ख़बरदेश

7000 बिटकॉइन खरीदकर भूल गए पासवर्ड, याद नहीं आया तो लगेगी 1700 करोड़ रुपयों की चपत

सैनफ्रांसिस्को के प्रोग्रामर स्टीफन थॉमस का दिन का चैन गुम है। रातों की नींद उड़ी हुई है। वजह वह पासवर्ड है, जो वे भूल गए हैं। पासवर्ड याद आए तो अरबपति बन जाएंगे, क्योंकि इससे वे अपने उस डिजिटल वॉलेट को खोल सकेंगे, जिसमें उनके 1700 करोड़ रुपए पड़े हैं। दरअसल, स्टीफन ने सालों पहले 7,002 आभासी मुद्रा बिटकॉइन खरीदी थी। ये उनके डिजिटल वॉलेट में पड़ी है।

अब कीमत बढ़ी तो इनका मूल्य 1700 करोड़ रुपए हो गया। लेकिन स्टीफन के लिए ये अरबों रुपए आंकड़ा बनकर रह गए हैं। इस पासवर्ड से ही वे एक छोटी हार्डड्राइव खोल पाएंगे, जिसे आयरन की कहते हैं। इसमें उस वॉलेट की प्राइवेट की (निजी कुंजी) हैं, जिसमें बिटकॉइन रखे हैं। स्टीफन ने बिटकॉइन खरीदकर आयरन की का पासवर्ड कागज पर लिखा था। कीमतें धराशायी हुईं और स्टीफन की दिलचस्पी नहीं रह गई। कागज भी गुम हो गया।

अब कीमतें चढ़ते ही उन्हें डिजिटल दौलत याद आई, लेकिन उसे हासिल नहीं कर पा रहे हैं। वे पासवर्ड याद करने की हर कोशिश कर चुके हैं। बंदिश यह भी है कि वे 10 कोशिश ही कर सकते हैं। इसके बाद वॉलेट हमेशा के लिए सीज और एनक्रिप्ट हो जाएगा। वे अक्सर जो पासवर्ड फॉर्मूलेशन बनाते हैं, उनसे आठ बार विफल कोशिश कर चुके हैं। अब 2 मौके बचे हैं। यानी 2 गलतियां और 1700 करोड़ रुपए फुर्र…। आमतौर पर खाते की सुविधा देने वाला बैंक अकाउंट अनलॉक करता है।

बिटकॉइन की कोई रेग्युलेटरी संस्था नहीं है, न कंपनी का नियंत्रण है। इसलिए पासवर्ड बनाने जैसी सुविधा नहीं है। इस मुद्रा का निर्माता भी छद्म व्यक्ति सातोषी नाकामोटो है। बिटकॉइन के पीछे उसका आइडिया था कि कोई भी कहीं से भी डिजिटल अकाउंट खोलकर बिटकॉइन रख सके, जिस पर किसी सरकार या नियामक का नियंत्रण न हो। यह अनूठी सुरक्षा व्यवस्था ही लोगों के लिए मुसीबत का सबब भी बन रही है।

10 लाख करोड़ रुपए कीमत के बिटकॉइन इसी तरह खो चुके कई लोग
वॉलेट रिकवरी सर्विस चेनालिसिस बताती है कि दुनिया में 1.85 करोड़ बिटकॉइन हैं। इनमें 20% (10 लाख करोड़ रु.) को उनके मालिक खो चुके हैं। यह फर्म गुम ‘डिजिटल की’ पाने में मदद करती है। उसके पास पासवर्ड रिकवरी के लिए रोज 70 फोन आने लगे हैं। यह पिछले माह से तीन गुना है।

Back to top button