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सीएम फडणवीस का बड़ा बयान, ‘दिसंबर तक कर दिया जाएगा वन भूमि अधिकार दावों का निपटारा’

मुंबई: महाराष्ट्र के मुंबई में आजाद मैदान में लोक संघर्ष मोर्चा के बैनर तले जारी आदिवासी किसानों ने गुरुवार को अपना आंदोलन समाप्त कर दिया. महाराष्ट्र सरकार की ओर से मिले लिखित आश्वासन के बाद किसानों ने अपना आंदोलन समाप्त किया. गौरतलब है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आदिवासी किसानों को आश्वासन दिया कि उनके वन भूमि अधिकारों के दावों का इस वर्ष दिसंबर तक निपटारा कर दिया जाएगा. गौरतलब है कि किसानों की मांगों में सूखे के लिए मुआवजा और आदिवासियों के लिए भूमि अधिकारों का हस्तांतरण शामिल हैं. प्रदर्शनकारी आदिवासियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने दक्षिण मुम्बई में विधानभवन में फडणवीस से मुलाकात की. 

णे से शुरू हुआ था किसानों का दो दिवसीय मार्च

आदिवासी कल्याण मंत्री विष्णु सावरा ने बताया कि 3.6 लाख दावे प्राप्त हुए हैं जिनमें से 1.74 लाख दावों का आदिवासियों के पक्ष में निपटारा कर दिया गया है. उन्होंने बताया कि इसी तरह सामुदायिक वन गतिविधि के लिए 12,000 दावे भी प्राप्त हुए हैं जिनमें से 7,700 का निपटारा कर दिया गया है. फडणवीस ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि शेष बचे हुए दावों का भी इस वर्ष दिसंबर तक निपटारा कर दिया जाएगा. बता दें कि किसानों का मार्च गुरुवार की सुबह आजाद मैदान पहुंचा. आठ महीने पहले भी इस जगह पर ऐसा ही प्रदर्शन किया गया था. बुधवार को ठाणे से मुंबई का दो दिवसीय मार्च शुरू करने वाले किसानों और आदिवासियों ने बुधवार की रात मुंबई के सायन इलाके के सोमैया मैदान में गुजारी थी.

मैग्सायसाय पुरस्कार विजेता राजेंद्र सिंह भी हुए मार्च में शामिल

गुरुवार सुबह प्रदर्शनकारी किसान वहां से दादर और जेजे फ्लाईओवर होते हुए आजाद मैदान के लिए निकले थे. पानी के क्षेत्र में काम करने वाले मैग्सायसाय पुरस्कार विजेता डॉक्टर राजेंद्र सिंह भी मार्च में शामिल रहे. उन्होंने सूखे के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया और इसे मानव-जनित करार दिया. किसान, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने की मांग कर रहे हैं जिसके मुताबिक, किसानों को पानी और भूमि जैसे संसाधनों पर सुनिश्चित पहुंच और नियंत्रण मिलना चाहिए. 

राज्य सरकार की लचर प्रतिक्रिया के कारण हुए आंदोलन को मजबूर
उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने और इसका क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के वास्ते एक न्याय प्रणाली की मांग की. प्रदर्शन का आयोजन लोक संघर्ष मोर्चा नामक संगठन ने किया. मोर्चा की महासचिव प्रतिभा शिंदे ने कहा, ”हम राज्य सरकार से अपनी दीर्घकालिक मांगों को पूरा करने के लिए लगातार कह रहे हैं, लेकिन प्रतिक्रिया लचर रही. हम यह आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर हुए.” 

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