उत्तर प्रदेशराजनीति

यूपी चुनाव में बुंदेलखंड में “क्लीन स्वीप” करेगी बीजेपी, यहां जानिए कारण

बुंदेलखंड मध्य भारत का एक प्राचीन क्षेत्र है। बुंदेलखंड बुंदेल राजपूतों के नाम पर प्रसिद्ध है, जिनके राज्य की स्थापना 14वीं शती में हुई थी। इसका प्राचीन नाम जेजाकभुक्ति है। इसका विस्तार उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश में भी है। बुंदेली इस क्षेत्र की मुख्य बोली है। भारत के हर प्रांत की भांति बुंदेलखंड की अपनी अलग ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्‍कृतिक विरासत है। ऐतिहास के पन्नों में बुंदेलखंड के साथ अनेकों महान गाथाएं जुड़ी हुई है। यहाँ जन्‍मी अनेक विभूतियों ने न केवल अपना बल्कि इस क्षेत्र का नाम खूब रोशन किया और इतिहास में अमर हो गए। जैसे कि, रानी लक्ष्मी बाई, महान चन्देल शासक बिधाधर चन्देल, महाराजा क्षत्रसाल सिंह बुंदेला, गोस्वामी तुलसी दाल, मैथलीसरण गुप्त एवं अन्य।

बुंदेलखंड क्षेत्र उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश के बीच बटा हुआ है। उत्तरप्रदेश में इस क्षेत्र के 7 ज़िले आते है, चित्रकूट, बंदा, झाँसी,  जालौन, हमीरपुर, महोबा और ललितपुर। वहीं मध्यप्रदेश के 6 जिले बुंदेलखंड क्षेत्र के अंतर्गत आते है, छतरपुर, टिकमगढ़, दमोह, सागर, दतिया और पन्ना। एतिहास के पन्नों में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में इंगित कराने के बाद भी यह क्षेत्र विकास के आभाव में बर्बादी की ओर जा रहा था, और तब साल 2017 में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी। उसके पश्चात योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने बुंदेलखंड को बर्बादी के दलदल से बाहर खींच निकाला। आज इस क्षेत्र में कई विकास परियोजनाएं सफलतापूर्वक खत्म हो चुकी है, तो कई महत्वाकांक्षी परियोजना प्रगति की राह पर हैं।

भारत की आजादी के बाद उत्तर प्रदेश में मुख्यतौर पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी सत्ता में रही हैं। इन सभी पार्टियों ने बुंदेलखंड को विकास के नक्शे में कभी आने नहीं दिया, हमेशा से इस क्षेत्र को विकास से वंचित रखा गया है। पारंपरिक तौर; पर देखा जाए तो यह क्षेत्र समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का गढ़ रहा है, क्योंकि यहाँ की ज्यादतर आबादी ओबीसी और पिछड़ी जनजाति से आती है। दोनों ही पार्टियों ने चुनाव के समय मतदाताओं को लुभाने के लिए कई वादें किए थे, पर चुनाव खत्म होने के बाद, उनके वादे भी बाकी वादों के साथ ठंडे बस्ते में पड़े रह गए। अंततः साल 2014 से बुंदेलखंड की जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊपर भरोसा दिखाया है। साल 2017 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 19 में से 19 सीटों पर जीत दर्ज की थी, वहीं 2019 के आम चुनवों में बीजेपी 4 में से 4 सीटों पर जीती थी।

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