देशराजनीति

आडवाणी को भाजपा ने दिया एक और बड़ा झटका, टिकट काटने के बाद अब ये मौका भी छीना

एक समय था जब भाजपा में लाल कृष्ण अडवाणी, मुरली मनोहर जोशी की तूती बोलती थी. वही पार्टी चलाया करते थे, उनके बारे में कहा जाता है कि कई मौक़ों पर वो अपनी ही समझ पर फ़ैसला ले लेते थे और पार्टी के सभी नेता उस पर सहमति जता देते थे लेकिन अब वक़्त बदल गया है और मामला उल्टा हो गया है. इन दोनों ही बुज़ुर्ग नेताओं को पार्टी में वो सम्मान नहीं मिल पा रहा है जिसकी उम्मीद इनके समर्थकों को थी.

प्रधानमंत्री पद से बस कुछ ही क़दम दूर रह जाने वाले लाल कृष्ण अडवाणी की राजनीति तब सिमटने लगी जब नरेंद्र मोदी का क़द भाजपा में बढ़ने लगा. लम्बे समय से सत्ता से दूर रहने वाली भाजपा जब सत्ता के क़रीब आयी तब उसका कारण अडवाणी नहीं मोदी बने और मोदी को प्रधानमंत्री पद मिला. अडवाणी को ये बात भले अच्छी न लगी हो लेकिन जो है सो है. इसके बाद उन्होंने उम्मीद की कि उन्हें राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया जा सकता है पर ये भी नहीं हुआ.

एक न्यूज़-पोर्टल में छपी ख़बर के मुताबिक़ अडवाणी इसको लेकर नाराज़ भी हुए लेकिन कोई बात बन नहीं सकी. इसके बाद उप-राष्ट्रपति पद भी उन्हें नहीं मिल सका. आख़िर उनका राजनीतिक करीयर अब सिर्फ़ एक सांसद का ही रह गया. लोकसभा के चुनाव की जब गहमा-गहमी तेज़ हुई तो ख़बरें आने लगीं कि इस बार गांधीनगर से उन्हें प्रत्याशी नहीं बनाया जाएगा. इस बात पर मुहर तब लग गई जब भाजपा ने गांधीनगर से अपना प्रत्याशी अमित शाह को बनाया.

अडवाणी ने इस बात को लेकर भी अपनी नाराज़गी अपने क़रीबी भाजपा नेताओं को जताई लेकिन मामला फिर वहीँ रह गया. अडवाणी का न तो कोई बयान आजकल मीडिया में आता है और न ही पार्टी में कोई उनका हालचाल लेने जाता है. अडवाणी के समर्थकों को लगा था कि पार्टी को जितना झटका देना था दे चुकी है लेकिन इस बीच एक और झटका अडवाणी को लगा है.

लाल कृष्ण अडवाणी और मुरली मनोहर जोशी दोनों के लिए ही ये बात है. भाजपा ने उत्तर प्रदेश में लोकसभा सीटों के प्रचार के लिए अपने स्टार-कैम्पेनर की लिस्ट जारी की है. इस लिस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, अरुण जेटली, सुषमा स्वराज और उमा भारती के नाम हैं लेकिन अडवाणी और जोशी का नाम नहीं है. इस लिस्ट में कुल 40 नेताओं के नाम हैं लेकिन अडवाणी और जोशी का नाम इसमें नहीं हैं.

जानकार मानते हैं कि इसी के साथ अडवाणी की राजनीति पूरी तरह से ख़त्म हो गई है. अडवाणी और जोशी का करीयर लगभग सिमट चुका है. एक समय पार्टी पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपयी से भी ज़्यादा पकड़ रखने वाले अडवाणी और जोशी अब पार्टी में अपनी स्थिति तलाश रहे हैं. लोकसभा चुनाव में हालाँकि अभी भी कुछ समय है ऐसे में क्या इन नेताओं को कोई ज़िम्मेदारी दी जाएगी. ये देखने की ही बात होगी.

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