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यूपी पंचायत चुनाव : सैफई में बदला इतिहास, आजादी के बाद पहली बार प्रधान पद के लिए मतदान..

 

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के दूसरे चरण चरण के लिए आज वोटिंग हो रही है। इस चरण में सबसे चर्चित सीट समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के गांव सैफई की है। यहां आजादी के बाद पहली बार प्रधान पद के लिए चुनाव हो रहा है। दलित जाति के लिए सीट आरक्षित होने के कारण मुलायम परिवार ने अपने करीबी बुजुर्ग रामफल वाल्मीकि को मैदान में उतारा था, लेकिन एक अन्य प्रत्याशी विनीता ने नामांकन कर दिया। इसके चलते सैफई में निर्विरोध की परंपरा पर ब्रेक लग गया।

बता दें कि 1939 में जन्मे मुलायम सिंह यादव पहली बार 1967 में विधायक बने थे। साल 1992 में उन्होंने समाजवादी पार्टी बनाई थी। हालांकि उनके राजनीति में उतरने से पहले ही गांव में निर्विरोध प्रधान चुने जाने की परंपरा रही है। सुबह सात बजे से सैफई के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में मतदान जारी है।

मुलायम परिवार के सदस्यों ने किया मतदान

मुलायम सिंह के छोटे भाई अभय राम सिंह यादव, राजपाल यादव के साथ लालू यादव के दामाद पूर्व सांसद मैनपुरी तेज प्रताप यादव, भतीजे निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष और प्रत्याशी अभिषेक उर्फ अंशुल यादव ने मतदान केंद्र पर पहुंचकर मतदान किया है।

इटावा के 8 ब्लॉकों में हो रहा मतदान

  • मतदान केंद्र: 827
  • मतदान स्थल: 1624
  • मतदान कर्मी: 6498
  • जोनल मजिस्ट्रेट: 30
  • सेक्टर मजिस्ट्रेट: 173
  • मतदाता: 948425
  • ग्राम पंचायत प्रधान पद: 471
  • क्षेत्र पंचायत सदस्य: 582
  • जिला पंचायत सदस्य: 24

सैफई गांव में निर्विरोध प्रधान चुने जाने की परंपरा रही है। आजादी के बाद अब तक यहां कभी मतदान नहीं हुआ। यह पहला मौका जब सैफई गांव में प्रधान पद के लिए मतदान हो रहा है। पिछले साल 17 अक्टूबर को दर्शन सिंह यादव का निधन हो गया था। वे 1971 से लगातार प्रधान होते चले आ रहे थे।

सपा-प्रसपा मिलकर लडें तो कोई हरा नहीं सकता

मुलायम के भाई राजपाल यादव ने कहा कि जिस तरह पंचायत चुनाव में सपा और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं, उसी तरह विधानसभा चुनाव में भी अगर एक होकर चुनाव लड़ा जाए तो निश्चय ही समाजवादी पार्टी को सफलता मिलेगी। वहीं निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष अंशुल यादव ने कहा कि सपा और प्रसपा मिलकर इटावा की सभी जिला पंचायत सदस्य की सभी 24 सीट जीतने का काम करेगी। बता दें कि यूपी में कई पार्टियां सत्ता में आई गई लेकिन 1989 से लगातार समाजवादी पार्टी का प्रत्याशी इटावा जिला पंचायत सीट पर काबिज होता चला आ रही है. 

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