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राजस्थान में कोरोना की सुनामी : पहली लहर के मुकाबले ढाई गुना अधिक रफ्तार, CM की धर्मगुरुओं के साथ बैठक आज

राजस्थान में एक दिन में मिलने वाले केसों की संख्या 13 दिन में 4 गुना बढ़ गई है। पहली लहर के मुकाबले ये रफ्तार करीब ढाई गुना ज्यादा है। पहली लहर के पीक यानी नवंबर 2020 में 1 तारीख को एक दिन में 1754 केस मिले थे, 24 तारीख को ये संख्या 3314 थी। केस बढ़ने की रफ्तार डेढ़ गुना तक बढ़ी थी। इस साल 1 अप्रैल को 24 घंटे में 1350 नए केस मिले और 13 अप्रैल को ये संख्या 5528 हो गई यानी नए केस मिलने की रफ्तार चार गुना बढ़ गई।

पिछले साल संक्रमण जब पीक पर था, तब राज्य सरकार ने नाइट कर्फ्यू लगाया। धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। शादी समारोह में लोगों की संख्या 100 तय कर दी थी। निगरानी भी की जाती थी। इस बार दूसरी लहर में मामले ज्यादा आ रहे हैं फिर भी सख्ती पिछले साल के मुकाबले कम है। कोविड मैनेजमेंट से जुड़े विशेषज्ञ डॉ. वीरेन्द्र सिंह कहते हैं कि दूसरी लहर का पीक शुरू ही हुआ है और ये बना रहेगा। सख्ती और पाबंदियां नहीं बढ़ाई गईं तो ये मई तक रहेगा।

CM की धर्मगुरुओं के साथ बैठक आज
राजस्थान में तेजी से बढ़ते केसों को देखते हुए मुख्यमंत्री आज सभी धर्मगुरुओं के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठक करेंगे। इसमें आगामी कुछ समय के लिए तमाम धार्मिक स्थलों को बंद रखने पर सहमति बन सकती है। इसके साथ ही धर्मगुरुओं के माध्यम से अपील भी कराई जाएगी कि आगामी दिनों में तमाम तीज-त्योहार लोग घरों पर रहकर ही मनाएं और कोरोना नियमों का सख्ती से पालन करें।

रेमडेसिविर इंजेक्शन की खुली बिक्री पर रोक
राज्य सरकार ने रेमडेसिविर और टोसिलिजुमैब की खुली बिक्री पर रोक लगा दी है। सभी निजी अस्पतालों को निर्देश दिए हैं कि अगर किसी को रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत है तो वह अपनी डिमांड पहले CMHO को बताएगा, वही इंजेक्शन उपलब्ध कराएंगे। बाजार में ओपन काउंटर पर इंजेक्शन के बेचने और स्टॉक करने पर भी सरकार ने रोक लगा दी है।

राज्य में संक्रमण की दर 9 फीसदी पार
राजस्थान में मंगलवार को राज्य में संक्रमण की दर 9.33% दर्ज की गई। यहां लिए गए हर 11 में से एक सैंपल पॉजिटिव निकला है। राजस्थान में कल 59,209 सैंपल लिए, जिसमें से 5,528 पॉजिटिव निकले हैं। राज्य में अब तक कोरोना के कुल 3 लाख 75 हजार 92 नए केस मिल चुके हैं, जबकि 2,979 लोगों की मौत हो चुकी है। अब तक कुल 3 लाख 31 हजार 423 मरीज ठीक हो चुके हैं।

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