उत्तर प्रदेश

योगी सरकार के वैक्सीनेशन विज्ञापन पर पूर्व IAS का तंज- फिर सामने आया ‘दुर्गेश चौधरी’

किसी को दुर्गेश चौधरी याद है क्या? वही दुर्गेश चौधरी जिसे लेकर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के ऑफिस के ट्विटर हैंडल से शेयर किए वीडियो में दावा किया गया था कि दुर्गेश चौधरी नाम के एक शख्स को लेखपाल की नौकरी मिली है। किसी को याद हो ना हो सूबे के एक पूर्व IAS ने वैक्सीनेशन की सहुलियतों पर लेकर सरकार के विज्ञापन में नए दुर्गेश चौधरी को खोज लिया है और जबरदस्त चुटकी ली है।

आसान भाषा में समझें तो दुर्गेश चौधरी वो सख्श था जिसे बीते 5 सालों में लेखपाल की भर्ती ना निकलने के बावजूद भी लेखपाल की नौकरी मिली थी। खुद दुर्गेश चौधरी ने राज्य सरकार के विज्ञापनी वीडियो में आकर बोला था कि उसे बिना किसी पैरवी आसानी से नौकरी मिली। और तो दुर्गेश ने योगी बाबा का धन्यवाद भी किया था। जब इसकी सच्चाई सामने आई तो दुर्गेश चौधरी ट्रोल होने लगे।

ट्रोल हुए तो पता चला कि अखिलेश यादव की सरकार के बाद सूबे में लेखपाल की कोई भर्ती निकली ही नहीं। मीडिया दुर्गेश को खोजने लगा। दुर्गेश मिला तो बताया कि उससे ऐसा कहने को कहा गया था। बाद में जादा किरकिरी होने पर दुर्गेश भाग गया या भगा दिया गया अभी तक रहस्य बना हुआ है। इस कोरोना महामारी के समय कल एक वीडियो फिर सामने आया है। जिसमें 34 वर्षीय सजल कुमार सिंह ने दावा किया है कि उसे कोरोना वैक्सीनेशन में कोइ दिक्कत नहीं हुई। 5 मिनट में वैक्सीन लग गई।

सरकार द्वारा बनवाए गए इस विज्ञापन के वीडियो पर पूर्व IAS सूर्य प्रताप सिंह ने चुटकी लेते हुए लिखा कि ‘हाहाहा। उत्तरप्रदेश सरकार का जवाब नहीं।अभी कल ही हम बात कर रहे थे की ‘दुर्गेश चौधरी’ की तर्ज पर लोग आते ही होंगे सरकार की तारीफ करने, और आज वीडियो भी जारी हो गया, देखिए और आनंद लिजिए। वैक्सीन भले ना हो, पर वैक्सीनेशन एकदम अच्छे से चल रहा है।’

सूर्य प्रताप अपने दूसरे ट्वीट में लिखते हैं ‘सरकार द्वारा खड़ा किया गया नया ‘दुर्गेश चौधरी’ खुद कह रहा है ‘मैं झूठ नहीं बोल रहा हूँ’।इन सब फ़र्ज़ी प्रचार तंत्रों पर जनता का पैसा फूंकने से बेहतर होता की आप वैक्सीनेशन तेज करते।बहुतों को पंजीकरण करने में सहयोग की ज़रूरत है, लोग लाइनों में खड़े होकर निराश लौट रहे हैं।’

दरअसल भाजपा की केंद्र और राज्यों की सरकार पर विज्ञापन प्रेमी सरकार होने का आरोप लगता रहता है। ऐसे में जब आम जनता गर्मी और धूप के बीच लाईनो में पिस रही है तब सरकार विज्ञापन से भृम पैदा करने का काम कर रही है। मिथ्या बातें की जा रही हैं। सुविधाएं करने की बजाए पत्रकारों और जनता को दबाया जा रहा है। नैतिक जिम्मेदारी पर पर्दा डाला जा रहा है।

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