क्राइमदेश

हनी ट्रैप : आखिर क्यों इस मकड़जाल में फंस जाते हैं सेना से जुड़े लोग, पढ़े पूरी खबर

देश में हनी ट्रैप का एक और मामला सामने आया है। भारतीय सेना से जुड़ी खुफिया जानकारी लीक कर पाकिस्तानी महिला जासूस को भेजने के मामले में माउंट आबू के दिलवाड़ा के सैन्यकर्मी रामसिंह को गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ में यह खुलासा हुआ है कि दो बच्चों का पिता आरोपी रामसिंह खुद को अविवाहित बताकर पाकिस्तानी महिला एजेंट से वॉट्सऐप पर चैटिंग करता था। आज हम आपको बता रहे हैं कि हनी ट्रैप क्या होता है और कैसे यह चलन में आया। कैसे लोग इसके शिकार बन जाते हैं। साथ ही यह भी कि इससे बचने के क्या तरीके हैं-

क्या है हनी ट्रैप, जिसके जाल में फंसते हैं सेना के अफसर या जवान
हनी ट्रैप का मतलब यह है एक ऐसा मायाजाल जिसमें फंसने वाले को अंदाजा भी नहीं होता कि वह कहां फंस गया है और किसका शिकार बन चुका है। खूबसूरत महिला एजेंट्स सेना के अधिकारियों और जवानों को अपनी खूबसूरती के जाल में फंसाती हैं और उनसे देश की सुरक्षा से संबंधित जानकारियां हासिल कर लेती हैं। हनी ट्रैप से जुड़ी महिला जासूस पहले उस शख्स से फेसबुक, वॉट्सऐप जैसे सोशल मीडिया पर दोस्ती करती है फिर उसकी आड़ में उस सैन्य अफसर या जवान के साथ चैट करके संबंध बनाती है। प्यार के जाल में फंसाने और संबंध बनाने के बाद वह महिला एजेंट ऐसे लोगों को ब्लैकमेल तक करती हैं। इसके बदले में उन्हें माेटी रकम दी जाती है। इन्हें साइबर एजेंट भी कहा जाता है।

ब्रिटिश खुफिया एजेंसी ने चीन के जासूसों की खोली थी पोल, तब आया हनी ट्रैप नाम
2009 की बात है, जब एक दिन ब्रिटेन के बैंकों, कारोबारियों और वित्तीय संस्थानों को 14 पेज का डॉक्युमेंट मिलता है, जिसमें चीन के जासूसों से सतर्क रहने की चेतावनी दी गई थी। यह डॉक्युमेंट ब्रिटिश खुफिया एजेंसी एमआई5 ने सभी को भेजे थे, जिसके बाद हड़कंप मच गया था। डॉक्युमेंट में आगाह किया गया था कि चीन की इंटेलीजेंस एजेंसी की जासूस आर्मी या किसी अहम पद पर बैठे लोगों से लंबे समय तक रोमांटिक या सेक्सुअल रिलेशनशिप में रहती हैं और फिर वे उनसे मनचाहा राज उगलवा लेती हैं। इसके लिए वे अपने जाल में फंसे लोगों को ब्लैकमेल भी करती हैं। इस तरह की जासूसी को हनी ट्रैप नाम दिया गया। जेम्स बॉन्ड की फिल्मों में इस तरह के हनी ट्रैप का खूब इस्तेमाल हुआ है। भारत में सदियों पहले राजा-महाराजाओं के यहां विषकन्याओं का इस्तेमाल हुआ करता था, जो इस तरह के राज उगलवाने में माहिर थीं।

जमीनी मोर्चे पर पिटने वाले पाकिस्तान की ISI अब आजमाती है हनी ट्रैप हथकंडा
भारत से जमीनी मोर्चे पर अक्सर पिटने वाले पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI अब हनी ट्रैप का हथकंडा अपनाती रही है। आईएसआई के द्वारा भारतीय जवानों और अधिकारियों को हनीट्रैप में फंसाकर निजी जानकारियां निकलवाने के मामले पहले भी कई बार सामने आ चुके हैं। अमरीका, ब्रिटेन, चीन, रूस या फिर जापान कई देशों में हनीट्रैप के मामले सामने आते रहे हैं। 1997 में पूर्वी जर्मनी में इस तरह के हनी ट्रैप मामले का भंडाफोड़ हुआ था, तब पूरी दुनिया में इस बात को लेकर हड़कंप मच गया था कि देश के गुप्त राज हासिल करने के लिए एक महिला का इस्तेमाल किया गया था।

आखिर क्यों इस मकड़जाल में फंस जाते हैं सेना से जुड़े लोग
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर कोई क्यों हुस्न के जाल में फंसकर देश की सुरक्षा से संबंधित निजी जानकारियां दुश्मन देश को मुहैया करा देता है। दरअसल, इसके पीछे अहम वजह यह है कि आर्मी, एयरफोर्स या फिर नेवी के अफसर और जवान अपने घर-परिवार से दूर रहते हैं। साथ ही कई बार निजी परेशानियां, या कोई डिप्रेशन जैसी वजह भी जिम्मेदार होती है। दुश्मन देशों के महिला जासूस उनके अकेलेपन का फायदा उठाकर उन्हें अपनी खूबसूरती के जाल में फंसा लेती हैं और फिर ब्लैकमेल करके उनसे सीक्रेट सूचनाएं हासिल कर लेती हैं।

सोशल मीडिया पर बढ़ रहा चलन, फेक प्रोफाइल से बनते हैं रिश्ते
हनी ट्रैप मामले में यह देखा गया है कि सोशल मीडिया के जरिए सेना से जुड़े लोगों को फंसाया जाता है। कई बार पुरुष एजेंट ही महिला बनकर बातें करते हैं और अपने जाल में फंसाते हैं। कई प्रकार के फर्जी साइट्स, डेटिंग एप्लिकेशन होते हैं, जिनके माध्यम से हनी ट्रैप किया जाता है। इसके लिए फेक प्रोफाइल बनाई जाती है। हालांकि, अब महिला जासूसों को ही इस काम में लगाया जाता है, ताकि वीडियो कॉल से वे बता सकें कि वे असली लड़की ही हैं। सेक्स चैट के जरिए मोबाइल नंबरों का आदान प्रदान होता है और व्हाट्सएप, फेसबुक से भी चैटिंग की जाती है। इस दौरान बेहद निजी तस्वीरें और सीक्रेट्स की जानकारी हासिल करती हैं, ताकि वक्त पड़ने पर इनका इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग में किया जा सके। सेना के प्रतिष्ठान या अंदर की तस्वीरें भी हासिल की जाती हैं।

हनी ट्रैप में फंसने से बचने के लिए क्या आजमाए जा सकते हैं तौर-तरीके
वैसे तीनों सेनाएं समय-समय पर अपने-अपने जवानों और अफसरों के लिए सोशल मीडिया को लेकर गाइडलाइंस जारी करती रहती हैं। मगर, इस बारे में लोगों को एजुकेट भी किया जाना चाहिए। यह भी है कि उन्हें बीच-बीच में छुटि्टयां भी मिलनी चाहिए, ताकि वे अपने घर-परिवार के बीच जाकर समय बिता सकें। इसके अलावा, इसे लेकर लोगों में जागरुकता अभियान भी चलाना चाहिए।

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