/** * The template for displaying the header * */ defined( 'ABSPATH' ) || exit; // Exit if accessed directly ?> भाजपा VS दीदी : जानिए ममता के लिए क्यों सबसे अहम है ये चुनाव – JanMan tv
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भाजपा VS दीदी : जानिए ममता के लिए क्यों सबसे अहम है ये चुनाव

पश्चिम बंगाल समेत चार राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। इन पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कुछ चीजें पहली बार हो रही हैं। पश्चिम बंगाल में 2011 में सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पहली बार इतनी कड़ी टक्कर मिल रही है। रोचक बात यह है कि टक्कर देने वाली पार्टी 34 साल बंगाल में राज करने वाली वामपंथी विचारधारा की लेफ्ट नहीं, बल्कि दक्षिणपंथी विचाराधारा की भारतीय जनता पार्टी (BJP) है।

इसी तरह तमिलनाडु में 40 साल में पहली बार करुणानिधि और जयललिता के बिना चुनाव होंगे। असम में NRC लागू होने के बाद यह पहला विधानसभा चुनाव है, तो वहीं केरल में लेफ्ट को एकमात्र लाल गढ़ बचाने की चुनौती भी संभवतः पहली बार ही मिल रही है। केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में पहली बार अल्पमत में आने के कारण कार्यकाल पूरा किए बिना ही कांग्रेस की सरकार गिर गई। यहां कांग्रेस के 2 मंत्रियों समेत 5 विधायकों के BJP में शामिल होने से वी नारायणसामी सरकार को इस्तीफा देना पड़ा। इसके साथ ही पहली बार पुडुचेरी में BJP के तीन नॉमिनेटेड विधायक बने थे। यही नहीं कांग्रेस के दिग्गजों को तोड़कर BJP यहां पहली बार मजबूती के साथ मैदान में दिख रही है। पुडुचेरी में फिलहाल राष्ट्रपति शासन लागू है।

बंगाल: पहली बार भाजपा मुख्य विपक्षी दल, लेफ्ट चर्चा में नहीं
2014 की लोकसभा जीत के बाद BJP ने हिंदी भाषी राज्यों में अपने प्रसार पर ज्यादा जोर देना शुरू किया। तब तक कर्नाटक के अलावा BJP को ऐसे राज्यों में जीत का इंतजार था, लेकिन 2016 के असम विधानसभा चुनाव में मिली सफलता ने पार्टी के बंगाल मिशन को और ताकत दी। बंगाल चुनाव में BJP को 11% वोट मिले और राज्य में तीसरे नंबर की पार्टी थी। लेफ्ट 27.3% और कांग्रेस 12.3% के साथ करीब 40% वोट तो ले आए, लेकिन ममता दीदी को जीतने से रोक नहीं सके। इस चुनाव में TMC को 45% वोट मिले थे।

जाहिर है BJP को लेफ्ट और कांग्रेस के निराश वोटर्स में एक उम्मीद दिखी। लेफ्ट और कांग्रेस की निष्क्रियता से खाली हुई जगह को भरने के लिए BJP ने काम करना शुरू किया और लगातार अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। इसका नतीजा यह हुआ कि 2019 के लोकसभा चुनाव में 41% वोटों के साथ BJP दूसरे नंबर की पार्टी बन गई। भाजपा को लोकसभा की 42 में से 18 सीटों पर सफलता मिली। यहीं से BJP का मिशन बंगाल शुरू हो गया। आज BJP ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है।

तमिलनाडु: चार दशक में जयललिता-करुणानिधि के बिना पहला चुनाव
5 दिसंबर 2016 को जयललिता की मौत के दो साल बाद 2018 में करुणानिधि का भी 94 साल की उम्र में निधन हो गया। करुणानिधि और जयललिता 40 साल तक तमिलनाडु की राजनीति के दो ध्रुव रहे। इस दौरान जयललिता 6 बार और करुणानिधि 5 बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहे।

इन आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि तमिलनाडु के चुनाव में इस बार कितना खालीपन रहेगा। जयललिता और करुणानिधि दोनों ही तमिल फिल्म इंडस्ट्री से आए थे। इस बार तमिल सिनेमा से एकमात्र किरदार कमल हासन हैं, लेकिन उनका असर जयललिता या करुणानिधि जैसा नहीं है।

असम: NRC के बाद पहली बार चुनाव होंगे
2016 में जब BJP ने असम में अपना चुनाव प्रचार अभियान शुरू किया, तब NRC यानी नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजनशिप सबसे बड़ा मुद्दा था। BJP ने जोरदार तरीके से इसको लागू करने का मुद्दा उठाया जिसका नतीजा यह रहा कि असम की जनता ने भाजपा को सत्ता में ला दिया, लेकिन भाजपा के लिए सबसे बड़ी समस्या इसे लागू करने के बाद आई। NRC को लागू करने का मकसद घुसपैठियों की पहचान करना था, लेकिन फाइनल लिस्ट में 19 लाख लोगों के नाम नहीं थे।

इनमें से ज्यादातर वे लोग थे जिनका दावा था कि वे असम के मूल निवासी हैं। राजनीतिक तौर पर BJP के लिए यह एक बड़ा झटका था, क्योंकि यही लोग असम में भाजपा के कोर वोट बैंक थे। इस चुनाव में BJP को अपने पुराने वादे पर सही तरीके से अमल न कर पाने का खामियाजा भुगतने का डर सता रहा है तो दूसरी ओर NRC में हुई लापरवाही ने कांग्रेस को वापसी का मौका दे दिया है।

केरल: पहली बार लेफ्ट अपना गढ़ बचाने के लिए लड़ेगा
उत्तर-पूर्व में अपना गढ़ त्रिपुरा गंवाने के बाद अब लेफ्ट का आखिरी गढ़ केरल है। बंगाल और राष्ट्रीय राजनीति में गठबंधन में साझेदार कांग्रेस केरल में लेफ्ट के लिए प्रमुख चुनौती है। लेकिन इस बार सत्ता गंवाने से ज्यादा बड़ी चिंता लेफ्ट को अपना कोर वोट बैंक गंवाने की है। केरल में हिंदू समाज अब तक वामपंथी विचारधारा का समर्थक माना जाता था। अब इसी हिंदू वोटर को भाजपा लव जिहाद के मुद्दे पर लुभाती नजर आ रही है। लव जिहाद का मुद्दा कुछ हद तक केरल में ईसाई वोटरों पर भी काम कर सकता है।

यहां करीब 55% हिंदू, 27% ईसाई और 18% मुस्लिम वोटर हैं। संघ परिवार और BJP ने लेफ्ट के गढ़ में सेंध लगाने की तैयारी जोर-शोर से शुरू कर दी है। उसकी कोशिश है कि वो इस विधानसभा चुनाव में एक असरदार विपक्ष की तरह राज्य में अपनी जगह बना ले। ऐसा होता है तो बंगाल की तरह अगले चुनाव तक भाजपा इस लाल गढ़ में सेंध लगाने में सफल हो सकती है। हाल ही में मेट्रो मैन के नाम से प्रसिद्ध ई श्रीधरन BJP में शामिल हुए हैं। पार्टी उनके चेहरे को चुनाव में भुनाने का पूरा प्रयास करेगी।

पुडुचेरी: कांग्रेस के बागियों के सहारे कमल खिलाने की तैयारी में BJP
केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में कांग्रेस के बागी विधायकों के बूते BJP कमल खिलाने की तैयारी में है। यहां पार्टी का एक भी निर्वाचित विधायक नहीं है। पिछली बार BJP के तीन नॉमिनेटेड विधायक थे। इससे पहले राज्य में कांग्रेस गठबंधन सरकार कार्यकाल पूरा किए बिना गिर गई।

पार्टी के पांच विधायकों और एक सहयोगी DMK विधायक के इस्तीफे के कारण सरकार बहुमत के आंकड़े से दूर हो गई और फ्लोर टेस्ट से पहले ही प्रदेश के मुख्यमंत्री वी नारायणसामी को इस्तीफा देना पड़ा। भाजपा ने यहां कांग्रेस विधायकों को अपने पाले में लाकर सरकार को मुसीबत में डाल दिया था। यहां कांग्रेस के 2 मंत्रियों समेत 4 विधायक BJP में शामिल हो गए। कांग्रेस ने अपने एक विधायक को अयोग्य घोषित कर दिया था। फिलहाल यहां राष्ट्रपति शासन लागू है।

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