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वायु प्रदूषण पर आई चौंकाने वाली रिपोर्ट, दिल्ली में 10 वर्ष कम हुई लोगों की औसत उम्र

1998 से अब तक भारत में वायु प्रदूषण में 69 फीसदी बढ़ोत्तरी हुई है। इसका दुष्प्रभाव लोगों की जीवन प्रत्याशा पर पड़ा है। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, खराब वायु गुणवत्ता के कारण भारतीय नागरिकों की जीवन प्रत्याशा में औसतन 4.3 वर्ष की कमी हुई है।

दो दशक पहले यह आंकड़ा महज 2.2 वर्ष था। देश में वायु प्रदूषण का सर्वाधिक दुष्परिणाम दिल्लीवासी झेल रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सुरक्षित मानक से 10 गुना अधिक पर्टिकुलेट मैटर 2.5 के कारण दिल्ली में लोगों की जीवन प्रत्याशा में 10 वर्ष की कमी आई है। उत्तर प्रदेश में यह 8.6 वर्ष है।

यह बातें शिकागो विश्वविद्यालय के दिल्ली स्थित ऊर्जा नीति संस्थान (ईपीआईसी) की ओर से जारी ताजा वायु गुणवत्ता जीवन सूचकांक (एक्यूएलआई) की रिपोर्ट में कही गई हैं। देश में सिर्फ वायु प्रदूषण को नियंत्रित कर लिया जाए तो लोग औसतन 4.3 वर्ष अधिक जिएंगे। वहीं, जीवन प्रत्याशा 69 से बढ़कर 73 वर्ष हो जाएगी।

ईपीआईसी रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव की बात की जाए तो जीवाश्म ईंधनों से उत्पन्न होने वाला कणिकीय वायु प्रदूषण जीवन प्रत्याशा में 1.8 वर्ष प्रतिव्यक्ति की कमी कर देता है।

सीधे सिगरेट-धूम्रपान करने से जीवन प्रत्याशा में 1.6 वर्ष की कमी होती है। एल्कोहल और मादक पदार्थ जीवन प्रत्याशा में 11 माह की कमी करते हैं। असुरक्षित जल और अपर्याप्त स्वच्छता से 7 माह की कमी आती है।

वहीं, एचआईवी/एड्स से 4 माह की कमी होती है। टकराव और आतंकवाद जीवन प्रत्याशा में करीब 22 दिन कम कर देते हैं। इस प्रकार, जीवन प्रत्याशा पर कणिकीय प्रदूषण का प्रभाव धूम्रपान के लगभग बराबर है।

एल्कोहल और मादक पदार्थों के सेवन से दोगुना, असुरक्षित जल से तीन गुना, एचआईवी/एड्स से पांच गुना और टकरावों एवं आतंकवाद से 25 गुना से भी अधिक है।

सूचकांक बताता है जीवन प्रत्याशा पर प्रभाव

संस्थान के निदेशक माइकल ग्रीनस्टोन ने कहा कि लोग धूम्रपान बंद कर स्वयं को रोगों से सुरक्षित रखने के कदम उठा सकते हैं। जिस हवा में सांस लेते हैं, उससे स्वयं को सुरक्षित रखने के लिए वे व्यक्तिगत स्तर पर ज्यादा कुछ नहीं कर सकते हैं।

ग्रीनस्टोन ने कहा कि आज दुनियाभर में लोग ऐसी हवा में सांस ले रहे हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। लोगों में इसकी जानकारी सही तरीके से नहीं पहुंचाई जा रही है। वायु प्रदूषण और उसके प्रभाव को दर्शाने के लिए अलग-अलग रंगों की श्रेणी बनाई गई है।

इसे लेेकर अक्सर लोग अस्पष्ट रहते हैं। संस्थान ने इससे इतर एक ऐसा वायु गुणवत्ता सूचकांक तैयार किया है, जो जीवन प्रत्याशा पर पड़ने वाले प्रभाव को स्पष्ट तरीके से बताता है।

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