देश

सत्ता से सिर्फ 1 सवाल: कब और कैसे सुधरेंगे यह पत्थरबाज ?

सोमवार को जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir)में पुलवामा(Pulwama) इलाके में आतंकवादी और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई थी। पुलवामा में गाजी के एनकाउंटर के बाद सेना पर हमला करने पत्थरबाजों की भीड़ आई, लेकिन सेना ने उन्हें चेतावनी देकर वापस भेज दिया।

ये घटना श्रीनगर (Srinagar) के जामा मस्जिद के पास हुई थी। बताया जा रहा है कि नौहट्टा इलाके में सीआरपीएफ की एक जिप्सी वरिष्ठ अधिकारी को लेकर जामा मस्जिद के पास वाले इलाके से गुजर रही थी। वही जुम्मे की नमाज के बाद बड़ी संख्या में कश्मीरी सुरक्षाबलों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। तभी वहा से जिप्सी गुजरती देख इन लोगों ने उसे घेर लिया।

पहले तो पत्थरबाजों ने कई पत्थर मारे, फिर गाड़ी को पलटाने कि भी कोशिश कि, लेकिन ड्राइवर ने सूझबूझ दिखाते हुए दो लोगो पर गाड़ी चढ़ा दी और वहां से अधिकारी को सुरक्षित निकालने में कामयाब रहे। कश्मीर इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस अस्पताल में दोनों घायलों को भर्ती कराया गया जहाँ कैंसर पीड़ित अहमद की उसी समय मौत हो गई। घटना के बाद कश्मीरियो ने आरोप लगाया की सेना कि गाड़ी जानबूझ कर भीड़ में घुस गई थी । ऐसे में एक पुराना मामला सामने आया,जब जम्मू -कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में, हाल ही में 100 से ज्यादा पत्थरबाजों ने सीआरपीएफ की एक गाड़ी को घेर लिया था और उसमे सीआरपीएफ के एक बड़े अधिकारी बैठे हुए थे।

पत्थरबाजों कि फौज, सेना की गाड़ी को पलटाने की कोशिश कि और गाड़ी का शीशा भी तोड़ दिया, इतना ही नहीं अधिकारी को गाडी के बाहार भी खींचने की कोशिश कि। ड्राइवर ने सूझबूझ दिखाते हुए दो पत्थरबाजों के ऊपर गाड़ी चढ़ा दी जिसमें एक की मौत हो गई और दूसरे कि हालत गंभीर हैं। एक तरफ पुरे देश में पत्थरबाजों की इस हरकत से ग़ुस्से का माहौल हैं, वहीं दूसरी ओर कश्मीरी नेता मानवधिकार का रोना रो रहे हैं।

Back to top button