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मर्द से औरत या औरत से मर्द बनने की प्रक्रिया, ऐसे होता है सेक्स चेंज ऑपरेशन

आपने ऐसी कई खबरें सुनी होंगी. जहां कोई लड़की पैदा होती है पर बड़े होकर उसे एहसास होता है कि वो अपना जीवन एक महिला के तौर पर नहीं जीना चाहती. वो एक पुरुष बनना चाहती है. या कोई लड़का पैदा होता है. पर बाद में उसे एहसास होता है कि वो लड़का नहीं लड़की बनकर अपना जीवन बिताना चाहता है. ऐसा करने के लिए उनको सेक्स चेंज ऑपरेशन करवाना पड़ता है.

पर ये सेक्स चेंज होता क्या है? ये जानने से पहले आपको कुछ ज़रूरी शब्दों का मतलब समझना ज़रूरी है.

डॉक्टर अनुभव गुप्ता, सर गंगाराम हॉस्पिटल में एक प्लास्टिक सर्जन हैं. उनके मुताबिक ‘जेंडर’ और ‘सेक्स’ दोनों अलग चीज़ें होती हैं. ‘सेक्स’ वो है जिसके साथ आप पैदा होते हैं. और जेंडर वो पहचान है जो समाज आपको देता है. अगर कोई इंसान जिन प्राकृतिक अंगों से साथ पैदा हुआ है, उन्हीं के अनुरूप महसूस नहीं करता तो उसे ‘आइडेंटिटी डिसऑर्डर’ होता है.

डॉक्टर गुप्ता कहते हैं, “हो सकता है कोई इंसान सेक्स से पुरुष हो पर जेंडर से औरत जैसा महसूस करे.”

तो सेक्स चेंज ऑपरेशन होता कैसे है?

जो लोग उस ‘सेक्स’ के साथ कम्फर्टेबल नहीं होते जिसमें वो पैदा होते हैं, ऑपरेशन करवाकर अपना लिंग परिवर्तन करवाते हैं. सर्जरी के ज़रिये एक ट्रांसजेंडर के शरीर को इस तरह से बदला जाता है कि वो उसकी सेक्स से जुड़ी चॉइस को मैच करे.

अगर किसी पुरुष को महिला जैसा महसूस होता है, तो उसका ब्रेस्ट इम्प्लांट किया जाता है. साथ ही चेहरे के फ़ीचर्स बदलने के लिए भी सर्जरी की जाती है. प्राइवेट पार्ट बदलने के लिए भी सर्जरी का ही सहारा लेना पड़ता है.

ये सारी सर्जरी पुरुष के लिंग को हटा देने भर पर खत्म नहीं होती. इसमें अंडकोषों को हटाया जाता है, लिंग के उपरी सिरे को हटाकर क्लिटॉरिस का रूप दिया जाता है. सेक्स चेंज होने के बाद भी इंसान अपनी सेक्स लाइफ एन्जॉय कर पाए, इसलिए पुरुष के लिंग को प्राकृतिक तौर पर वजाइना जैसा बनाया जाता है.

पर ऐसा करने में समय लगता है. ये एक दिन की बात नहीं होती. इसे स्लो प्रोसेस समझिये.

लेज़र हेयर रिमूवल से शरीर के बाल हटवाए जाते हैं.

डॉक्टर गुप्ता का कहना है कि जब कोई अपना सेक्स चेंज करने की सोचता है तो सबसे पहले उसे दो मनोवैज्ञानिकों के पास भेजा जाता है. ये देखने के लिए कि क्या वो वाकई तैयार है. एक बार इस चीज़ का फ़ैसला हो जाए तो उसे ‘रोल प्ले’ करने के लिए कहा जाता है. मतलब दूसरे जेंडर के इंसान की तरह बिहेव करने को बोला जाता है. ये कम से कम तीन महीने चलता है. ये चीज़ उनको आने वाली परिस्तिथियों के लिए तैयार करती है. उनको पता चल पाता है कि आगे क्या होने वाला है.

पहली सर्जरी ये रोल प्ले खत्म होने के बाद ही होती है. सबसे पहले चेहरे की प्लास्टिक सर्जरी होती है. फिर ब्रेस्ट हटाए या लगाए (इम्प्लांट) जाते हैं.

इतना ही काफ़ी नहीं है. लेज़र हेयर रिमूवल से शरीर के बाल हटवाए जाते हैं. ये सिर्फ उस केस में होता है जब कोई आदमी औरत बनना चाहता है. अंत में सर्जरी से आवाज़ को हल्की या पतली किया जाता है. और प्राइवेट पार्ट को बदला जाता है. ऐसा एक बार हो गया तो दोबारा वापस बदला नहीं जा सकता. सारे बदलावों को शरीर में रिफ्लेक्ट होने में एक साल से ज़्यादा का समय लगता है.

क्या इसमें दर्द होता है?

जिस समय सर्जरी हो रही होती है तो पेशेंट को बेहोशी का इंजेक्शन लगाया जाता है. पर ऑपरेशन होने के कुछ दिनों तक हल्का-हल्का दर्द रहता है. उन जगहों पर जहां खाल काटी गई है. पर ऐसा नहीं होता कि ये दर्द बर्दाश्त के बाहर होता हो.

ऑपरेशन के बाद हॉर्मोनल थेरेपी चलती है

महिलाओं में एक हॉर्मोन होता है जिसे कहते हैं एस्ट्रोजन. ये उनके शरीर में सारी महिलाओं वाली चीज़ें कंट्रोल करता है. जैसे उनकी पतली आवाज़. उनकी सेक्स करने की इच्छा. वगैरह. पुरुषों में जो हॉर्मोन होता है उसे कहते हैं टेस्टोस्टेरोन. सर्जरी के साथ साथ शरीर में ये हॉर्मोन बदलना भी बहुत ज़रूरी है. इसलिए ऑपरेशन के साथ-साथ हॉर्मोनल थेरेपी भी चलती है. पर डॉक्टर गुप्ता कहते हैं कि पेशेंट को थेरेपी लगातार नहीं लेनी चाहिए. कुछ समय का ब्रेक लेना चाहिए. फिर दोबारा शुरू करनी चाहिए.

महिलाओं में एक हॉर्मोन होता है जिसे कहते हैं एस्ट्रोजन. महिलाओं में एक हॉर्मोन होता है जिसे कहते हैं एस्ट्रोजन.

क्या ये सर्जरी करवाना ख़तरनाक है?

साइंस ने बड़ी तरक्की कर ली है. इसलिए ऐसी सर्जरीज़ के फेल होने का खतरा बहुत कम होता है. पर ज़रूरी भी नहीं कि ये 100% सफ़ल भी हों. एक तो ऐसे ऑपरेशन में तीन से पांच लाख रूपये लग जाते हैं. साथ ही इनके साइड-इफेक्ट्स भी कई होते हैं.

1. हॉर्मोन बदलने वाले इंजेक्शन आपके मूड के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं. साथ ही एस्ट्रोजेन की मात्रा अगर ज़्यादा हो गई तो खून भी गाढ़ा हो जाता है. इससे हार्ट स्ट्रोक भी पड़ सकता है.

2. सबसे ज़रूरी बात. सर्जरी के बाद इंसान प्राकृतिक तौर पर मां या बाप नहीं बन सकता. इसलिए पहले से महिलाओं के ‘अंडों’ और पुरुषों के स्पर्म को स्टोर कर दिया जाता है. ताकि आगे IVF की मदद से बच्चा पैदा हो सके.

सर्जरी के बाद इंसान प्राकृतिक तौर पर मां या बाप नहीं बन सकता. सर्जरी के बाद इंसान प्राकृतिक तौर पर मां या बाप नहीं बन सकता.

यहां पर भी चीज़ें खत्म नहीं होती. आगे जाकर अपने चेहरे से लेकर शरीर तक सबका ध्यान रखना पड़ता है.

इसलिए डॉक्टर्स कहते हैं कि सर्जरी तभी करें, जब पूरे तरीके से श्योर हों…

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