उत्तर प्रदेश

गठबंधन से भर गई माया की खाली जेब, भरपूर क़ीमत चुकाए अखिलेश

Image result for अखिलेश को महंगा पड़ा बुआ का साथ ! कांग्रेस हाफ लेकिन बसपा हुई पास
आजमगढ़ । आजमगढ़ जिले में समाजवादी पार्टी(सपा) के मुखिया अखिलेश यादव 2 लाख,59 हजार,874 मतों से जीत दर्ज कर भी पूरे प्रदेश में बुरी तरह से हार गये। प्रदेश में एक तरफ जहां पार्टी बुरी तरह से हार गयी है, वहीं मोदी की सुनामी में समाजवादी पार्टी के कुनबे को भी करारी शिकस्त मिली। जिससे अखिलेश यादव के समर्थक जीत की खुशी तक नहीं मना सके।
  समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने जहां भाजपा के दिनेश लाल यादव निरहुआ को  2,59,874 मतों से हरा दिया। वहीं लालगंज में गठबंधन की प्रत्याशी संगीता आजाद ने भाजपा की नीलम सोनकर को 1,61,597 मतों से हराया। जिससे समर्थक खुश तो दिखे लेकिन प्रदेश में मिली हार से उन्हे निराशा हाथ लगी।
  गठबंधन में बहुजन समाज पार्टी को जबरदस्त फायदा मिला है। जबकि समाजवादी पार्टी को सबसे बड़ा नुकसान हुआ। पार्टी के परिवार के सदस्य व अखिलेश यादव की पत्नी डिम्पल यादव, अक्षय प्रताप यादव, धर्मेन्द्र यादव जैसे कद्दावर नेताओं को हार का सामना करना पड़ा। जिससे समर्थक काफी मायूस नजर आये। पार्टी के केन्द्रीय चुनाव कार्यालय से लेकर पार्टी के जिला कार्यालय पर नेता और कार्यकर्ता तो मौजूद थे लेकिन प्रदेश में मिली करारी हार से काफी मायूस दिखे। देर रात अंतिम परिणाम आने से पहले ही पार्टी के नेता कार्यालय छोड़कर चले गये थे।
 लोकसभा चुनाव 2019 ने उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए एक बड़ा संदेश देने का काम किया है। मोदी लहर की आशंका के पूर्वा​नुमान से भयभीत उत्तर प्रदेश की ​प्रमुख विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी और उसकी धुर विरोधी पार्टी मानी जाने वाली बसपा ने आपस में समझौता किया था। बसपा सुप्रीमो मायावती ने सारी दुश्मनी भुलाकर अस्तित्व रक्षा के लिए सपा से गठबंधन किया।
  सपा बसपा और रालोद गठबंधन के बाद लोग यह कह रहे थे कि सपा बसपा महागठबंधन के आगे भाजपा नहीं टिकेगी लेकिन हुआ इसके उल्टा। अखिलेश मायावती सत्ता के लिए भले मिल गये लेकिन सपा बसपा कार्यकर्ता का मिलन नहीं हो पाया। कारण कि निचले स्तर पर समन्वय नहीं हो सका। इसका खामियाजा गठबंधन को उठाना पड़ा।
मतदाताओं ने गठबंधन को नकारकर भाजपा के पक्ष में मतदान किया। परिणाम स्वरूप भाजपा को उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से करीब 62 सीटों पर विजय हासिल हुई। वहीं सपा इस लोकसभा चुनाव में साफ हो गयी। वर्ष 2014 में सपा ने पांच सीट जीतने में कामयाब हुई थी। इसके बाद प्रदेश की तीन लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में तीन सीटों पर सपा ने विजय हासिल की थी। इस बार सपा बसपा गठबंधन के बावजूद अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव भी अपनी सीट नहीं बचा सकीं। सपा मात्र पांच सीटों पर सिमट कर रह गयी।
वहीं कांग्रेस पार्टी हाफ हो गयी। वर्ष 2014 में कांग्रेस ने रायबरेली और अमेठी से जीत दर्ज की थी। इस बार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अमेठी में स्मृति ईरानी से चुनाव हार गये। सबसे ज्यादा फायदा इस चुनाव में उत्तर प्रदेश में बसपा को मिला है। वर्ष 2014 में बसपा का खाता भी नहीं खुला था। इस बार बसपा सात सीटों पर जीत रही है।
बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने चुनाव नतीजों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि आम चुनाव का परिणाम जन अपेक्षाओं के ठीक उल्टा आया है। देश की आम जनता को पूंजीवादी समर्थित गुलामी वाली व्यवस्था को बदलने के लिए आगे और भी बड़ी लड़ाई लड़ने को मजबूर करता है।
भारतीय जनता पार्टी प्रदेश अध्यक्ष डा.महेन्द्र नाथ पाण्डेय ने कहा कि यह सुशासन, निस्वार्थ सेवा, विकास और विश्वास की विजय है। उन्होंने कहा भाजपा की विजय जातियता पर सबका साथ-सबका विकास की विजय है।
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