उत्तर प्रदेश

योगी की नीति : ट्रेन और क्रूज में विदेशी शराब मिलेगी, जानें कैसे होगी बिक्री

लखनऊ. यूपी सरकार अब ट्रेनों और क्रूज शिप में भी विदेशी शराब बेचेगी। इससे सरकार को राजस्व में फायदा होगा। हालांकि ट्रेनों में शराब का सेवन पूरी तरह से प्रतिबंधित और दंडात्मक है इसलिये इसे पैसेंजर ट्रेनों के बजाय विशेष टूरिस्ट ट्रेनों में बेचा जाएगा। सरकार बाकायदा उन विशेष टूरिस्ट ट्रेनों और पर्यटक क्रूज शिप के लिये बार का लाइसेंस जारी करेगी, जिनमें इसकी इजाजत होगी। साल 2021-22 की आबकारी नीति में इसका प्रावधान करते हुए इसके लिये लाइसेंस शुल्क तय कर दिया गया है।

आबकारी विभाग के प्रमुख सचिव संजय भूसा रेड्डी के मुताबिक आबकारी नियमावली में रेलवे प्रशासन के पर्यवेक्षक और नियंत्रण के अधीन या उनके द्वारा अनुरक्षित विशेष प्रायोजन की रेल गाड़ियों या प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित क्रूजों में विदेशी शराब बेचने के लिये एफएल-8 प्रपत्र में लाइसेंस स्वीकृत करने का भी प्रावधान किया गया है। विशष रेलगाड़ियों के लिये सालाना लाइसेंस फीस 15 लाख रुपये होगी, जबकि अंतर्राष्ट्रीय क्रूज के लिये पांच लाख और अंतर्राज्यीय क्रूज शिप के लिये तीन लाख तय किया गया है। ये पर्यटक क्रूज शिप होंगे।

नई नियमावली में बार लाइसेंस लेने की प्रक्रिया को आसान कर दिया गया है। इसके लिये शासन स्तर से मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। रेस्टोरेंट, होटल, क्लब, बार और एयरपोर्ट के बार लाइसेंस आबकारी आयुक्त स्तर से ही मिल जाएंगे। कमिश्नर की अध्यक्षता वाली बार कमेटी की जगह डीएम की अध्क्षता में गठित बार कमेटी ले लेगी। नई नीति में घर में बिना लाइसेंस घर में भी सीमा से अधिक शराब नहीं रख पाएंगे।

2021-21 में आबकारी विभाग की सभी प्रक्रियाओं में कंप्यूटराइज्ड इंटीग्रेटेड सप्लाई चेन मैनेजमेंट सिस्टम (आईईएससीएमएस) लागू किया जाएगा। दुकानों पर ई-पाॅस मशीन रखना जरूरी बनाया गया है। प्रदेश में पहली बार अनाज (चावल, गेहूं, बाजरा, मक्का) से देशी शराब बनाने की अनुमति दी गई है। सरकार ने आबकारी विभाग के जरिये साल 2021-22 में 34,500 करोड़ रुपये राजस्व का लक्ष्य तय किया है। इसके तहत प्रदेश में शराब उत्पादन का प्रोत्साहित किया जाएगा। नीति का मकसद ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और गुड गवर्नेंस को बढ़ावा देना है।

Back to top button