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कौन थे कैमरे में कैद ये 10 रहस्यमयी लोग, आज तक इनको कोई नहीं सका खोज

इतिहास में कई ऐसी घटनाएं घटी हैं जिन्‍होंने दुनिया की तस्‍वीर ही बदलकर रख दी. इन्‍हीं घटनाओं में कुछ ऐसे शख्‍स सामने अाए जिनकी पहचान एक रहस्‍य ही बनकर रह गई. आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ लोगों को जिनकी पहचान आज भी एक रहस्‍य बनी हुई है.

 

द फालिंग मैन: जब 9/11 में अमेरिका के ट्विन टॉवर पर आतंकी हमला हुआ, उसी समय एक व्यक्ति के सर के बल नीचे गिरती तस्वीर कैमरों में कैद हुई. इस व्यक्ति की तस्वीर पूरी दुनिया में छा गई, पर गिरने वाले की अबतक पहचान नहीं हो पाई. कुछ लोगों के अंदाजे के मुताबिक सर के बल नीचे गिर रहे व्यक्ति का नाम जोनाथन ब्राइले था, जो रेस्टोरेंट में काम करता था, पर आधिकारिक रूप से इसकी कभी पुष्टि नहीं हो पाई.

द हिरोशिमा स्टेप्स शैडो: द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जब हिरोशिमा पर परमाणु हमला हुआ, तो 3 लाख लोग एक झटके में मौत के मुंह में समा गए. ये तस्वीर धमाके वाली जगह से 850 फिट की दूरी पर खींची गई, जहां कोई व्यक्ति बैठा हुआ था, पर परमाणु बम की ताकत ने उसे पूरी तरह से मिटा दिया. सिवाय उसकी परछाई के. इस छाया की वास्तविकता की कभी पहचान नहीं हो पाई कि वो कौन था.

मुस्कान के साथ सीन नदी में मृत मिली अनजान लड़की: इस लड़की की पहचान कभी नहीं हो पाई. ये कौन थी, जिसके चेहरे पर मौत का कोई भय था और ना ही कोई, बल्‍कि चेहरे पर संतोष से भरी मुस्कान थी. इस लड़की की तस्वीरों को लोगों ने खरीदा, और ये तस्वीरें सबसे ज्यादा ‘किस’ की गई तस्वीरों में से एक है. इस लड़की के चेहरे की तस्वीर से एक मूर्ति बनाई गई, जो उसी की तरह रहस्यमयी मुस्कान के साथ दिखती रही.

केविन कार्टर की तस्वीर में दिखा सूडानी बच्चा: सूडान की यात्रा पर निकले फोटोजर्नलिस्ट केविन कार्टर की इस तस्वीर ने दुनिया में तहलका मचा दिया, जिसमें मौत के द्वार पर झुके बच्चे की तस्वीर थी. इस तस्वीर के पीछे गिद्ध उसकी मौत का इंतजार करता दिखा. ये बच्चा कौन था, इसकी कभी पहचान नहीं हो पाई. इस तस्वीर ने तत्कालीन सूडान की बेबसी को दुनिया के सामने लाकर दुनिया को हतप्रभ कर दिया.

माउंट एवरेस्ट पर मिले अनजान लोगों के शव: ‘ग्रीन बूटों’ वाले इस शव की कभी पहचान नहीं हो पाई, जो माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई पर निकले व्यक्ति की थी. एवरेस्ट पर चढ़ने की शुरुआत सन 1922 से हुई, पर इस पर पहली बार 29 मई 1953 में एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नॉर्वे पहुंचे, लेकिन इससे पहले कोशिश कर चुके 200 लोगों की मौत हो चुकी थी. इनमें से कईयों की पहचान अबतक नहीं हो सकी है.

यूक्रेन के विनित्सा में मारे गए आखिरी यहूदी की पहचान अबतक अज्ञात: द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान नाजियों की मौत की मशीनों ने लाखों लोगों को काल का ग्रास बनाया. उसी दौरान ये फोटो खींची गई थी, जो विनित्सा का आखिरी जीवित यहूदी था और मरने वाला था. इस यहूदी की कभी पहचान नहीं हो पाई.

डी. बी. कूपर: ये व्यक्ति अमेरिकी वायुयान सेवा के इतिहास का पहला और आखिरी व्यक्ति है, जिसकी पहचान कभी नहीं हो पाई. इसने अमेरिकी जहाज को हवा में ही हाइजैक कर लिया और 2 लाख अमेरिकी डॉलर के साथ जहाज के कहीं उतरने से पहले ही पैराशूट के साथ जहाज से कूद गया. लाख कोशिशों को बावजूद अमेरिकी एजेंसियां उसे पकड़ नहीं पाई. काफी खोजबीन के बाद 4 सालों पर कुछ कैश कोलंबिया नदीं में मिला, पर बाकी का कैश और पैरासूट समेत कभी कूपर को पुलिस खोज ही नहीं पाई.

विक्ट्री डे पर ‘किस’ करता अनजान कपल: जब न्यूयॉर्क द्वितीय विश्वयुद्ध के खात्मे का जश्म मना रहा था, तब ये तस्वीर अल्फेड एसेंस्टेड द्वारा खींची गई थी. इस तस्वीर को खुशियों का ‘आईकॉन’ माना गया और इस कपल की तलाश की गई, पर कभी ये कपल सामने आया ही नहीं, जिन लोगों ने दावे किए, वो गलत पाए गए. सही ‘आईकॉन’ की तलाश कभी पूरी नहीं हो पाई.

द बबुश्का लेडी: अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी की हत्या के समय एक महिला वहां दिखी थी, जो कई लोगों के कैमरों में कैद हुई. माना जाता रहा कि कैनेडी की हत्या उसके हाथों में पकड़े गए कैमरे रूपी पिस्तौल से हुई, पर उस महिला की कभी पहचान नहीं हो पाई और न ही उस कैमरे या पिस्तौल का कुछ पता चला, बाद में एक महिला ने दावा किया कि वही उस समय वहां थी, पर वो साबित नहीं कर पाई, इसलिए आजतक ये गुत्थी उलझी हुई है कि कैनेडी की हत्या किसी एक ही व्यक्ति ने की थी, या उसके साथ कोई और था. कोई और था, तो ये महिला वहां तक कैसे पहुंची और इसकी पहचान अबतक क्यों नहीं हो पाई.

त्यानआनमेन चौक पर टैंक के सामने खडा व्यक्ति: चीन में 3-4 जून 1989 को त्यानआनमेन चौक पर चीनी सेना द्वारा छात्रों के दमन के समय की इस तस्वीर में टैंक के सामने आने वाले व्यक्ति की अबतक पहचान नहीं हो पाई. ये व्यक्ति कम से कम 2 बार सेना के टैंक के आगे आया, और बार में भीड़ द्वारा अपनी ओर खींच लिया गया. इसने बीच में टैंक चला रहे सैनिक से बात भी की पर इसका चेहरा कोई नहीं देख पाया. ये तस्वीर चीनी विरोध का प्रतीक बन गई पर इस रहस्यमयी व्यक्ति की कभी पहचान ही नहीं हो पाई.

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