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मिशन 2019 : BJP ने बनाया प्लान-B, अब होगी पूरे दक्षिण-पूर्वी भारत पर नजर

नरेंद्र मोदी और अमित शाह (फोटो-PTI)

इस वर्ष हुए चुनावों पर नजर डाले तो पूर्वार्ध में पूर्वोत्तर राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपनी पिछले साढ़े चार साल से जीत का सिलसिला बरकरार रखा लेकिन उसके बाद हुए लोकसभा और विधानसभा उपचुनावों में भाजपा हार की ढलान पर फिसलनी शुरू हुई और वर्षांत में पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में उससे करारा झटका लगा और तीन प्रमुख राज्य उसके हाथ से निकल गये। पिछले साढ़े चार वर्ष में उसे पहली बार कांग्रेस के साथ सीधी लड़ाई में हार का सामना करना पड़ा। इन राज्यों में कांग्रेस काे जीत की संजीवनी मिली। मगर अब भाजपा कोई भी बड़ी गलती नहीं कर सकती इसके लिए तैयार हुआ प्लान-B . बता दे

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगी दल एक के बाद एक बगावती तेवर अख्तियार करते जा रहे हैं. बिहार में बीजेपी के साथी रामविलास पासवान अभी माने ही थे कि यूपी में अपना दल ने आंखें तरेरनी शुरू कर दी हैं. एनडीए के सहयोगी दलों की धमकियों को देखते हुए बीजेपी ने फ्लान-B पर काम करना शुरू कर दिया है. ऐसे में पार्टी की नजर दक्षिण भारत और पूर्वी राज्यों में दलों पर है.  2019 के लोकसभा चुनाव में इन्हीं राज्यों के कुछ दलों को बीजेपी अपना सहयोगी बनाने की रणनीति पर काम कर रही है.

नए साथियों के लिए तैयार

एनडीए से सहयोगी दलों के छिटकने और नाराजगी के मुद्दे पर बीजेपी के महासचिव राम माधव ने कहा कि गठबंधन की राजनीति सामंजस्य (एकोमोडेशन) और समायोजन से चलती है, बीजेपी इसके लिए तैयार है. चुनावों से पहले कुछ सहयोगी साथ छोड़ते हैं तो कुछ नए साथी मिलते भी हैं. उन्होंने कहा, ‘हमने पिछले हफ्ते बिहार में अपने गठबंधन के साथी के साथ सीट बंटवारे को बेहतर और सभी दलों के सहमति के अमलीजामा पहनाया है. यह सच है कि छोटी पार्टियों जैसे बिहार में आरएलएसपी ने हमारा साथ छोड़ दिया है, लेकिन दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में हमें नए साथी भी मिल रहे हैं.’

कौन सी पार्टियां हैं नाराज

दिलचस्प बात यह है कि 2014  के लोकसभा चुनाव में बीजेपी जिन दलों के साथ मिलकर सत्ता पर काबिज हुई थी, इसी साल उनमें से तीन सहयोगी दल साथ छोड़कर अलग हो गए हैं. मार्च में आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू की तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) एनडीए से बाहर हुई. अगस्त में जम्मू-कश्मीर में बीजेपी ने महबूबा मुफ्ती से साथ गठबंधन तोड़ा और हाल ही में बिहार में बीजेपी के सहयोगी दल आरएलएसपी के चीफ उपेंद्र कुशवाहा ने नाता तोड़कर महागठबंधन का हिस्सा बन गए हैं.

हाल ही में बीजेपी ने बिहार में रामविलास पासवान के साथ सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय ही किया था कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सहयोगी पार्टी अपना दल (एस) ने आंखें दिखानी शुरू कर दीं. पार्टी के दो सांसद हैं, इनमें से एक अनुप्रिया पटेल केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री हैं. वहीं, बीजेपी के एक सहयोगी और योगी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर भी काफी समय से नाराज चल रहे हैं.

दूसरी ओर, महाराष्ट्र में शिवसेना तो बीजेपी से पहले से ही नाराज है. शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे पहले ही कह चुके हैं कि 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के साथ गठबंधन कर चुनाव नहीं लड़ेगी. हाल ही में उद्धव ठाकरे ने नरेंद्र मोदी पर करारा हमला किया है.

एआईएडीएमके से हो सकता है गठबंधन

एनडीए के सहयोगी दलों की धमकियों और अलग होने के बीच राम माधव ने जिस तरह से दक्षिण और पूर्वोत्तर में नए दलों को सहयोगी बनाने की बात कही है. इससे 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन के रोडमैप को समझा जा सकता है. हालांकि, राम माधव ने किसी नए साथी का नाम नहीं लिया.

दरअसल, माना जा रहा है कि तमिलनाडु में डीएमके पहले ही कांग्रेस के साथ है. ऐसे में अटकलें लगाई जा रही हैं कि बीजेपी AIADMK के साथ गठबंधन कर सकती हैं. इसके अलावा रजनीकांत के बारे में कयास लगाया जा रहा है कि नरेंद्र मोदी से नजदीकियों के चलते वो बीजेपी के साथ आ सकते हैं.

वहीं, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव इन दिनों गैर- कांग्रेस, गैर- बीजेपी दलों के साथ फेडरल बनाने में जुटे हैं. कांग्रेस केसीआर को बीजेपी की बी टीम होने का आरोप लगा चुकी हैं. वहीं, आंध्र प्रदेश में टीडीपी के कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने के बाद माना जा रहा है कि जगन मोहन रेड्डी से बीजेपी गठबंधन कर सकती है.

पूर्वी भारत में ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक इन दिनों कांग्रेस और बीजेपी दोनों से समान दूरी बनाए हुए हैं, लेकिन पहले एनडीए में रह चुके हैं. इसके अलावा मोदी सरकार के कई अहम मौके पर समर्थन भी दिया है. बीजेपी ने पूर्वोत्तर के राज्यों में कई क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर गठबंधन कर कई राज्यों में सरकार चला रही है.

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