उत्तर प्रदेशख़बर

योगीराज में एनकाउंटर्स पर आचार्य का सवाल- हर मुठभेड़ की एक ही थ्योरी क्यों ?

लखनऊ के विवेक तिवारी हादसे के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा किए जा रहे ताबड़तोड़ एनकाउंटर पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने के नाम पर पुलिस बेकसूर लोगों को अपनी गोली का निशाना बना रही है।

हालांकि योगी सरकार इन आरोपों को खारिज करती है। उसका कहना है कि एनकाउंटर उन्हीं अपराधियों के हो रहे हैं जो पुलिस पर हमला करते हैं। पुलिस अपने बचाव में अपराधी पर गोली चलाती है। लेकिन तथ्यों की बुनियाद पर योगी सरकार के यह दावे खोखले नज़र आते हैं।

मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन ‘सिटीजंस अगेंस्ट हेट’ ने हाल ही में एक रिपोर्ट पेश कर दावा किया था कि यूपी पुलिस द्वारा किए गए करीब 16 एनकाउंटरों में गड़बड़ियां पाई गई हैं। संगठन का कहना था कि मुठभेड़ से जुड़े कई ऐसे तथ्य उन्हें मिले हैं जो संदेह पैदा करते हैं। 

पुलिस द्वारा किए गए इन 16 एनकाउंटरों पर सवाल खड़े करते हुए संगठन का कहना था कि इन सभी मामलों में पुलिस ने करीब-करीब एक जैसी ही कहानी बताई।

जैसे अपराधियों को पकड़ने का तरीका और एनकाउंटर में हर बार एक अपराधी मारा जाता है, जबकि दूसरा मौके पर फरार होने में सफल हो जाता है।

इसके अलावा संगठन ने ये भी दावा किया था कि पुलिस ने जिन अपराधियों को एनकाउंटर में मार गिराने का दावा किया था, उनके शरीर पर कई तरह के जख्म के निशान मिले थे, जिससे मामला एनकाउंटर की तरफ न जाकर, पुलिस प्रताड़ना की तरफ घूम जाता है।

संगठन ने एनकाउंटर फर्जी होने का एक और दावा किया था कि मुठभेड़ में अपराधियों को बिल्कुल पास से गोली मारी गई है, जो एनकाउंटर पर सवाल खड़े करता है।

उनका कहना था कि एनकाउंटर के तहत अमूमन गोली तब चलाई जाती है, जब अपराधी भाग रहा होता है या पुलिस पर हमला बोल देता है। ऐसे में गोली बिल्कुल पास से कैसे लग सकती है?

संगठन का ये भी दावा था कि पुलिस पहले गोली मार देती है और बाद में उसके हाथ में बंदूक पकड़ा दी जाती है, ताकि उसे एनकाउंटर का रूप दिया जा सके। संगठन के इन्हीं दावों की पुष्टी अध्यात्मिक गुरु आचार्य प्रमोद कृष्णम ने भी की है।

उन्होंने एक ट्वीट के ज़रिए कहा, ‘उत्तर प्रदेश के “प्रत्येक” एनकाउंटर में, लाश के हाथ में “पिस्तौल” थमा कर, दो बदमाश अंधेरे का फ़ायदा उठा के “हमेशा” भाग जाते हैं, और कभी नहीं पकड़े जाते’।

अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब प्रदेश में हो रहे एनकाउंटरों को कटघरे में खड़ा किया जा रहा है तो सूबे की योगी सरकार इन एनकाउंटरों की न्यायिक जांच क्यों नहीं करा रही। सरकार को आख़िर किस बात का डर है?

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