उत्तर प्रदेश

मेरठ : योगी के मंत्री कर रहे थे कोरोना की समीक्षा बैठक, उधर ई-रिक्शा पर महिला ने तड़प-तड़प तोड़ा दम

मेरठ, उत्तर प्रदेश के 5 सबसे ज्यादा संक्रमित शहरों में दूसरे नंबर पर है। यहां 14 हजार से अधिक एक्टिव केस हैं। बावजूद इसके यहां इलाज व्यवस्था पूरी तरह चौपट है। बुधवार को योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री श्रीकांत शर्मा मेरठ के दौरे पर थे। वे जिस समय कोरोना संक्रमण को लेकर अफसरों के साथ समीक्षा बैठक कर रहे थे, उसी दौरान एक महिला मेडिकल कॉलेज में इलाज को लेकर तड़प रही थी। 48 साल की महिला को न तो स्ट्रेचर मिला और न ही ऑक्सीजन। मेडिकल कॉलेज में महिला को भर्ती तक नहीं किया। इलाज न मिलने पर महिला ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।

दो घंटे तक इलाज के लिए भटकते रहे परिजन

लिसाड़ीगेट क्षेत्र के श्याम नगर की हुस्नआरा (48) को सांस लेने की दिक्कत थी। काफी जद्दोजहद के बाद जब एंबुलेंस नहीं मिली। महिला की सांसें जवाब देने लगी थीं। ऑक्सीजन का लेवल 50 पर था। एक प्राइवेट डॉक्टर के पास ले गए तो उसने सलाह दी कि इन्हें मेडिकल कॉलेज ले जाओ। परिवार के लोग ई-रिक्शा में ही महिला को मेडिकल कॉलेज में गए। लेकिन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में डॉक्टरों ने यह कहकर महिला को भर्ती नहीं किया कि यहां बेड खाली नहीं है और मेडिकल इमरजेंसी फुल हो चुकी है।

परिवार के लोग मिन्नतें करते रहे कि किसी भी तरह महिला को भर्ती कर लो। मेडिकल कॉलेज में उस समय न तो प्राचार्य थे और न ही अन्य वरिष्ठ डॉक्टर। क्योंकि प्रदेश सरकार के मंत्री श्रीकांत शर्मा मेरठ में स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन के साथ बुधवार दोपहर को समीक्षा बैठक कर रहे थे। 2 घंटे तक भी महिला के परिवार वाले मेडिकल कॉलेज में भटकते रहे। आखिकार हुस्नआरा की सरकारी सिस्टम ने जान ले ली।

मेडिकल में सिर्फ लापरवाही की जांच का आश्वासन
लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज में अव्यवस्थाओं की लाइन लगने लगी हैं। लापरवाही का यह आलम है कि यहां सुनवाई नहीं होती। न समय से मरीज को भर्ती किया जा रहा है और मरीज भर्ती भी हो गया तो 12 दिन तक डॉक्टर व अन्य स्टाफ दूसरे मरीज की अपडेट परिवार को देकर पल्ला झाड़ लेते हैं। 3 दिन बीतने के बाद भी इस लापरवाही में कोई कार्रवाई नहीं हुई। और प्राचार्य मेडिकल कॉलेज डॉ ज्ञानेंद्र कुमार सिर्फ जांच का आश्वासन देते हैं। अब भी उनका यही जवाब है कि जांच कराई जा रही है।

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