क्राइम

होश उड़ाने वाला खुलासा : नेपाल से ₹90 में बनकर आ रहा नकली ‘रेमडेसिविर’

कोरोना काल में अर्थियां सिर्फ इंसानों की नहीं, इंसानियत की भी उठ रही हैं। धंधे को सबसे बड़ा ईमान बना लेने वाले इस महामारी में माल मारने के चक्कर में बेदम हो रहे हैं। दिल्ली से लेकर नेपाल बॉर्डर तक, ऐसी ऐसे सरगना सक्रिय हैं जिन्हें शैतानों का सरदार कहा जाना ज्यादा उपयुक्त होगा। कोरोना काल (Coronavirus Crisis Bihar) में एक तरफ जीवन को बचाने की जद्दोजहद हो रही है तो दूसरी तरफ आपदा को अवसर बनाने में लगे गिरोह का काला कारोबार भी जारी है।

कोरोना से संक्रमित मरीजों (Coronavirus Cases in India) के इलाज में कारगर इंजेक्शन ‘रेमडेसिविर’ की बढ़ती मांग को देखते हुए सीमावर्ती इलाके में नकली ‘रेमडेसिविर’ बनाकर बिक्री करने वाले गिरोह सक्रिय हो गए हैं। नेपाल की मौरंग जिला पुलिस ने 90 रुपये कीमत वाले एंटिबायोटिक इंजेक्शन ‘स्टासेफ’ में नया लेबल लगाकर 7 से 25 हजार रुपये में नकली ‘रेमडेसिविर’ बनाकर बेचने के धंधे का खुलासा किया है जिससे स्वास्थ्यकर्मी समेत आमलोगों के होश उड़ गए हैं।

ऐसे हुआ नकली रेमडेसिविर बनाने वालों का खुलासा
नेपाल में मौरंग जिला पुलिस कार्यालय विराटनगर की विशेष शाखा को सूचना मिली कि एक दवा दुकानदार नकली रेमडेसिविर दवा का कारोबार कर रहा है। सूचना के आधार पर नोबेल टीचिंग हॉस्पिटल के बाहर दवा दुकान के संचालक सोनू आलम और उनके सहयोगी श्रवण यादव की गिरफ्तारी की गई। इन लोगों के पास से स्टॉक में रखे गए नकली ‘रेमडेसिविर’ इंजेक्शन भी बरामद किए गए। मोरंग जिले के एसपी संतोष खड़का ने बताया कि विराटनगर में नकली रेमडेसिविर बिक्री की सूचना मिलने पर कुछ दवा दुकानों में छापेमारी की गई। इस दौरान कई लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।
‘स्टासेफ’ और ‘रेमडिसिविर’ के वायल का एक ही साइज
एंटीबायोटिक दवा स्टासेफ और कोरोना के इलाज में कारगर रेमडेसिविर इंजेक्शन के डिब्बे का एक ही साइज होने का फायदा नकली दवा के कारोबारी उठा रहे थे। इन लोगों के सम्पर्क में आने वाले मरीजों को सात से 35 हजार रुपये लेकर रेमडेसिविर के लेबल लगा स्टासेफ इंजेक्शन थमा दिया जाता था। एसपी खड़का ने बताया कि गिरफ्तार फार्मेसी संचालक सोनू आलम यह नकली रेमडेसिविर कहां से लाता था, इसकी जानकारी पुलिस जांच के बाद ही मिल पाएगी। वहीं पुलिस सूत्रों की मानें तो भारी मात्रा में स्टासेफ इंजेक्शन विराटनगर की होलसेल दवा दुकान गणेश ड्रग्स हाउस से खरीदा गया था।

पहले रेमडेसिविर की तस्करी में धराया, जमानत मिली तो बनाने लगा नकली
पकड़े गए नकली दवा कारोबारियों का नाम पहले भी दवा तस्करी में आया था। इससे पहले टिकुलिया से सटे नेपाल के दरहिया से श्रवण यादव को भारत से रेमडेसिविर इंजेक्शन की तस्करी में दवा के साथ पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उस समय राजनीतिक दबाव के बाद जमानत पर रिहा हुआ था।
जोगबनी के रास्ते पूर्णिया तक फैला है जालसूत्रों की मानें तो इन नकली दवा तस्कर के कुछ आरोपी अररिया जिले के बथनाहा में भी बैठे हैं। जिसके माध्यम से सम्पर्क स्थापित कर नकली रेमडेसिविर को अस्पताल में भर्ती मरीजों तक सप्लाई किया जाता है। इसके लिए जोगबनी के बथनाहा में झोला छाप डॉक्टर के साथ ही सीमांचल में दर्जनों नकली दवा के सौदागर सक्रिय हैं। सूत्रों पर यकीन करें तो इनके जरिए इस्लामपुर में बनाए गए अवैध रास्ते और टिकुलिया के रास्ते दवा की तस्करी पुलिस को चकमा देकर की जाती है।

नशे के कारोबार में भी सक्रिय रहा है आरोपी  
नेपाल पुलिस सूत्रों की मानें तो दरहिया निवासी श्रवण यादव की संलिप्तता ब्राउन शुगर के कारोबार में भी रही है। वहीं पहले तस्करी के हाई प्रोफाइल मामले में चर्चित रहे दरहिया से जोगबनी के एक सफेदपोश का नाम आने पर काफी ड्रामा मचा था। अब उसी आरोपी के संरक्षण में ड्रग्स के भी तार जुड़ रहे हैं। नेपाल पुलिस के सूत्रों की मानें तो इसके लिए पुलिस प्रधान कार्यालय काठमांडू को भारत के उच्च स्तरीय जांच एजेंसी को इस मामले को संयुक्त जांच के लिए अनुरोध करने के लिए लिखा जा रहा है। 
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