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18 दिन में कोरोना से 3 बेटे मरे, बुजुर्ग ने भी तोड़ा दम, जेल में दोनों पोते, बूढ़ी पत्नी ने किया अंतिम संस्कार

पटना. कोरोनाकाल में श्मशान घाट पर आम आदमी की लाचारी और सिस्टम की क्रूर तस्वीर देखिए। बिहार में बांका जिले के अमरपुर प्रखंड के बल्लीकित्ता गांव के 72 वर्षीय शशिधर कापड़ी की कोरोना से मौत हो गयी। उनके तीन बेटे पहले ही कोरोना के शिकार हो चुके थे। घर में पुरुष के नाम पर सिर्फ दो पोते बच गए थे। लेकिन ये दोनों भी अस्पताल में बेहतर इलाज न होने के विरोध में हंगामा करने के जुर्म में अस्पताल प्रशासन की ओर से जेल भिजवा दिए थे। अब घर में बची बूढ़ी निर्मला देवी (68) और उसकी पतोहू किरण देवी ने आखिरकार खुद बुजुर्ग का अंतिम सस्कार किया।

प्रशासन ने नहीं सुनी पोतों की रिहाई की गुहार

लाचार वृद्धा ने पोतों की रिहाई के लिए काफी जद्दोजहद की। CGM से लेकर बांका DM तक अपनी फरियाद पहुंचाने के बाद भी कोई फायदा नहीं हुआ। अंत में मृतक की पत्नी निर्मला देवी को अंतिम संस्कार करना पड़ा। दरअसल कोरोना ने शशिधर कापड़ी सहित उनके तीन पुत्रों प्रवेश कापड़ी, निकुंज कापड़ी और प्रमोद कापड़ी को 18 दिन के अंदर लील लिया। शशिधर कापड़ी की मौत सोमवार की शाम 5:05 बजे हो गई थी। तब से मंगलवार की शाम तक पोतों का इंतजार होता रहा, लेकिन शशिधर कापड़ी के अंतिम संस्कार के लिए पोता अक्षय और छोटू को पेरोल पर नहीं छुड़ाया जा सका।

अस्पताल में हंगामे के कारण दो पोते हैं जेल में

शशिधर कापड़ी के इलाज के दौरान लापरवाही को लेकर उनके दो पोतों अक्षय और छोटू ने आक्रोशित होकर हंगामा करना शुरू कर दिया था। मायागंज अस्पताल में लगातार हो रही अव्यवस्था की खिलाफत करने के आरोप में अस्पताल प्रबंधन ने FIR दर्ज कर दोनों को जेल भेज दिया था। अक्षय और छोटू की मां ने बताया कि सोमवार को वह अपने बेटे से मिलने मुंगेर गई थी, लेकिन उन्हें अपने बेटे से मिलने की इजाजत नहीं मिली।

किरण देवी ने बताया कि वह भागलपुर के DM सुव्रत सेन के आवास पर भी उनसे मिलने गई थी, लेकिन गार्डों ने उन्हें वहां से भगा दिया और जिलापदाधिकारी से मिलने नहीं दिया। अब सवाल यह खड़ा होता है कि इस तस्वीर का जिम्मेदार कौन है।

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