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यूपी सरकार में नई खींचतान, केशव को योगी ने दिया ‘करोड़ों’ का झटका !

जब 2017 में यूपी विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत से जीत मिली, तो इस जीत का काफी श्रेय तब के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य की मेहनत को दिया गया. माना गया कि उनको ही पार्टी सूबे में सीएम बनाएगी. लेकिन अचानक से योगी आदित्यनाथ को गोरखपुर से लखनऊ बुला लिया गया और उनका राजतिलक हो गया. केशव मौर्य को डिप्टी सीएम की कुर्सी से संतोष करना पड़ा.

तब से लेकर अबतक, लखनऊ के सत्ता के गलियारों में अकसर इन दोनों नेताओं की आपसी अदावत की खबरें सुनाई देती रही हैं. ऊपर-ऊपर सब ठीक दिखता है, लेकिन अंदरखाने की बात पर दबी जुबान से यही बताया जाता है कि कुछ भी ठीक नहीं है. दोनों नेता एकदूसरे को नीचा दिखाने, एकदूसरे के काम में टांग अड़ाने की कोशिश करते रहते हैं. इसी सिलसिले में अब एक और बड़ी खबर आई है.

दरअसल योगी सरकार ने यूपी की सभी विधानसभा क्षेत्रों में पांच-पांच करोड़ रुपए की लागत से सड़कों के निर्माण की जिम्मेदारी उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के विभाग से लेकर ग्रामीण अभियंत्रण सेवा (आरईएस) विभाग को सौंप दी है. लोकसभा चुनाव के लिहाज से विशेष तौर पर घोषित इस योजना के लिए सरकार ने अनुपूरक बजट में 750 करोड़ रुपए की व्यवस्था की है. बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 31 मई को वित्तीय वर्ष 2018-19 में सभी विधानसभा क्षेत्र में 5 करोड़ रुपए की लागत से सड़कों के निर्माण का ऐलान किया था. उस समय इन सड़कों के निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग को नोडल एजेंसी नामित किया गया था.

अनुपूरक बजट में इस काम के लिए 750 करोड़ की व्यवस्था भी कर दी गई. यह बजट नियोजन विभाग के अंतर्गत संचालित आर्थिक विकास योजना में दिया गया. नियोजन विभाग के मंत्री खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं. इस निर्णय का असर यह हुआ कि निर्माण कार्यों के लिए लोक निर्माण विभाग के दोषी होने के बावजूद घोषणा के अंतर्गत प्रस्तावित कार्यों की स्वीकृति और कार्यदायी संस्था नामित करने का अधिकार नियोजन के पास आ गया, लेकिन निर्माण कार्य के लिए नोडल एजेंसी होने की वजह से विधायकों ने काम के प्रस्ताव लोक निर्माण विभाग को देने शुरू कर दिए.

लोक निर्माण विभाग उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के पास है. इस योजना के काम सीधे तौर पर मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से जुड़े विभागों के पास होने के बावजूद विधायकों के प्रस्ताव पर कार्रवाई बढ़ नहीं पा रही थी. इस बीच केशव के विभाग ने सभी विधानसभा में 5-5 करोड़ के कामों से छुट्टी पाने और दूसरी कार्यदायी संस्था नामित किए जाने का प्रस्ताव बढ़ा दिया. सरकार ने इस पर निर्णय लेते हुए इस घोषणा के क्रम में विधायकों की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी ले लेकर आरईएस विभाग को सौंपने का आदेश कर दिया है.

 

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