उत्तर प्रदेश

पंचायत चुनाव : ड्यूटी में जान गंवाने वाले कर्मियों के आश्रितों को 30-30 लाख देगी योगी सरकार

उत्तर प्रदेश में बीते माह पंचायत चुनाव के दौरान महज तीन मौत स्वीकार करने वाली योगी सरकार बैकफुट पर आ गई है। अब करीब 1200 कर्मचारियों के परिवार को 30 लाख मुआवजा देने की तैयारी कर रही है। इस पर अंतिम फैसला कैबिनेट में लिया जाएगा।मीडिया  ने 15 अप्रैल से 5 मई के बीच चुनाव ड्यूटी के दौरान संक्रमित हुए कर्मियों की मौत का मुद्दा जोरशोर से उठाया था। 706 मृतक शिक्षकों की सूची प्रकाशित करने के साथ 300 परिवारों का दर्द जाना था। इसके बाद ही शासन हरकत में आया।

30 दिन के भीतर मरने वालों को शामिल किया गया
सूत्र बताते हैं कि निर्वाचन ड्यूटी के 30 दिन के अंदर अगर किसी कर्मचारी की मौत होती है और उसके बाद कोविड की रिपोर्ट है तो उसके परिवार वालों को 30 लाख रुपए दिए जाएंगे। अभी तक की रिपोर्ट के अनुसार इसके लिए करीब 600 करोड़ रुपए की आवश्यकता होगी। सरकार का अनुमान है कि मृतक आश्रित की संख्या एक हजार से 1200 तक हो सकती है। अभी 250 करोड़ रुपए हैं, लेकिन सरकार 350 करोड़ रुपए और इस मद में लाएगी। हालांकि पहले आयोग ने सिर्फ तीन लोगों को इस मुआवजे के योग्य पाया था। लेकिन अब उसकी संख्या काफी बढ़ गई है।

कर्मचारी संगठन का दावा- 3 हजार से ज्यादा की मौत
कर्मचारी संगठनों के अनुसान तीन हजार से ज्यादा लोगों की कोरोना के दौरान मौत हुई है। इसमें करीब 2400 से ज्यादा की सूची सरकार को शिक्षक और कर्मचारी भेज चुके है। उसमें उनके द्वारा एक करोड़ रुपए की मांग की गई थी।

हाईकोर्ट ने कहा था- मुआवजा एक करोड़ होना चाहिए
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और अजित कुमार की पीठ ने 12 मई को एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा था कि चुनाव ड्यूटी में संक्रमित कर्मचारियों के परिवार को एक करोड़ रुपए मुआवजा मिलना चाहिए। टिप्पणी की थी कि परिवार की आजीविका चलाने वाले व्यक्ति की जिंदगी का मुआवजा और वह भी राज्य और निर्वाचन आयोग की ओर से जानबूझकर उस व्यक्ति को आरटीपीसीआर सहायता के बगैर ड्यूटी करने के लिए बाध्य करने के चलते कम से कम एक करोड़ रुपए होना चाहिए। हमें आशा है कि राज्य निर्वाचन आयोग और सरकार मुआवजे का राशि पर पुनर्विचार करेगी।

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