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बिहार : नदियों में बहती लाशें बयां कर रही हैं नीतीश सरकार का निर्मम चेहरा

पूरे भारत में कहर बरपा रहे कोरोना की तेवरों के बीच, बिहार के बक्सर जिले से एक ह्रदयविदारक घटना सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार को बक्सर जिले में गंगा किनारे 100 से अधिक शव पाए गए, जिनमें से अधिकांश एक विघटित अवस्था में थे। कई शव नदी में में तैर रहे थे तो कई पर गिद्ध झपट रहे थे। हालांकि, बक्सर प्रशासन ने दावा किया कि ये शव उत्तर प्रदेश से बह कर बक्सर पहुंचे हैं, परन्तु वहां के स्थानीय लोगों की माने तो बिहार में भी लोगों की कोरोना से कम मृत्यु नहीं हो रही है। जिस तरह इंसानियत को शर्मशार करने वाली तस्वीर सामने आई है इसका कारण है नीतीश सरकार द्वारा कोविड -19 को गंभीरता से न लेना।

पूर्वी उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे बिहार राज्य के एक नगर परिषद शहर बक्सर से चौंकाने वाला दृश्य सामने आया। बक्सर जिले के चौसा के पास स्थित महादेव घाट की तस्वीरों में गंगा स्थित घाट को लाशों के अम्बार से पटा हुआ था। हालांकि, जैसे ही इस घटना का वीडियो सामने आया जिला प्रशासन के कान खड़े हो गए। कुछ समाचार चैनलों ने शवों की संख्या 100 से अधिक होने का दावा किया है, जिसे बीडीओ ने “बढ़ा-चढ़ा कर पेश शंख्या” के रूप में बता कर खारिज कर दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि गंगा नदी के तट पर 150 से अधिक शव है, जिनकी मृत्यु कोविड -19 के कारण हुई है।

हालांकि, बक्सर जिला प्रशासन ने दावा किया कि शव पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के हैं। वहीं स्थानीय लोगों ने दावा किया है कि गंगा के किनारे बसे गांवों के कई लोग नदी में शवों को विसर्जित कर देते हैं। बक्सर एसडीओ के.के. उपाध्याय ने कहा, “प्रारंभिक जांच के दौरान, यह सामने आया है कि शव विघटित अवस्था में हैं और 5 से 6 दिन से अधिक पुराने हैं। हम घटना की जांच करने और चौकसी बढ़ाने के लिए गंगा के किनारे स्थित क्षेत्र वाराणसी और इलाहाबाद (प्रयागराज) में अपने समकक्षों के साथ बातचीत कर रहे हैं।”

शवों के disposal का काम जिला प्रशासन उचित तरीके से कर रहा है। महादेव घाट की स्थिति बेहद चौंकाने वाली है, जहां नदी में बह रहे शवों को सड़क के कुत्तें और गिद्ध खा रहे हैं। इससे कोविड -19 के और फैलने का खतरा बढ़ गया है।

कुछ लोगों ने इसे अंतिम संस्कार या अंतिम संस्कार की उच्च लागत को भी इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और कहा कि ये शव उन लोगों के थे, जिन्होंने चौसा के महादेवा घाट पर कोविड -19 के कारण दम तोड़ दिया था। रिपोर्ट के अनुसार, एक व्यक्ति ने बताया कि, “शव कोविड -19 से संक्रमित लोगों के हैं। मैं सुबह से यहां हूं, मैंने 30-35 शव देखे हैं। कुछ लोगों ने शवों को नदी में डुबो दिया, जबकि अन्य ने आधे जले हुए शवों को पानी में बहा दिया।“ लोगों का यह आरोप सीधे प्रशासनिक नाकामी की तरफ है।

देखा जाये तो इसके जिम्मेदार नीतीश सरकार है। हालांकि, राज्य की अधिकारिक कोरोना मामलों की संख्या और कोविड -19 से होने वाली मौतों की संख्या तो काफी कम दिखाई देती है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात बेहद गंभीर हैं। बक्सर की घटना से यह साबित भी होता है कि आधिकारिक आंकडे सिर्फ उन लोगों है जिनकी मौत सरकारी अस्पताल में हुई है। नीतीश सरकार यह दावा कर रही है कि राज्य में 10,174 नए कोविड -19 संक्रमितों की पहचान सोमवार को हुई।

पिछले 24 घंटे में 1 लाख 112 सैम्पल की कोविड -19 जांच की गई जिसमें राज्य में कोविड -19 का संक्रमण दर 10.16 फीसदी रहा। एक दिन पूर्व राज्य में संक्रमण दर 10.31 फीसदी था। वही लोगों की कोविड -19 से मौत का सरकारी आंकड़ा भी 80 से नीचे ही है, परन्तु जिस तरह के तस्वीर बक्सर से आई है वैसी ही स्थिति अन्य जिलों में भी हो सकती है। अगर कोविड -19 गावों तक पहुँच गया तो यह किसी तांडव से कम नुकसान नहीं करेगा।

बिहार के गावों में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर न के बराबर है और अगर कोरोना पहुँच चुका है तो यह कई राज्यों से कहीं अधिक तबाही मचा देगा। यह नीतीश कुमार की ही विफलता है जो उन्होंने कोविड -19 को फैलने से रोकने के लिए न तो कड़े कदम उठाये और न ही इतने वर्षों से प्रशासन में होने के बावजूद मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम किया।

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