उत्तर प्रदेश

कृषि विश्वविद्यालय में हुईं 18 नियुक्तियां, इनमें से 11 ‘ठाकुर’

लखनऊ. कुछ दिन पहले योगी सरकार में शिक्षा मंत्री मंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी के भाई को सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में गरीबी कोटे से प्रोफेसर बनाने का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ है कि यूपी के ही एक अन्य विश्वविद्यालय में हुई नियुक्तियों पर जमकर बवाल मचा हुआ है। यह मामला बांदा कृषि विश्वविद्यालय से जुड़ा हुआ है। सबसे बड़ी बात यह है कि खुद भाजपा के तमाम नेता इस मामले में खुलकर सामने आ गये हैं।

बांदा कृषि विश्‍वविद्यालय में प्रोफेसर पद की नियुक्तियों को लेकर हो रहे बवाल में बीजेपी विधायक बृजेश प्रजापति ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखकर कहा है कि विश्वविद्यालय में आरक्षण से जुड़े नियमों की सीधे-सीधे अनदेखी की गई है। वहीं विपक्ष ने भी इस मुद्दे को लेकर योगी सरकार पर हमले शुरू कर दिए हैं।

गौरतलब है कि कृषि विश्‍वविद्यालय बांदा में प्रवक्‍ताओं के 20 पदों पर वांट निकाला गया था। इसके मुतबिक 18 सामान्‍य और 2 पद पिछड़े वर्ग के लिए पद आरक्षित थे। प्रवक्ताओं के पदों के लिए जो वांट निकला था, उसमें नियुक्ति का रिजल्‍ट 1 जून को निकला। असल बवाल यहीं से शुरू हुआ, क्योंकि सामान्‍य वर्ग में चुने गए 15 प्रोफेसरों में से 11 ठाकुर जाति यानी ‘सिंह’ थे।

उत्तर प्रदेश के मुखिया चूंकि खुद राजपूत जाति से संबंध रखते हैं, इसलिए बार-बार उन्हें आरोपों के घेरे में लिया जाता है कि उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद से प्रदेश में इसी जाति का वर्चस्व कायम हो गया है। यहां भी अब लगातार उन पर विपक्ष के साथ साथ भाजपा में शामिल अन्य जातियां जो उनसे पहले से असंतुष्ट चल रहीं थी, हमलावर हो गयी हैं। मामले को ज्यादा तूल पकड़ते देख कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने इस मामले में जांच का आश्वासन दिया है।

बांदा कृषि विश्वविद्यालय में एक ही जाति यानी 11 ‘सिंह’ प्रोफेसर नियुक्त होने के बाद भाजपा विधायक बृजेश प्रजापति ने प्रधानमंत्री मोदी, राज्‍यपाल आनंदी बेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ को पत्र लिखकर शिकायत की है कि इन नियुक्तियों में आरक्षण नियमों का पालन नहीं किया गया है, बल्कि खुलेआम धज्जियां उड़ायी गयी हैं।

भाजपा के पूर्व सांसद और कांग्रेस नेता उदित राज ने इस मामले में योगी सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए ट्वीट किया है, ‘बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने 15 प्रोफ़ेसर की भर्ती 1 जून को घोषित किया, जिनमें 11 ठाकुर जाति के हैं, जबकि 1 ओबीसी, 1 एससी 1 भूमिहार &1 मराठी शामिल है। हज़ारों साल से जाति ही मेरिट रही है और अभी चालू है।’

आप सांसद संजय सिंह ने ट्वीट किया है, ‘मैं बार-बार कहता हूँ “भाजपा दलितों/पिछड़ों की विरोधी इस मामले में भी SC/ST/OBC की नौकरी खा ली गई। आदित्यनाथ जी एक बात साफ़ कीजिये अगर 15 में से 11 भर्ती एक जाति की हुई तो आरक्षण का क्या हुआ? ये तो खुलेआम SC/ST/OBC का हक़ मारा जा रहा है।’

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