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बिहार में कोरोना: लोगों का अजीब तर्क- टीके के जरिए हमें मारना चाहती है सरकार ताकि पैसे बचें

पटना. कोरोना से उपजे हालात को लेकर लोगों में अलग तरह की नाराजगी है। गांवों में जाएं तो कुछ लोग तर्क के साथ पाबंदियों का विरोध करते हैं तो कुछ अजीब तर्क देते हुए सरकार को कोसते हैं। मीडिया टीम जब बिहार के शेखपुरा के गांवों में पहुंची तो लोगों ने इसी तरह से अपनी बात रखी। पढ़ें, ग्राउंड रिपोर्ट…

शेखपुरा के दो गांवों का हाल जुदा है। एक ओर बिहार के पहले मुख्यमंत्री बिहार केसरी श्रीकृष्ण सिंह के पैतृक गांव माउर के अब तक 70% लोगों ने कोरोना का टीका लगवा लिया है, दूसरी ओर जिले के अंतिम छोर पर स्थित पानापुर गांव में पहली डोज लेने के बाद दूसरी डोज लेने में ग्रामीण कतरा रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि टीके की पहली डोज लेने के बाद उनकी तबीयत खराब हो गई। इसलिए अब वे दोबारा टीका नहीं लगवाएंगे।

पानापुर गांव के आंगनबाड़ी केंद्र में बैठी हेल्थ वर्कर क्रांति कुमारी कहती हैं कि पिछले महीने ग्रामीणों को वैक्सीन दी गई। इसके बाद कुछ लोगों को बुखार की शिकायत हो गई। लोग बता रहे हैं कि सरकार साजिश रचकर हम लोगों को मारना चाहती है ताकि वृद्धा अवस्था पेंशन नहीं देनी पड़े। इसलिए अब हम लोग टीका नहीं लगवाएंगे।

वहीं, गांव की आंगनबाड़ी वर्कर रेखा देवी ने बताया कि ग्रामीण धमकी दे रहे हैं। अगर वे उन्हें फिर से टीका लगाने के लिए कहेंगी तो वे लोग पिटाई कर देंगे और सिर फोड़ देंगे।

कोरोना से किसी की मौत नहीं
2400 की आबादी वाले पानापुर गांव के ग्रामीणों का दावा है कि अब तक यहां कोरोना का कोई मरीज नहीं मिला और न ही किसी की जान गई है, तो वे लोग टीका क्यों लगवाएं? टीका लगवाने के बाद ही बुखार और सर्दी-खांसी हो गई। यह बीमारी से बचाने के लिए नहीं, बल्कि मार देने के लिए लगाया जा रहा है।

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