क्राइम

घर में ही है एनडी तिवारी के बेटे का कातिल, शक के घेरे में पत्नी

पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के बेटे रोहित शेखर तिवारी की हत्या मामले में बार-बार बयान बदलना। महिला रिश्तेदार को लेकर पति पर शक करना। वारदात वाली रात रोहित और महिला रिश्तेदार का बाहर से शराब पीकर घर पहुंचना। फिर फरेंसिक रिपोर्ट में चौंकाने वाली बातों का सामने आना। ये सब कड़ियां रोहित शेखर की पत्नी की ओर इशारा कर रही हैं। बताते चले शक के दायरे में आई उसकी पत्नी अपूर्वा का पुलिस नार्को टेस्ट कराने की तैयारी कर रही है। पुलिस मानकर चल रही है कि वह घटना को लेकर जो कुछ भी बता रही है, वह पूरी तरह सत्य नहीं। उसके विरोधाभासी बयान खुद कई सवाल खड़े करते हैं। ऐसे में नार्को टेस्ट के जरिए पुलिस उससे सच को उगलवाने का प्रयास करेगी।

पेचीदा  हो रहा रोहित की मौत का मामला 

बताते चले इस घटना के मामले में पुलिस अब तक कई किश्तों में घंटों रोहित की पत्नी अपूर्वा, रोहित के भाई सिद्धार्थ और घर के नौकर और ड्राइवर से पूछताछ कर चुकी है। मगर कातिल का नाम उजागर करने से पहले वो कत्ल की सारी कड़ियों को जोड़ लेना चाहती है। उम्मीद की जानी चाहिए कि कातिल का चेहरा जल्दी ही सामने होगा।

बता दे इस घटना पर अपना बार-बार बयान बदलने की वजह से पुलिस का शक की सुई पत्नी अपूर्वा पर टिक गयी है। फरेंसिक रिपोर्ट सोमवार को आ चुकी है, जिसके आधार पर अपूर्वा के इसमें शामिल होने की बात पुख्ता हो गई है। रिपोर्ट में सामने आया है कि रोहित के नाखून और पैरों के तलवे नीले पड़े हुए थे।

जानकारों के मुताबिक

इसकी वजह ऑक्सीजन लेवल का डाउन होना होता है। इसलिए गला दबाने से पहले ‘जहर’ देने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में किसी भी समय अपूर्वा की गिरफ्तारी होने के संकेत मिल रहे हैं। तफ्तीश में पता चला है कि रोहित ने हल्द्वानी से दिल्ली लौटते वक्त महिला रिश्तेदार के साथ गाड़ी में शराब पी थी। अपूर्वा इस महिला को लेकर शक करती थी। दोनों के बीच इसे लेकर अकसर झगड़े होते थे।

सच उगलवाने के लिए किया जाता है टेस्ट
नार्को टेस्ट का इस्तेमाल किसी व्यक्ति से ऐसे जानकारी प्राप्त करने के लिए किया जाता है, जिसे देने में वह सामान्य तौर पर या तो असमर्थ होता है या उसे उपलब्ध कराने को तैयार नहीं होता। यानी उस आदमी के मन से सच उगलवाने के लिए यह टेस्ट किया जाता है। ज्यादातर आपराधिक केस में ही इसका प्रयोग होता है। नार्को विश्लेषण एक फोरेंसिक परीक्षण होता है, जिसे जांच अधिकारी, मनोवैज्ञानिक, चिकित्सक व फोरेंसिक विशेषज्ञ की उपस्थिति में किया जाता है। इस टेस्ट में व्यक्ति को ट्रूथ सीरम इंजेक्शन दिया जाता है जिससे व्यक्ति स्वाभाविक रूप से बोलता है।

कोर्ट के आदेश के बाद होती है टेस्ट की प्रक्रिया
अगर पुलिस को लगता है कि कोई शख्स बात को छिपा रहा है या झूठ बोल रहा है तो उस स्थिति में केस से जुड़ा जांच अधिकारी उसका नार्को टेस्ट कराने के लिए कदम आगे बढ़ाता है। इसके लिए सबसे पहले वह कोर्ट में अर्जी लगाकर नार्को टेस्ट कराने की मांग करता है। इसके बाद कोर्ट उस शख्स को बुलाती है, जिसका टेस्ट की मांग कोर्ट से की गई होती है। जिसका यह टेस्ट होना है, अगर वह इसे कराने से मना कर दे तो फिर कोर्ट इसकी मंजूरी नहीं देती।

 

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