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योगी-मोदी के खिलाफ अखिलेश का चक्रव्यूह, कैसे बाहर निकलेंगे सरकार?

उत्तर प्रदेश और केंद्र की भाजपा सरकारों के खिलाफ समाजवादी पार्टी ने आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। किसानों, बेरोजगारों, व्यापारियों की समस्याओं को लेकर सपा ने केंद्र व राज्य सरकारों के खिलाफ आंदोलन की रूपरेखा तैयार की है। इस आंदोलन को चलाने के लिए पार्टी पदाधिकारियों को जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।

2017 में प्रदेश की सत्ता गंवाने वाली समाजवादी पार्टी ने जनता की समस्याओं को लेकर केंद्र और राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले जनता के दिल में उतरने के लिए सपा मुखिया अखिलेश यादव ने अपने सभी जिलाध्यक्षों को जनता के मुद्दों को उठाकर उन्हें हल कराने के लिए आंदोलन करने के निर्देश दिए हैं।

मेरठ सपा जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह का कहना है कि किसानों को गन्ने का भुगतान नहीं होना, बेरोजगारी बढ़ने, व्यापारियों की समस्याओं, महिलाओं के खिलाफ अत्याचार बढ़ने जैसे मुद्दों को लेकर सपा ने आंदोलन की रूपरेखा बनाई है। इन आंदोलन की कमान पार्टी पदाधिकारियों को दी गई है। जनता की समस्याओं को हल कराने में सपा कार्यकर्ता पीछे नहीं हटेंगे वोटर अभियान पर विशेष फोकस भाजपा के बूथ स्तर तक युवाओं को जोड़ने के अभियान से सबक लेते हुए सपा ने भी अपने कार्यकर्ताओं को ज्यादा से ज्यादा युवाओं के वोट बनवाने का जिम्मा सौंपा है।

इस अभियान के लिए सभी विधानसभा प्रभारियों को बूथ स्तर तक कैंप लगाने को कहा गया है। दलितों-पिछड़ों पर ध्यान दिया जा रहा बसपा के साथ संभावित गठबंधन को देखते हुए सपा नेताओं ने दलितों और पिछड़ों की समस्याओं पर विशेष ध्यान देने का निर्णय लिया है। साथ ही व्यापारियों की समस्याओं को भी प्राथमिकता पर हल कराया जा रहा है। सपा व्यापार सभा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गोपाल अग्रवाल, युवा नेता अतुल प्रधान, महानगर अध्यक्ष आदिल चौधरी समेत कई नेता इस काम में जुटे हैं।

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