कमाए और प्रसिद्ध बने। इसके लिए जरूरी है उन्हें अच्छी शिक्षा और अच्छे संस्कार दें।

कुछ परिजन शिशु का नाम अत्यंत प्रसिद्ध व्यक्तियों के नाम पर रखते हैं। शायद उनके मन में कहीं यह इच्छा होती है कि अपना शिशु भी वैसा ही बने।

नाम रखना व्यक्ति का अपना अधिकार है लेकिन कई बार अत्यंत प्रसिद्ध व्यक्तियों जैसा नाम रखने से शिशु को उस समय बहुत कठिनाई होती है जब वह बड़ा होकर इस दुनिया की कार्यप्रणाली का एक हिस्सा बनता है।

बहुत प्रसिद्ध व्यक्तियों का नाम रखने से बेहतर है शिशु को इस योग्य बनाएं कि वह अपने नाम को सार्थक बनाए। भले ही नाम कोई और हो।

ऐसा नाम बनता है मुसीबत
शिशु का नाम ऐसा हो जो बोलने के साथ ही लिखने में भी आसान हो। अत्यंत कठिन नाम कई बार उस शिशु के लिए ही भविष्य में परेशानी की वजह बन सकता है।

अक्सर कठिन नामों को लिखने के दौरान दस्तावेजों में गलतियां हो जाती हैं जिन्हें दुरुस्त कराने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने होते हैं और काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

इसलिए नाम ऐसा हो जो सुंदर होने के साथ ही बोलने व लिखने में भी आसान हो। इससे आप और शिशु कई परेशानियों से बच जाएंगे।

आपने भी रखा है ऐसा नाम?
अक्सर परिवार में बुजुर्ग बच्चे का नामकरण करते हैं। कई बुजुर्ग देवी-देवताओं के नाम पर भी नाम रखते हैं। उनके पीछे यह धारणा होती है कि जब भी बच्चे को पुकारेंगे तो ईश्वर के नाम का स्मरण होगा।

हालांकि शास्त्रों में देवी-देवताओं के नाम पर बालक का नामकरण करने को वर्जित नहीं माना गया है लेकिन इसमें भी कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।

अगर ऐसे नाम भी रखें, तो वे बोलने-लिखने में आसान हों। जैसे एक नाम है – शिवनंदन यानी भगवान शिव का पुत्र। कई लोग इसकी स्पेलिंग लिखने में गलती कर जाते हैं।

इसी प्रकार भगवान का एक नाम है- सच्चिदानंद। अक्सर यह नाम भी लोगों को बोलने व लिखने में कठिन लगता है। अधिक संभावना इस बात की भी है आगे स्कूल व अन्य दस्तावेजों में किसी त्रुटि की वजह से बच्चे को काफी परेशानी का सामना करना पड़े।

ऐसा नाम न बन जाए मुसीबत
पुराने समय में कई गांवों में एक रिवाज था। जिस महिला के बच्चे ज्यादा नहीं जीते था या जन्म के कुछ समय बाद उनकी मौत हो जाती थी, उसके बच्चों का नाम सुंदर और आकर्षक नहीं रखा जाता था।

ऐसे बच्चों का नाम हास्यास्पद और अलग किस्म का होता था। अब ऐसा प्रचलन कम हो गया और लोग अपने शिशु का नाम सुनने में सुंदर और सार्थक ही रखना पसंद करते हैं। नाम रखते समय इस बात का ध्यान रखें कि वह हास्यास्पद जैसा न हो। नाम सार्थक और सुंदर होना चाहिए।

ऐसा भी न हो नाम
उक्त बातों के साथ यह भी ध्यान रखना चाहिए कि शिशु का नाम ऐसा भी न हो कि वह अत्यंत साधारण हो और जब वहा बड़ा हो तो अपने नाम पर उसे शर्मिंदगी हो।

कहा जाता है कि हर दौर अपने साथ नाम रखने के तरीके भी बदलता है। इसे हम आज से सौ साल पहले के नामों से तुलना कर देख सकते हैं।

वक्त बदलने के साथ ही नाम रखने का प्रचलन भी काफी बदलता रहता है। इसलिए वह नाम ऐसा भी न हो जो जमाने के नजरिए से बहुत पुराना हो।

नाम आधुनिक हो लेकिन अजीब नहीं। नाम रखने के साथ अपनी धार्मिक व सांस्कृतिक मर्यादाओं का पालन करना चाहिए।

पहले बरतें ये सावधानी
नाम रखने में इस बात का भी ध्यान रखा जाए कि वह किसी मशहूर फिल्मी अभिनेता या अभिनेत्री के नाम पर न हो। फिल्मी अभिनेताओं से लगाव किसी व्यक्ति का निजी मामला है लेकिन अपनी पसंद के लिए अगर वह नाम बच्चों पर थोपा जाए तो वह भी उचित नहीं है।

इसके लिए शिशु के भविष्य के बारे में जरूर सोचना चाहिए। जब वह स्कूल जाएगा तो फिल्मी अभिनेता या अभिनेत्री का नाम उसके लिए कई मुश्किलें पैदा कर सकता है। इसलिए जहां तक संभव हो फिल्मी अभिनेताओं से लगाव फिल्मों तक सीमित रखें और शिशु का कोई और नाम रखें।

इसका भी रखें ध्यान
अक्सर कई शिशुओं का मूल नाम बाद में दस्तावेजों और स्कूल तक ही सीमित रह जाता है और परिजन उसके नाम में तब्दीली कर देते हैं।

हालांकि बालक-बालिक से स्नेह जताना हर परिवार का अधिकार है लेकिन बेहतर होगा कि उसके मूल नाम को भी महत्व दिया जाए।

जैसे राजस्थान के गांवों में शिशु का नाम गीगा, बाबू आदि रखने का प्रचलन है। इसमें कोई बुराई नहीं है लेकिन जब शिशु बड़ा हो जाए तो धीरे-धीरे उन नामों को छोड़कर उसके असली नाम से पुकारना चाहिए।

यह रहस्य

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