उत्तर प्रदेशसेहत

वाराणसी : वायु प्रदूषण और बदलते मौसम के चलते जिले में बढ़ रहा मरीजों का ग्राफ

वाराणसी। जनपद में वायु प्रदूषण और बदलते मौसम के चलते मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। एसएसपीजी मंडलीय चिकित्सालय के फिजीशियन (एमडी मेडिसिन) डॉ निशांत चौधरी ने कहा कि सामान्यतः जहां मंडलीय चिकित्सालय में मेरी ओपीडी 60 मरीजों की रहती थी वहीं यह आंकड़ा अब 100 के करीब जा रहा है। डॉ चौधरी ने बताया कि मंडलीय चिकित्सालय में सितम्बर में जहां 1245 मरीजों की ओपीडी रही वहीं अक्टूबर में 1457 मरीजों का ओपीडी में इलाज हुआ।

इसमें ज्यादातर मरीज वायरल फीवर, डेंगू मलेरिया, टाइफाइड, शुगर, उच्च रक्तचाप और टीबी के थे। डॉ निशांत चौधरी ने बताया कि भारत में वायु प्रदूषण पहले से ही काफी है। ऊपर से इस मौसम में हवा का गति कम और हवा में नमी ज्यादा रहती है। इससे प्रदूषित कण हवा में मौजूद रहते हैं और हम इसे सांस के जरिए संक्रमित होने के लिए बाध्य रहते हैं।

ऐसे में नियमित मास्क लगाइए। खुले में न सोयें, बच्चे, सांस के मरीज तथा वृद्धजन पूरी बांह के कपड़े पहने, गले को ढ़के। सुबह के समय 30 मिनट तक धूप में अवश्य बैठें। कोविड प्रोटोकाल से कोरोना के अलावा अन्य बीमारियों से भी मुक्ति मिली रहेगी। डॉ चौधरी ने बताया कि भारत में तो इस वक्त सबसे ज्यादा चिंता का कारण वायु प्रदूषण ही है। बड़े पैमाने पर चल रही इंडस्ट्रीज और गाडि़यां वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण हैं। दिन ब दिन हवा प्रदूषित होती जा रही है। लोग दूषित हवा में सांस लेने को मजबूर हैं। जोकि स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल रही हैं। वायु प्रदूषण और मौसम परिवर्तन के दौरान की बीमारियाँ जैसे सर्दी, जुकाम, बुखार तथा साफ-सफाई से संबन्धित बीमारियां जैसे डेंगू, मलेरिया से हमें सचेत होकर रहना पड़ेगा। यह कई गंभीर बीमारियां दे सकता है।

लंग कैंसर

वायु प्रदूषण लंग्स के लिए बेहद ही खतरनाक है। जोकि लोगों में बढ़ता ही जा रहा है। दूषित हवा में ज्यादा समय गुजारने से सीधे तौर पर फेफड़े प्रभावित होते हैं। प्रदूषित हवा में रहना दिन भर में कई सिगरेट पीने के बराबर है। आज का प्रदूषण सिगरेट पीने से भी ज्यादा खतरनाक हो चुका है।

हृदय संबंधी समस्याएं

वायु प्रदूषण फेफड़े के अलावा दिल के रोग भी देता है। प्रदूषित हवा दिल का दौरा पड़ने का भी बड़ा कारण हो सकती है। हालांकि, दूषित हवा की पहचान कर आप इससे सचेत हो सकते हैं। प्रदूषण से जो समस्याएं हो सकती हैं, उसके लक्षण शरीर पर पहले ही दिखने लग जाते हैं। दूषित हवा के कारण सीने में दर्द, सांस लेने में समस्या, गले में दर्द जैसी दिक्कतें शामिल हैं।

गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए खतरनाक
प्रदूषण न केवल स्वस्थ्य लोगों बल्कि नवजात शिशुओं और गर्भवती के लिए खतरनाक है। गर्भवती के लिए प्रसव तक का समय बेहद ही महत्वपूर्ण होता है। प्रदूषण न केवल महिला बल्कि होने वाले बच्चे को गंभीर रोग दे सकता है। दूषित हवा में ज्यादा समय बिताने से उसके होने वाले बच्चे में निमोनिया होने और बीमारियों का सामना करने की क्षमता कम हो जाती है।

प्रभावित होगा गुर्दा
प्रदूषण हर लिहाज से खतरनाक है। प्रदूषण गुर्दे संबंधी रोग का कारण भी बन रहा है। प्रदूषण के कारण नेफ्रोपैथी नामक बीमारी भी पैदा कर रहा है। यह किडनी संबंधी बीमारी है। जो खुद कई बीमारियों को जन्म देती है।

वायु प्रदूषण से खुद को ऐसे रखें सुरक्षित

घर में साफ-सफाई के समय मास्क अवश्य पहनें, घर से बाहर निकालने पर मास्क अवश्य पहनें, जोकि बाहर जाते समय पार्टिकुलेट मैटर को फिल्टर करते हैं। घर में पर्याप्त वेंटीलेशन होना चाहिए। रसोई में चिमनी या एग्जॉस्ट जरूर लगवाएं। यह किचेन में मौजूद गैस को बाहर कर देंगे।

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