राजनीति

पीएम मोदी के तरकश में हैं कई और तीर, सबसे बड़ा दांव तो अभी बाकी है

राज्यसभा में जनरल कोटा आरक्षण बिल पास हो गया, विपक्ष के कुछ दलों ने इसका विरोध किया, लेकिन ज्यादातर इसके पक्ष में थे, सो बिल बहुमत से पास हो गया, अब मोदी सरकार ने आम चुनाव से पहले 14 दिनों के लिये बजट सत्र का फैसला लिया है, जिसकी शुरुआत इसी महीने 31 जनवरी से होगी, आपको बता दें कि चुनाव से पहले बजट संबंधी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिये महज कुछ दिनों का सत्र ही पर्याप्त माना जाता है, लेकिन मोदी सरकार ने 14 दिनों का सत्र बुलाया है, जिसके बाद कहा जा रहा है कि चुनाव से ठीक पहले मोदी सरकार कुछ और बड़े दांव खेल सकती है।

कई बिल पास कराये जाएंगे
आपको बता दें कि एक्सपर्ट के अनुसार आम चुनाव से पहले पूर्ण बजट पेश करने की स्थिति नहीं होती, इसलिये कुछ महीनों का खर्च उठाने के लिये लेखानुदान मांग पेश किया जाता है,

इसे वोट ऑन अकाउंट या अंतरिम बजट भी कहते हैं, वोट ऑन अकाउंट के लिये कुछ दिनों का सत्र ही पर्याप्त होता है, लेकिन मोदी सरकार ने 14 दिनों का सत्र बुलाया है, जिसके बाद कहा जा रहा है कि नागरिकता संशोधन बिल, ट्रिपल तलाक को दंडनीय बनाने वाले बिल जैसे लंबित विधेयकों को भी पास कराने की कोशिश कर सकती है।

मोदी सरकार खेल सकती है बड़ा दांव
सिसायी गलियारों में इन बातों की अटकलें तेज हो गई है, कि आम चुनाव से ठीक पहले मोदी सरकार अपने तरकश से जनरल कोटा जैसे कुछ और तीर छोड़ सकती है।

क्योंकि इस बात की संभावना बेहद कम है कि विपक्ष विवादित मुद्दों पर सहयोगी रुख अपनाये, लेकिन जिस तरह के विपक्ष के ज्यादातर दल जनरल कोटा बिल का विरोध नहीं कर सके। उसके बाद संभावना जताई जा रही है कि सरकार ऐसे ही कुछ और बड़े दांव खेलने की तैयारी में है।

किसानों को सहायता
शीतकालीन सत्र में संसद का काम प्रभावित रहा, खासकर उच्च सदन का, जहां मुश्किल से कुछ ही काम हो पाया, जनरल कोटा बिल इसका अपवाद रहा, इस दिन पूरे दिन सदन की कार्यवाही चली, जिस तरह से अचानक बिल लाया गया, और इसे पास करवा लिया गया, सरकार चुनाव से पहले कुछ और कदम ऐसे उठा सकती है, उदाहरण के तौर पर किसानों को वित्तीय राहत पहुंचाने जैसे फैसले भी हो सकते हैं।

अयोध्या में राम मंदिर
अयोध्या में भव्य राम मंदिर को लेकर सालों से राजनीति होती रही है, वीएचपी और आरएसएस जैसे हिंदूवादी संगठन लगातार सरकार से मांग कर रहे हैं कि इसके लिये अध्यादेश लाया जाए, कानून बनाया जाए, हालांकि हाल ही में पीएम मोदी ने एक इंटरव्यू में कहा है कि वो कोर्ट के फैसले का इंतजार करेंगे, अदालती प्रक्रिया में विधायिका दखल नहीं देगी।

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