धर्म

रहस्य: ऊंचे पहाड़ों पर क्यों बनाए जाते हैं ज्यादातर देवियों के मंदिर ?

आप लोगों ने कभी इस बात पर गौर किया है कि ज्यादातर मंदिर आखिर पहाड़ों पर ही क्यों बने होते हैं? ऐसे बहुत से मंदिर है जो पहाड़ों पर स्थित है सबसे पहला नाम कश्मीर की वैष्णो देवी फिर हिमाचल की ज्वाला देवी नयना देवी मध्य प्रदेश की मैहरवाली मां शारदा छत्तीसगढ़ डोंगरगढ़ की बमलेश्वरी मां पावागढ़ वाली माता का नाम प्रमुख रूप से लिया जाता है और इन देवी मां के अतिरिक्त भी बहुत सारे देवताओं के मंदिर भी पहाड़ों पर बने हुए हैं जैसे कि बद्रीनाथ और केदारनाथ जैसे मंदिर, आप लोगों ने बहुत से मंदिरों की यात्रा की होगी ज्यादातर मंदिरों के दर्शन की यात्रा दुर्गम ही रही होगी भले ही आज के समय में दिन पर दिन यात्राओं को और भी सुविधाजनक बनाया जा रहा है।

दरअसल, कुछ व्यक्ति जरूर होंगे जिनके मन में किसी भी तीर्थ स्थल के दर्शन करते समय यह ख्याल आया होगा कि पहाड़ों पर ही मंदिर क्यों बनाए जाते हैं? यहां की धार्मिक मान्यता अधिक क्यों है? उन जगहों पर ऐसी क्या शक्ति है कि लोग खींचे चले आते हैं? अगर आप लोगों में से किसी ने इस बारे में विचार नहीं किया है तो आज हम आपको देवी देवताओं के मंदिर पहाड़ों पर बनाने के पीछे की असली वजह क्या है? इसके बारे में जानकारी देने वाले हैं।

जैसा कि आप सभी लोग जानते हैं कि पहाड़ी क्षेत्रों पर इंसानों का आना जाना बहुत कम होता है जिसकी वजह से प्राकृतिक सौंदर्य अपने असली रूप में जीवित रहती है यह एक मनोवैज्ञानिक तथ्य है कि सौंदर्य इंसान को स्फूर्ति और ताजगी प्रदान करती है इसके अलावा अगर हम वैज्ञानिक रूप से इस रहस्य के बारे में जानें तो पहाड़ों पर मंदिर बनाने के पीछे की प्राचीन मान्यताओं का विज्ञान भी समर्थन करता है ऐसा माना जाता है कि पहाड़ी पिरामिड की तरह होती है और पिरामिड में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है जब कोई भी श्रद्धालु वहां पर जाता है तो उन्हें भी सकारात्मक ऊर्जा महसूस होने लगती है पहाड़ों पर दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को उस सकरात्मक ऊर्जा का प्रभाव महसूस होता रहता है और उनका मन भी धार्मिक हो जाता है इसके अतिरिक्त साधना के लिए मन को एकाग्र करना बहुत ही जरूरी है इसलिए पहाड़ों पर मंदिर बनाने की यह भी वजह है।

पौराणिक मान्यता अनुसार पहाड़ों पर देवी-देवताओं का धार्मिक स्थल होने के पीछे की वजह यह है कि देवी राजा हिमाचल की पुत्री है इन्हीं के नाम पर अब हिमाचल प्रदेश है इस स्थान को देवभूमि भी कहा जाता है देवी का जन्म यही हुआ था इसी वजह से इन्हें पहाड़ों वाली माता भी पुकारा जाता है वैसे देखा जाए तो देवी राक्षसों के नाश के लिए उत्पन्न हुई थी राक्षस मैदानी इलाके में आते हैं और देवी पहाड़ों से उनको देख उनका वध कर देती है इसलिए सभी देवी देवताओं का स्थान ऊंचे पहाड़ों पर बनाया जाता है।

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