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90% हिंदू आबादी वाले क्षेत्रों में भी हारी BJP, फिर भी बोलेगा मीडिया- सिर्फ मुस्लिम वोटों से जीती हैं ममता

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की जीत के लिए न सिर्फ भाजपा कार्यकर्ता और नेता परेशान थे बल्कि इस देश के मीडिया ने वर्षों से तैयारी कर रखी थी। पिछले कुछ महीने से तो हर रोज दुष्प्रचार का हिस्सा बनता था।

भाजपा, RSS और मीडिया की तमाम कोशिशों के बावजूद जब पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की हार नहीं हुई तब मीडिया नया राग अलापने लगा कि मुस्लिमों के एकतरफा वोट ने ममता बनर्जी को जितवा दिया ।

इसमें कोई दो राय नहीं है कि मुसलमानों ने ममता बनर्जी पर भरोसा जताया और उन्हें वोट किया मगर यह बिल्कुल झूठ है कि तृणमूल कांग्रेस को इतनी बड़ी बढ़त किसी समुदाय विशेष के वोट से मिली है।

यह बात तृणमूल कांग्रेस के वोट प्रतिशत से भी जाना जा सकता है और अलग-अलग क्षेत्रों में जीती गई सीटों से भी ।

इसी मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए राजनीतिक रणनीतिकार संजय यादव लिखते हैं-

चूँकि तमाम छल-फ़रेब दाँव प्रपंच, साम-दाम दंड भेद के बावजूद बीजेपी बंगाल हार चुकी है। इसलिए अब गोदी मीडिया के ज़रिए यह प्रचारित करवायेगी कि मुस्लिम मतों की एकजुटता की वजह से वह हारी है ताकि इनकी हिंदुत्व की राजनीति ज़िंदा रहे।

वैसे भी हर चुनाव में मुस्लिम तुष्टिकरण की बात कर वह बहुसंख्यक हिंदुओं को अपने पक्ष में करने का असफल प्रयास करती रहती है लेकिन न्यायप्रिय संविधान प्रेमी जनता के साथ मिलकर बहुसंख्यक हिंदू बीजेपी को हराते आए है।

बंगाल में बीजेपी 90 फ़ीसदी हिंदू बहुल क्षेत्रों में भी बुरी तरह हारी है। सबसे घनी हिंदू आबादी वाले 5 ज़िलों – पुरुलिया, झाड़ग्राम, बाँकुरा, पूर्वी मिदिनापुर और पश्चिम मिदिनापुर में बीजेपी का सूपड़ा साफ़ हुआ है।

किसान, मज़दूर, युवा, दलित, अगड़े-पिछड़े, बेरोज़गार, कर्मचारी, हिंदू, मुसलमान, सिख़ सब इनकी सच्चाई जान रहे है और जान गए है।

अगर कोई आपसे कहे कि बीजेपी मुस्लिम बहुल इलाकों में हार गई। उन्हें यह नक्शा अच्छे से दिखा देना।

राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, झारखंड और कर्नाटक में बीजेपी हारी। हरियाणा और गुजरात में कैसे सत्ता में आए सब जानते है।

बिहार का तो दुनिया जानती है कैसे एक 31 वर्षीय नौजवान ने तमाम धुरंधरों के एकतरफ़ होने के बावजूद इनकी घिग्घी बांधी थी और चुनाव आयोग के नतीजों ने इन्हें जिताया था।

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