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बड़ा सवाल: क्या खुद को धोनी जैसा साबित कर कोहली की कप्तानी हथियाना चाहते रोहित?

पिछले हफ्ते टीम इंडिया ने बांग्लादेश को रोमांचक मुकाबले में हराकर रिकॉर्ड सातवीं बार एशिया कप पर कब्जा कर लिया. कोच रवि शास्त्री ने इस जीत का श्रेय सबसे ज्यादा कप्तान रोहित शर्मा को दिया. शास्त्री ने कहा कि रोहित के दबाव में शांत रहने की क्षमता के चलते टीम एशिया कप जीती. अब जरा याद कीजिए, यह वो गुण है जिसके लिए पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी सबसे ज्यादा जाने जाते हैं.

दबाव के क्षणों में भी शांत रहकर सोच-समझकर फैसला लेने की जो क्षमता धोनी में हैं, वह विरले कप्तानों में ही देखने को मिलती है. उनके इसी गुण ने उन्हें क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल कप्तानों में से एक बनने में मदद की है. अब एशिया कप में विराट कोहली की जगह टीम की कप्तानी करने वाले रोहित शर्मा ने इस मामले में खुद को भी धोनी जैसा बताया है.

जीत के बाद रोहित ने कहा, ‘मैंने इतने सालों में जितना भी धोनी को कप्तानी करते हुए देखा है, वह कभी भी घबराएं नहीं और फैसला लेने से पहले अपना समय लिया. ये समानताएं मुझमें भी हैं. मैं भी पहले सोचता हूं और उसके बाद फैसला लेता हूं. हम धोनी की कप्तानी में बहुत साल खेले हैं और मैंने ये सब उनसे ही सीखा है.’

अब बात दूसरे एंगल याने टीम के नियमित कप्तान विराट कोहली की. ये बात जगजाहिर है कि मैदान पर शांत रहने के मामले में धोनी से बिल्कुल अलग हैं कोहली. वह मैदान पर आक्रामक रहते हैं और कोई फैसला लेने से पहले बहुत ज्यादा सोचते नहीं हैं.

इसीलिए ये सवाल उठने लगा है कि क्या खुद को धोनी जैसा कप्तान बता कर रोहित ने खुद को कोहली के विपरीत दिखाने की कोशिश की है और क्या ऐसा करके रोहित खुद को वनडे कप्तानी की रेस में आगे करना चाहते हो. इसकी आशंका इस बात से भी बढ़ जाती है कि रोहित और विराट के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा.

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