उत्तर प्रदेश

11 घंटे देर से वाराणसी पहुंची रामायण एक्सप्रेस, श्रद्धालुओं ने जताई नाराजगी

प्रभु राम से संबंधित स्थानों के दर्शन कराने के लिए निकली रामायण एक्सप्रेस निर्धारित समय से 11 घंटे देरी से रविवार को काशी पहुंची। इससे श्रद्धालु गंगा आरती नहीं देख सके। इसको लेकर श्रद्धालुओं में नाराजगी दिखी। गोरखपुर में यात्रियों के हंगामे के बाद वाराणसी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। 

रामायण एक्सप्रेस को सुबह रविवार 6:30 बजे वाराणसी आना था। ट्रेन शाम 5:30 बजे कैंट रेलवे स्टेशन पर पहुंची। अव्यवस्था को लेकर श्रद्धालुओं ने रेलवे प्रशासन से नाराजगी जताई। श्रद्धालुओं ने बताया कि ट्रेन दर्शनीय स्थलों पर कम रोकी जा रही है और अन्य स्टेशनों पर बेवजह रोक दिया जा रहा है। साफ-सफाई और भोजन-पानी की व्यवस्था भी ठीक नहीं है।

श्रद्धालुओं को काशी विश्वनाथ मंदिर, संकट मोचन मंदिर और मानस मंदिर में दर्शन पूजन के साथ गंगा आरती देखना था। देरी के चलते शेड्यूल बदल दिया गया। श्रद्धालु कहीं भी दर्शन-पूजन नहीं कर सके। रामायण एक्सप्रेस से करीब 800 श्रद्धालु वाराणसी पहुंचे हैं। ये 19 नवंबर, दिन सोमवार को काशी विश्वनाथ मंदिर, गंगा आरती सहित अन्य स्थानों पर दर्शन पूजन करेंगे। इसके बाद शाम को भदोही स्थित सीता समाहित स्थल सड़क मार्ग से जाएंगे।

इलाहाबाद में रात गुजारने के बाद 20 को चित्रकूट के लिए निकल जाएंगे। वहीं रामायण एक्सप्रेस 20 को मानिकपुर स्टेशन के लिए रवाना होगी। आईआरसीटीसी में सुबोध श्रीवास्तव, विनोद सिंह, आरपीएफ के  कंपनी कमांडर अनूप सिन्हा स्वागत के दौरान मौजूद रहे। वहीं रेलवे के प्रशासनिक अधिकारी स्वागत के लिए नहीं पहुंचे। वाराणसी आने से पहले यात्रियों ने गोरखपुर स्टेशन पर जमकर हंगामा किया था। ट्रेन से उतरने वाले भी विविध रंग लिए रामधुन में मगन दिखे। किसी के हाथ धनुष बाण तो किसी के कंधे पर गदा के साथ श्रीराम का जयघोष कर रहे थे।

एक उद्घोष ‘रामलला हम आए हैं…।’ सर्वव्यापी नजर आया।सीतामढ़ी से गोरखपुर के रास्ते बनारस आने वाली विशेष ट्रेन के यात्रियों ने  गोरखपुर पहुंचने पर हंगामा करते हुए विरोध दर्ज कराया था। आइआरसीटीसी की व्यवस्था पर भी यात्रियों में आक्रोश देखते को मिला। एक बुजुर्ग ने बताया कि बिहार के सीतामढ़ी में उन्हें ठहराने के स्थान पर स्नान करने के लिए शौचालय की बजाए एक खुले स्थान पर निवृत होना पड़ा।

 

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