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सदियां बदल गईं, लेकिन नहीं बदला वकील और डॉक्टर के कोट का कलर, क्यों?

पहनावा एक ऐसी चीज़ है जो व्यक्ति को दूसरों से अलग बनाता है. शायद इसीलिए संस्थानों द्वारा ड्रेस कोड लागू किया जाता है. छोटे बच्चों के स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी के अलावा दूसरे ऐसे सस्थान भी हैं जहाँ ड्रेस कोड अनिवार्य होता है. इसके अलावा एक महत्वपूर्ण बात ये भी है कि अधिकाँश जगहों पर लागू ड्रेस कोड समय-समय पर बदलता हुआ देखा गया है. लेकिन इसके बावजूद कुछ ऐसे लोग भी हैं जहाँ का ड्रेस कोड आज भी वही है जो कल हुआ करता था. जिनका ड्रेस कोड नहीं बदला उनमें वकील और डॉक्टर भी आते हैं.

आप जब भी किसी वकील को देखते होंगे तो वह हमेशा आपको काले कोट में ही मिलता है. अब समझने वाली बात ये है कि वकील को आप हमेशा काले कोट में ही क्यों देखते हैं जबकि दूसरे सस्थानों का ड्रेस कोड आपको बदलता हुआ दिखाई देता है. लेकिन आपने अब तक वकील को कोर्ट में किसी और कपड़े में नहीं देखा होगा.

दरअसल काला कोट अनुशासन और आत्मविश्वास का प्रतीक माना जाता है. इसके अलावा काला रंग ताकत और अधिकार का भी प्रतीक माना जाता है. साथ ही वकीलों के काले कोट का इतिहास 17वीं सदी से भी जुड़ा हुआ है. साल 1694 में जब क्वीन मैरी की चेचक की बीमारी से मौत हो गई तो उनके पति राजा विलियंस ने न्यायाधीशों और वकीलों को सार्वजनिक रूप से शोक मनाने के लिए काला गाउन पहनने के लिए कहा.

डॉक्टर का सफ़ेद कोट पहनना भी एक अलग निशानी है. सफ़ेद रंग को शान्ति का प्रतीक माना जाता है. इसके अलावा ये रंग स्वच्छता का भी प्रतीक माना जाता है. इस रंग को दैवीय और ईश्वरीय माना जाता है. इसीलिए पादरी हमेशा सफ़ेद लबादे में दिखाई देते हैं.

डॉक्टर को धरती के भगवान् की भी संज्ञा दी जाती है. इसलिए डॉटर हमेशा सफ़ेद कपड़ों में नज़र आते हैं. चूंकि ये रंग मानसिक शान्ति पहुंचाता है इसलिए डॉक्टर के कपड़ों से लेकर दूसरे कर्मचारी तक आपको सफ़ेद रंग के कपड़ों में नज़र आयेंगे.

ये सफ़ेद रंग का अपना प्रभाव ही है जो इसे दुनिया की सभी सभ्यताओं में श्रेष्ठ माना जाता है. इसके अलावा मरीज पहले से ही परेशान होता है. इसलिए जब वह सफ़ेद रंग देखता है तो उसे मानसिक शान्ति का अनुभव होता है.

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