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स्कूलों में भरवाए जा रहे फॉर्म, बच्चों को कोरोना हुआ तो पैरेंट्स जिम्मेदार!

भोपाल। प्रदेश में 26 जुलाई से स्कूलों में 11वीं-12वीं की कक्षाएं शुरू कर दी गई हैं। अब 5 अगस्त से 9वीं-11वीं की कक्षाएं भी लगेंगी। लेकिन, परेशानी ये कि स्कूल में यदि कोई बच्चा कोरोना से संक्रमित होता है, तो उसकी जवाबदारी स्कूल प्रशासन या शिक्षकों की नहीं बल्कि अभिभावकों की होगी। इसके लिए बकायदा स्कूल अभिभावकों से इस जवाबदेही वाला रजामंदी का फार्म भरा रहे हैं। साथ ही इस फार्म को भरने के लिए दबाव भी डाला जा रहा है।

दरअसल, सरकार ने बच्चों के स्कूल आने के लिए अभिभावकों की रजामंदी अनिवार्य की है। इसलिए स्कूलों ने अभिभावकों पर बच्चों को स्कूल भेजने के लिए रजामंदी वाला फार्म भरने के लिए दबाव डालना शुरू कर दिया है। सरकार की मंशा बच्चों को पालकों की स्वैच्छा क आधार पर स्कूल में लाने की थी, लेकिन स्कूलों ने अनिवार्य रूप से पालकों पर फार्म भरने का दबाव डालना शुरू किया है। इस फार्म में लिखा है कि बच्चों को कोरोना होने पर पूरी तरह पालक ही जिम्मेदार रहेंगे। इसमें स्कूल प्रशासन या शिक्षकों की कोई जिम्मेदारी नहीं रहेगी। इससे अब ऐसे अभिभावक परेशान हो रहे हैं, जो अभी बच्चों को स्कूल भेजने का जोखिम नहीं उठाना चाहते।

हाजरी का भय- स्कूलों ने बच्चों को भेजने के लिए हाजरी का भय दिखाना भी शुरू कर दिया है। वर्तमान में आनलाइन और भौतिक दोनों तरीके से कक्षाएं संचालित करने के निर्देश हैं, लेकिन स्कूलों ने अभिभावकों को कहना शुरू कर दिया है कि यदि बच्चों को स्कूल नहीं भेजा गया, तो उनकी हाजरी नहीं लगेगी। इससे यदि हाजरी कम रहती है, तो बच्चों को परीक्षा में नहीं बैठने दिया जाएगा।

इधर, आगे की कक्षाओं की तैयारी-
दूसरी ओर सरकार पंद्रह अगस्त के बाद सातवीं-आठवीं और छठवीं की कक्षा भी शुरू करने पर विचार कर रही है। यदि कोरोना की स्थिति काबू में रहती है, तो सरकार इस पर फैसला कर सकती है। इसके तहत दो तरह के प्रस्तावों पर चर्चा होनी है। इसमें सातवींं, आठवीं और छठवीं कक्षा को पंद्रह अगस्त के बाद 16 अगस्त से या एक सितंबर से शुरू करने पर विचार है।

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