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बुलंदशहर में पत्नी के हत्यारे को उम्रकैद, बेटी की गवाही के आधार पर कोर्ट ने सुनाया निर्णय

 

बुलंदशहर में 13 अक्तूबर 2016 को ममता की उसके पति मनोज कुमार ने फावड़े से हमला कर उसकी हत्या कर दी थी। मामले में अब एडीजे 12 विनीता विमल के न्यायालय ने दोनों पक्षों के गवाहों के बयानों और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी पति मनोज को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने मनोज को उम्रकैद व दस हजार रुपए जुर्माना सुनाया है। जुर्माना जमा न करने पर एक साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।

शादी के बाद से ही ससुराल वाले करते थे उत्पीड़न
जिले के रहने वाले महेंद्र सिंह उर्फ मामचंद्र ने थाना स्याना पर 14 अक्टूबर 2016 को तहरीर दी थी। जिसमें बताया था कि उसने अपनी बेटी ममता की शादी करीब 16 साल पहले स्याना के गांव हरवानपुर निवासी मनोज के साथ की थी। शादी के बाद से ही आरोपी ससुराल वाले उसका उत्पीड़न करने लगे थे। शादी के तीन साल बाद उसने एक बेटी को भी जन्म दिया था।

शादी के 10 साल बाद जिंदा जलाने की गई थी कोशिश
शादी के करीब दस साल बाद आरोपी पति ने ममता को जलाकर मारने की कोशिश भी की थी। जिसकी शिकायत पीड़ित चिंगरावठी चौकी पर की थी। लेकिन, बाद में दोनों पक्षों में फैसला हो गया। आरोप है कि आरोपी के द्वारा ममता को जलाने से उसके चेहरे व गर्दन आदि पर निशान पड़ गए थे। आरोपी कुछ दिन तक ठीक रहा, लेकिन 13 अक्तूबर 2016 को आरोपी पति ने फावड़े से वार कर उसकी हत्या कर दी।

बेटी की गवाही के आधार पर कोर्ट ने सुनाया निर्णय
मृतका के पिता ने आरोपी पति समेत अन्य ससुराल वालों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। पुलिस ने केवल मनोज के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। जबकि अन्य को क्लीनचिट दे दी थी। मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से कुल दस गवाह पेश किए गए। जिसके आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए सजा सुनाई है। बताया गया कि वारदात के दौरान प्राची घर पर ही मौजूद थी। उसके पिता मनोज ने उसके सामने ही मां ममता की फावड़े से हत्या की थी। प्राची की गवाही पर ही अन्य आरोपियों को पुलिस ने क्लीनचिट दे दी थी। उसने बताया था कि उसके पिता ने ही हत्या की है। अन्य परिजनों का उसमें कोई हाथ नहीं था।

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