उत्तर प्रदेश

महागठबंधन से पहले बसपा में बगावत, खुलेआम मायावती का विरोध

माना जाता है कि बहुजन समाज पार्टी में जो कुछ भी हैं, वो बसपा सुप्रीमो मायावती हैं. उनके फैसले के आगे कोई कुछ बोल नहीं सकता, बगावत तो दूर की बात है. लेकिन इस धारणा के अलग कुछ हुआ है, यूपी के आगरा जिले में.

लोकसभा चुनाव 2019 के लिए बसपा ने आगरा सीट से प्रभारी घोषित तो कर दिया लेकिन पार्टी में विरोध के सुर एक बार फिर से उठने शुरू हो गए हैं. आगरा लोकसभा सीट से बसपा ने मनोज सोनी को प्रभारी घोषित किया है. वहीं मायावती के करीबी सुनील कुमार चित्तौड़ का विरोध अब पोस्टरों के माध्यम से होने लगा है. पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा रामबाग चौराहे पर होर्डिंग्स लगाकर विरोध दर्ज कराया जा रहा है.

आरोप है कि सुनील कुमार चित्तौड़ अपने रिश्तेदारों को आगे बढ़ा रहे हैं. पार्टी में 75 प्रतिशत पदाधिकारी चित्तौड़ के रिश्तेदार हैं. ऐसे में टिकट की चाहत रखने वाले एक शख्स ने होर्डिंग लगाकर विरोध दर्ज कराया. होर्डिंग्स पर एत्मादपुर तहसील के गांव धौर्रा मनोहरपुर के छोटे लाल उर्फ छोटे भैया का नाम लिखा है जिसमें कहा गया है कि आगरा में जाटव व अन्य समाज के तमाम लोकप्रिय लोगों के चुनाव लड़ने के इच्छुक होते हुए भी बाहर के प्रत्याशी को चुनाव लड़वाया जा रहा है.

वहीं प्रभारी बनाए गए मनोज सोनी ने स्पष्ट किया है कि उनकी शिक्षा आगरा से हुई है तो वह बाहरी कैसे हो सकते हैं. वहीं छोटे लाल के होर्डिंग में लिखा है कि दलितों की राजधानी कहा जाता है आगरा. चित्तौड़ हटाओ आगरा को बचाओ. वहीं पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि वे किसी छोटे लाल को नहीं जानते हैं और ऐसा कोई कार्यकर्ता पार्टी में नहीं है.

 

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