धर्म

सोमवार को महाशिवरात्रि का महाशुभ संयोग, ऐसे करिएगा शिव आराधना

महाशिवरात्रि परम कल्याणकारी व्रत है जिसके विधिपूर्वक करने से व्यक्ति के दुःख, पीड़ाओं का अंत होता है और उसे इच्छित फल की प्राप्ति होती है। पति-पत्नी, पुत्र-पुत्री, धन, सौभाग्य, समृद्धि व आरोग्यता प्राप्त होती है। पूजन करने वाला मोक्ष को प्राप्त करने के योग्य बन जाता है। महाशिवरात्रि का व्रत हर साल की भांति इस वर्ष भी फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष चतुदर्शी को है। जो कि 4 मार्च 2019 दिन पड़ने वाली है। महाशिवरात्रि का पर्व सोमवार को होने के कारण अत्यंत ही शुभ माना जा रहा है।

सोमवार का दिन शिव जी का ही होता है और उस दिन की महाशिवरात्रि का होना अत्यंत शुभ संकेत लेकर आ रहा है। शिवजी का मूल मंत्र जो संस्कृत के पांच शब्दों से मिलकर बना है, सब मंत्रों में शुभ व पवित्र माना जाता है। माना जाता है कि यह दिन भगवान शंकर का सबसे पवित्र दिन है। यह अपनी आत्मा को पुनीत करने का महाव्रत है। इस व्रत को करने से सब पापों का नाश हो जाता है। हिंसक प्रवृत्ति बदल जाती है। निरीह जीवों के प्रति आपके मन में दया भाव उपजता है।

जलाभिषेक और बेलपत्र
महाशिवरात्रि को दिन-रात पूजा का विधान है। चार पहर दिन में शिवालयों में जाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक कर बेलपत्र चढ़ाने से शिव की अनंत कृपा प्राप्त होती है। इस दिन व्रत रखने वालों को शिव-मंत्र का उच्चारण अवश्य करना चाहिए। ऐसा करने से अनेक प्रकार की सात्विक और पवित्र ऊर्जा का शरीर में समावेश होता है।

प्राचीन शिव पंचाक्षरी मंत्र इस प्रकार है –

नागेन्द्रहराय त्रिलोचनाय,भास्मंगारागाय महेश्वराय
नित्याय शुद्धाय दिगम्बरायतस्मै ‘न’काराय नमः शिवाय ।।1।।

मन्दाकिनी सलिल चंदन चर्चिताय,नंदिश्वाराय प्रमथानाथ महेश्वराय
मंदारापुष्प बहुपुष्प सुपुजिताय,तस्मै ‘म’काराय नमः शिवाय ।।2।।

शिवाय गौरी वादानाब्जवृन्द,सूर्याय दक्षाध्वार नशाकाय
श्रीनिलाकंठाय वृषभध्वजाय, तस्मै ‘शि’काराय नमः शिवाय।।3।।

वसिष्ठ कुम्भोद्भव गौतामार्य,मुनीन्द्र देवार्चिता शेखाराय
चन्द्रार्कवैश्वनारा लोचनाय,तस्मै ‘व’काराय नमः शिवाय।।4।।

यक्षस्वरुपाय जटाधारायपिनाकहस्ताय सनातनाय
दिव्याय देवाय दिगम्बराय,तस्मै ‘य’काराय नमः शिवाय।।5।।

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