क्राइम

बिहार : इशारों में भाई को बताई दिव्यांग- बलात्कारियों ने लकड़ी डाल आंख फोड़ दी, देह पर 1 इंच कपड़ा नहीं छोड़ा

दरभंगा के DMCH के आंख विभाग में भर्ती मधुबनी की दिव्यांग रेप पीड़िता अब होश में है। शरीर के हिस्सों में हलचल हो रही है। लेकिन उसकी कराह अब भी अनबोली है, क्योंकि वो बोल-सुन नहीं सकती। चंद रोज पहले तक देख सकती थी, लेकिन उसपर रेप जैसा कहर बरपानेवाले दरिंदों ने आंखें फोड़ दीं। आज घटना के 2 दिन बाद जब वो मासूम बेहोशी से उठी तो अपने साथ हुए जुल्म को उंगलियों के इशारों से बताया। अपने कुकर्म को छुपाने के लिए शराब पिए बलात्कारियों ने जो कुछ किया, उसे सुन हर कोई सिहर उठा।

बगल के पेड़ से तोड़ जामुन की लकड़ी आंखों में घुसाई

12 जनवरी को हुई इस वारदात के 3 आरोपी परिवार की निशानदेही पर गिरफ्तार तो किये जा चुके हैं, लेकिन इंतजार पीड़िता की हालत में सुधार होने का है। डॉक्टरों के मुताबिक उसकी दोनों आंखें बुरी तरह जख्मी हैं और उसमें लगातार दवा डाली जा रही है। डॉक्टरों की कोशिश सबसे पहले बुरी तरह सूज चुकी आंखों का सूजन कम करना है। सूजन कम होने के बाद ही डॉक्टर बता पायेंगे कि आंखों की रौशनी बची है या नहीं।

फिलहाल पीड़िता ने अपनी उंगलियों के इशारे से जो बताया है, उसे सुन परिवार से लेकर डॉक्टर तक सिहर जा रहे हैं। अस्पताल के बेड पर लेटे-लेटे ही वो बार-बार अपनी हाथों को आंखों के पास ले जाकर उंगलियों से इशारा करती है। वहां खड़ा भाई चुपचाप उसके इशारों को देखता है। ये पूछने पर कि क्या कह रही है, भाई बताता है – आंख में लकड़ी घुसाया था। यही बात वो बार-बार इशारों से बताती है।

भाई कहता है – अधमरी हाल में जब यह नदी किनारे मिली, तो वो लकड़ी भी बगल में ही खून से सनी पड़ी थी। पास के ही जामुन के पेड़ की लकड़ी थी। शरीर पर कपड़ा नहीं था। अपना गमछा शरीर पर डालकर उसको उठाया था।

पट्‌टी बंधी आंखों से बंधी है उम्मीद की रौशनी

पीड़िता के भाई के मुताबिक वो महज 15 साल की है। परिवार में पीड़िता के अलावा दो और बहनें हैं। एक उससे बड़ी और एक पीड़िता से छोटी है। पूरा परिवार मजदूरी करके ही पेट पालता है। भाई लॉकडाउन के बाद से गांव पर ही था। मजदूरी के लिए फिर से पंजाब जानेवाला था। लेकिन अब बहन को देखे या मजदूरी करें। फिलहाल पूरा दिन अस्पताल में बीत रहा है। इंतजार इस बात का है कि डॉक्टरों की तरफ से कोई तो अच्छी खबर सामने आये। फिलहाल पीड़िता की आंखों पर पट्‌टी बंधी है। लेकिन पट्‌टी खुलते ही बहन इशारों में जब कुछ समझाने लगती है तो भाई को लगता है, शायद किसी आंख में कुछ तो रौशनी है। इसी से उसकी उम्मीद बंधी है।

पीड़िता का इलाज कर रहीं डॉ. अलका झा के मुताबिक दाईं आंख में कुछ रौशनी बचने की उम्मीद है। लेकिन ऐसा लगता है कि बाईं आंख पूरी तरह से खराब हो गई है। हालांकि पूरे तौर पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता। आंखों में काफी सूजन है और अभी जांच करने में मुश्किल हो रही है।

सरकार का कोई नुमाइंदा अबतक नहीं आया

DMCH में भर्ती मासूम का हाल जानने अबतक मीडिया के अलावा कोई नहीं पहुंचा है। पीड़िता के भाई के मुताबिक पुलिसवाले तो आये थे, और मीडिया वाले आते रहते हैं। ये पूछने पर कि क्या कोई नेता या उनका आदमी या DM का कोई आदमी आया था, पीड़िता का भाई कहता है – नहीं, अबतक कोई नहीं आया और ना ही किसी से कोई मदद मिली है।

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