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राजस्थान में आ गई तीसरी लहर? इस जिले में 1200 बच्चों पर टूटा कोरोना का कहर

पाली। कोविड की तीसरी लहर में बच्चों के प्रभावित होने की आशंका है। दूसरी लहर में तैयारी के बावजूद 240 लोगों की अब तक जान जा चुकी है। जबकि पहली लहर में 109 लोग काल के ग्रास बने थे। ऐसे में तीसरी लहर को लेकर पूरी तैयार नहीं होने पर हालात कैसे होंगे इसका अंदाज लगाया जा सकता है। चिकित्सा विभाग के आंकड़ों को देखे तो दूसरी लहर में ही जिले में करीब 1200 बच्चे कोरोना की चपेट में आ चुके है। ये बच्चे केवल अप्रेल से अभी तक संक्रमित हुए है। राहत की बात यह रही कि इन बच्चों में संक्रमण अधिक नहीं फैला और मौत नहीं हुई। ढाबर गांव में तो एक दिन पहले ही एक ही परिवार के दस जनों में से 5 बच्चे संक्रमित मिले थे।

चिकित्सकों व बेड की कमी
पाली व सोजत के चिकित्सालयों में एसएनसीयू वार्ड है। पाली के बांगड़ मेडिकल चिकित्सालय में 12 बेड का एसएनसीयू वार्ड है। जबकि सोजत में दस बेड का। इसके अलावा अन्य जगहों पर एनबीएसयू वार्ड ही है। सुमेरपुर के एनबीएसयू वार्ड में 6, सादड़ी में 5, बाली में 2, जैतारण में 2 बेड है। रोहट में भी यह सुविधा पूर्ण नहीं है। पाली में छह चिकित्सक व दो रेजिडेंट है। सोजत में दो तथा बाली, सादड़ी, रानी, जैतारण में एक-एक शिशु रोग चिकित्सक कार्यरत है। सुमेरपुर जैसे शहर में भी शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं है।

बांगड़ पर बढ़ जाएगा दबाव
कोरोना की दूसरी लहर में एक बार तो बांगड़ मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय पर दबाव बढ़ गया था। बेड की जबरदस्त कमी हो गई थी। जबकि जिले में प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द थे। वहां बेड भी थे, लेकिन ऑक्सीजन नहीं थी। तीसरी लहर में बच्चे चपेट में आते हैं तो बुरे हालात हो सकते हैं। कारण यह है कि प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर बच्चों के उपचार की व्यवस्था नहीं है। शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं है। वहां नौनिहालों को रखने के इंतजाम नहीं और और पाली के सीएमएचओ कार्यालय की ओर से कोई विशेष कदम भी नहीं उठाया जा रहा है।

बनना प्रस्तावित नियो नेटल वार्ड
बच्चों के उपचार के लिए पाली में डिडिकेटेड शिशु रोग चिकित्सालय नहीं है। यहां सामान्य बेडों पर ही बच्चों का उपचार किया जा रहा है। पाली में 10 बेड का नियो नेटल वार्ड बनना प्रस्तावित है, लेकिन उसका निर्माण होने में अभी समय लग सकता है। बच्चों के लिए अलग से वेंटिलेटर आदि की भी व्यवस्था नहीं है।

डॉ. दीपक वर्मा, नियंत्रक व प्रिंसिपल, मेडिकल कॉलेज से बातचीत
सवाल- तीसरी लहर के लिए कितने तैयार है?
जवाब- बांगड़ मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में बच्चों के कोविड के लिए 75 बेड अलग करेंगे। छोटे बच्चों के लिए अभी जो व्यवस्था है वहीं रखेंगे। वेंटिलेटर तो है, लेकिन बच्चों के हिसाब से उनमें कुछ बदलाव करेंगे।
सवाल- बच्चों की संख्या के लिहाज से वर्तमान संसाधन पर्याप्त है?
जवाब – बांगड़ अस्पताल में वर्तमान में संसाधन पर्याप्त है। कमी आएगी तो उसको भी पूरा करेंगे। न्यू नेटल वार्ड भी बनाना प्रस्तावित है।

व्यवस्थाएं जुटा रहे
तीसरी लहर को लेकर बच्चों की बात कही जा रही है। बच्चों के लिए जिले में अभी तक जिले में अधिक व्यवस्थाएं नहीं है। उन पर कार्य किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि उपचार में किसी भी स्तर पर कमी नहीं रहे। –डॉ.सुनील बिष्ट, उपनिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, जोधपुर

क्या करें :
-बच्चों की इम्यूनिटी बढ़ाने पर ध्यान दें और उन्हें खेलकूद में शामिल करें। जिससे बच्चों की इम्यूनिटी मजबूत होगी और वे रोग से लड़ सकेंगे।
-बच्चों को कोरोना में सुरक्षित रखने के लिए हेल्दी खाना खिलाएं। ड्राई फ्रूट, फल और सब्जियां, ज्यूस भरपूर मात्रा में दें। खाने में बच्चों को अंकुरित मूंग, चने, हरी सब्जियां खिलाएं। बच्चों को धूप में बैठने के लिए कहें।
-बच्चों में मेडिटेशन की रुचि बढ़ाएं। सकारात्मक रहने के लिए प्रेरित करें। घर का माहौल सकारात्मक रखें।
-बच्चों की दिनचर्या और खानपान व्यवस्थित रखें। कोविड नियमों की पालना के लिए बच्चों को प्रेरित करते रहें।
-बिना चिकित्सकीय सलाह किसी भी तरह की दवाइयां न दें। बुखार, खांसी व अन्य शिकायत पर तुरंत चिकित्सक से सम्पर्क करे। –डॉ. आरके विश्नोई, बाल-शिशु रोग विशेषज्ञ, पाली।

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