धर्म

भोलेनाथ और हनुमान जी का ये रहस्य जान खिसक जाएगी पैरों तले जमीन

आज सोमवार यानी शिव जी का दिन है. ऐसे में आज हम आपको भगवान शिव और हनुमान जी के एक ऐसे रहस्य के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें बहुत कम लोग ही जानते हैं. आपको जान आश्चर्य होगा कि हनुमान जी और कोई नहीं बल्कि शिवजी का ही एक अवतार हैं. शिवजी ने हनुमान का अवतार लिया था इस बात को कई जगह पढ़ने को मिल जाता हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि उन्होंने आखिर हनुमान का ये रूप किस वजह से लिया था? आज हम इसी राज पर से पर्दा उठाने जा रहे हैं.

ये कहानी रामायण के प्रारंभ जे जुड़ी हुई हैं. इस दौरान भगवान श्रीराम ने धरती पर जन्म लिया था. ऐसे में शिवजी का मन किया कि पृथ्वीलोक जाकर हनुमान जी के दर्शन किए जाए. इस दौरान भगवान राम सिर्फ 5 वर्ष के थे. हालाँकि शिवजी के साथ एक समस्यां ये भी थी कि वे अपने असली रूप में धरती पर नहीं जा सकते थे.

इस बीच एक बार शिवजी अपनी पत्नी पार्वती से बोले ‘हे पार्वती! क्या तुम जानती हो कि मेरे राम ने पृथ्वीलोक में जन्म लिया हैं. मैं उनके दर्शन और सेवा करना चाहता हूँ. मेरी इच्छा हैं कि मैं भी पृथ्वीलोक जाकर उन्ही के साथ वहां रहूँ.’
शिवजी के ये कथन सुन पार्वती विचलित हो गई और कहने लगी ‘स्वामी! मुझ से भला ऐसी क्या गलती हो गई जो आप मुझे छोड़ पृथ्वीलोक जा रहे हैं. यदि आप मुझे छोड़ चले गए तो मैं आपके बिना जीवित नहीं रह पाउंगी.’

पार्वती की ये बातें सुन शिवजी को एहसास हुआ कि वे उनके बिना नहीं रह सकती हैं. यदि मैं चला गया तो पार्वती अपने प्राण त्याग देगी. ऐसे में शिवजी बड़ी दुविधा में फंस गए. एक तरफ तो उन्हें पार्वती के साथ भी रहना हैं और दूसरी तरफ धरती पर जाकर श्रीराम की सेवा भी करनी हैं. इसलिए शिवजी ने एक गज़ब का उपाय निकाला. उन्होंने पार्वती को अपने 11 रुद्राक्षों का राज बताते हुए कहा कि ‘हे पार्वती! मैं अपने 11 रुद्राक्षों के अवतार में से एक वानर अवतार आज लेने वाला हूँ. मेरा ये वानर अवतार हनुमान के रूप में जाना जाएगा.’

शिवजी के ये कथन सुन पार्वती विचलित हो गई और कहने लगी ‘स्वामी! मुझ से भला ऐसी क्या गलती हो गई जो आप मुझे छोड़ पृथ्वीलोक जा रहे हैं. यदि आप मुझे छोड़ चले गए तो मैं आपके बिना जीवित नहीं रह पाउंगी.’

पार्वती की ये बातें सुन शिवजी को एहसास हुआ कि वे उनके बिना नहीं रह सकती हैं. यदि मैं चला गया तो पार्वती अपने प्राण त्याग देगी. ऐसे में शिवजी बड़ी दुविधा में फंस गए. एक तरफ तो उन्हें पार्वती के साथ भी रहना हैं और दूसरी तरफ धरती पर जाकर श्रीराम की सेवा भी करनी हैं. इसलिए शिवजी ने एक गज़ब का उपाय निकाला. उन्होंने पार्वती को अपने 11 रुद्राक्षों का राज बताते हुए कहा कि ‘हे पार्वती! मैं अपने 11 रुद्राक्षों के अवतार में से एक वानर अवतार आज लेने वाला हूँ. मेरा ये वानर अवतार हनुमान के रूप में जाना जाएगा.’

शास्त्रों की माने तो भगवान शिव को ये पहले से ही ज्ञात था कि कलयुग में ना तो वे रहेंगे और ना ही श्रीराम रहेंगे. ऐसे में उन्होंने पृथ्वीलोक के कल्याण के लिए हनुमान जी का रूप लिया जिन्हें अमरता का वरदान भी प्राप्त हैं. यही वजह हैं कि आज भी हनुमान जी धरतीलोक पर कहीं ना कहीं रहते हैं और अपने भक्तों के दुःख दर्द को दूर करते हैं. समय समय पर इस बात के कई साबूत मिले हैं कि हनुमान जी इस धरती पर आज भी मौजूद हैं.

यही वजह हैं कि जब कोई भक्त हनुमान जी को प्रसन्न कर देता हैं तो उनकी मनोकामना बहुत शीघ्र पूर्ण हो जाती हैं. हनुमान जी के पास उपलब्ध इतनी महाशक्तियां होने का एक कारण ये भी हैं कि वो भगवान शिव का ही एक अवतार हैं.

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